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एसडीएम ऑफिस में लोगों ने किया हंगामा
jhjhar
Updated Tue, 05 Aug 2014 12:22 AM IST
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लघु सचिवालय में खुले एकीकृत सेवा केंद्र पर लोगों के काम समय पर नहीं निपट पा रहे। ऐसे में जब केंद्र पर पहुंचे लोगों ने सोमवार को केंद्र पर ताला लटका देखा तो उनका गुस्सा भड़क गया। गुस्साए लोगों ने एसडीएम कार्यालय में अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया। लोगों का आरोप था कि एक माह से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी उनके दस्तावेज बनाकर नहीं दिए गए हैं। दस्तावेजों बनाकर देने के लिए बार-बार धक्के खिलाए जा रहे हैं। लोगों ने अधिकारियों को चेताया कि अगर व्यवस्था ठीक नहीं की गई तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे। वहीं, अधिकारी यह तर्क देकर लोगों को समझाने का प्रयास करते रहे कि कंप्यूटर ऑपरेटरों की हड़ताल के कारण ही यह परेशानी आ रही है। जल्द ही व्यवस्थाएं ठीक हो जाएंगी।
तहसील परिसर में बने एकीकृत सेवा केंद्र पर पिछले काफी लंबे समय से अव्यवस्था बनी है। रोजाना यहां पर काफी संख्या में लोग सरकारी कामकाज और रिहायशी, जाति प्रमाण पत्र इत्यादि बनवाने के लिए आते हैं। सिटीजन चार्टर के तहत प्रत्येक कार्य को निपटाने की समयावधि तय होती है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है। लोगों को निश्चित दिन बुला तो लिया जाता है, लेकिन दस्तावेज नहीं बन पाते। गर्मी के इस मौसम में इन कारणोें के चलते लोग धक्के खाने पर मजबूर होना पड़ता है। लोगों का आरोप है कि जब वे दस्तावेजों के बारे में पूछते हैं तो कर्मचारी बड़ी बेरुखी से पेश आते हैं। बिना किसी कर्मचारी की मौजूदगी में प्रमाण पत्र कूड़े के ढेर की तरह पड़े रहते हैं। लोगों अपने दस्तावेजों को इस ढेर में ढूंढते रहते हैं, लेकिन इस ढेर में घंटों हाथ मारने के बाद भी दस्तावेज नहीं मिल पा रहे। सोमवार को 200 से अधिक युवा, बुजुर्ग और महिलाएं दस्तावेज बनवाने और बने हुए दस्तावेजों को लेने के लिए एकीकृत सेवा केंद्र पर पहुंचे थे। जब केंद्र पर ताला लटका देखा तो इन लोगों का गुस्सा भड़क गया। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर कड़ा रोष जताते हुए जमकर नारेबाजी की। बाद में अधिकारियों के समझाने पर लोग यह कहते हुए शांत हो गए कि अगर अव्यवस्थाएं इसी तरह चलती रही तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर विरोध जताने को मजबूर हो जाएंगे।
लोगों की व्यथा
आसोदा निवासी अनिल प्रधान, पटेल नगर निवासी राकेश, टांडा हेड़ी निवासी कमल कुमार, नेहरू पार्क निवासी मास्टर महेंद्र, मांडोठी निवासी नवीन ने कहा कि उन्होंने दस्तावेज बनवाने के लिए करीब एक माह पहले सभी प्रक्रिया पूरी करके आवेदन पत्र जमा करवाए थे, लेकिन अभी तक दस्तावेज नहीं मिल पाए हैं। कभी कोई अधिकारी अपनी कुर्सी से नदारद रहता है तो कभी कोई कर्मचारी। कई बार धक्के खिलाने के बाद भी कहीं कोई सुनवाई नहीं है। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों को रद्दी की ढेरी की तरह रखा जाता है, जहां लोगों को अपने दस्तावेज तलाशने में काफी परेशानी आती है। माजरा निवासी पूनम व सांखोल निवासी उषा ने कहा कि वे भी अपने दस्तावेजों को लेकर पिछले काफी समय से चक्कर काट रही हैं। जब वे प्रमाण पत्र के बारे में पूछती हैं तो कर्मचारी उन्हें बाहर रखी पेटी में ढूंढने की कह देते हैं। सोमवार को भी उनके दस्तावेज नहीं मिले। इस पर अधिकारियों को शिकायत करने गए तो न एसडीएम अपने कार्यालय में मिले और न ही तहसीलदार। यहां तक कि जहां पर दस्तावेज बनने का कार्य किया जाता है, वहां पर भी ताले ही लटके दिखे। ऐसे में उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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वर्जन
