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Jhajjar-Bahadurgarh News: अच्छेज में बंदरों का आतंक
Sun, 07 Jan 2024 11:23 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 07 Jan 2024 11:23 PM IST
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बेरी। गांव अच्छेज में बंदरों का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव में बंदरों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जाए ताकि इनको गांव से बाहर छोड़ दिया जाए।
ग्रामीण बिजेंद्र, विकास, विनोद, टिंकू, संतोष, सरला, मुन्नी का कहना है कि गांव में बंदरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि गलियों में घूमते ये बंदर न केवल बच्चों और गृहणियों के लिए जी का जंजाल बने हैं बल्कि ये बंदर घर में रखे सामान को भी नुकसान पहुंचाते हैं। छतों पर सूखने वाले कपड़ों को फाड़ते, रसोई का सामान ले जाते और फ्रिज से सामान उठाकर ले जाते बंदरों को आसानी से देखा जा सकता है। रोकने का प्रयास करने पर ये बच्चोंं और गृहणियों को गंभीर चोट पहुंचाते हैं। ग्रामीण विकास का कहना है कि गांव में बंदरों की टोली घूमती है। बच्चों व महिलाओं का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
गांव में बंदरों के आतंक का मामला संज्ञान में है, लेकिन इसका कोई स्थाई समाधान नहीं है। क्योंकि कुछ दिनों बाद फिर कोई बंदर छोड़ जाता है। कुछ माह पहले पहाड़ीपुर में बंदरों को पकड़वाया गया था, लेकिन फिर गांव में बंदरों का आतंक दोबारा से हो गया है।
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- राजेंद्र, सरपंच, गांव अच्छेज
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ग्रामीण बिजेंद्र, विकास, विनोद, टिंकू, संतोष, सरला, मुन्नी का कहना है कि गांव में बंदरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि गलियों में घूमते ये बंदर न केवल बच्चों और गृहणियों के लिए जी का जंजाल बने हैं बल्कि ये बंदर घर में रखे सामान को भी नुकसान पहुंचाते हैं। छतों पर सूखने वाले कपड़ों को फाड़ते, रसोई का सामान ले जाते और फ्रिज से सामान उठाकर ले जाते बंदरों को आसानी से देखा जा सकता है। रोकने का प्रयास करने पर ये बच्चोंं और गृहणियों को गंभीर चोट पहुंचाते हैं। ग्रामीण विकास का कहना है कि गांव में बंदरों की टोली घूमती है। बच्चों व महिलाओं का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
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गांव में बंदरों के आतंक का मामला संज्ञान में है, लेकिन इसका कोई स्थाई समाधान नहीं है। क्योंकि कुछ दिनों बाद फिर कोई बंदर छोड़ जाता है। कुछ माह पहले पहाड़ीपुर में बंदरों को पकड़वाया गया था, लेकिन फिर गांव में बंदरों का आतंक दोबारा से हो गया है।
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- राजेंद्र, सरपंच, गांव अच्छेज