इस बारे में एसडीएम वीरेंद्र सहरावत का कहना है कि कंप्यूटर ऑपरेटरों की हड़ताल और स्टाफ की कमी के कारण दस्तावेज बनाने में दिक्कतें आ रही हैं। जल्द ही कुछ न कुछ समाधान कर दिया जाएगा, ताकि लोगों को परेशानी न हो।
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तहसील परिसर में बने एकीकृत सेवा केंद्र पर पिछले काफी लंबे समय से अव्यवस्था बनी है। रोजाना यहां पर काफी संख्या में लोग सरकारी कामकाज और रिहायशी, जाति प्रमाण पत्र इत्यादि बनवाने के लिए आते हैं। सिटीजन चार्टर के तहत प्रत्येक कार्य को निपटाने की समयावधि तय होती है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है। लोगों को निश्चित दिन बुला तो लिया जाता है, लेकिन दस्तावेज नहीं बन पाते। गर्मी के इस मौसम में इन कारणोें के चलते लोग धक्के खाने पर मजबूर होना पड़ता है। लोगों का आरोप है कि जब वे दस्तावेजों के बारे में पूछते हैं तो कर्मचारी बड़ी बेरुखी से पेश आते हैं। बिना किसी कर्मचारी की मौजूदगी में प्रमाण पत्र कूड़े के ढेर की तरह पड़े रहते हैं। लोगों अपने दस्तावेजों को इस ढेर में ढूंढते रहते हैं, लेकिन इस ढेर में घंटों हाथ मारने के बाद भी दस्तावेज नहीं मिल पा रहे। सोमवार को 200 से अधिक युवा, बुजुर्ग और महिलाएं दस्तावेज बनवाने और बने हुए दस्तावेजों को लेने के लिए एकीकृत सेवा केंद्र पर पहुंचे थे। जब केंद्र पर ताला लटका देखा तो इन लोगों का गुस्सा भड़क गया। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर कड़ा रोष जताते हुए जमकर नारेबाजी की। बाद में अधिकारियों के समझाने पर लोग यह कहते हुए शांत हो गए कि अगर अव्यवस्थाएं इसी तरह चलती रही तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर विरोध जताने को मजबूर हो जाएंगे।
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लोगों की व्यथा
आसोदा निवासी अनिल प्रधान, पटेल नगर निवासी राकेश, टांडा हेड़ी निवासी कमल कुमार, नेहरू पार्क निवासी मास्टर महेंद्र, मांडोठी निवासी नवीन ने कहा कि उन्होंने दस्तावेज बनवाने के लिए करीब एक माह पहले सभी प्रक्रिया पूरी करके आवेदन पत्र जमा करवाए थे, लेकिन अभी तक दस्तावेज नहीं मिल पाए हैं। कभी कोई अधिकारी अपनी कुर्सी से नदारद रहता है तो कभी कोई कर्मचारी। कई बार धक्के खिलाने के बाद भी कहीं कोई सुनवाई नहीं है। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों को रद्दी की ढेरी की तरह रखा जाता है, जहां लोगों को अपने दस्तावेज तलाशने में काफी परेशानी आती है। माजरा निवासी पूनम व सांखोल निवासी उषा ने कहा कि वे भी अपने दस्तावेजों को लेकर पिछले काफी समय से चक्कर काट रही हैं। जब वे प्रमाण पत्र के बारे में पूछती हैं तो कर्मचारी उन्हें बाहर रखी पेटी में ढूंढने की कह देते हैं। सोमवार को भी उनके दस्तावेज नहीं मिले। इस पर अधिकारियों को शिकायत करने गए तो न एसडीएम अपने कार्यालय में मिले और न ही तहसीलदार। यहां तक कि जहां पर दस्तावेज बनने का कार्य किया जाता है, वहां पर भी ताले ही लटके दिखे। ऐसे में उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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इस बारे में एसडीएम वीरेंद्र सहरावत का कहना है कि कंप्यूटर ऑपरेटरों की हड़ताल और स्टाफ की कमी के कारण दस्तावेज बनाने में दिक्कतें आ रही हैं। जल्द ही कुछ न कुछ समाधान कर दिया जाएगा, ताकि लोगों को परेशानी न हो।