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Jhajjar-Bahadurgarh News: खर्राटे लेने वाले सावधान...हार्ट और ब्रेन अटैक का खतरा
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-फोटो 51 : नागरिक अस्पताल में लगी मरीजों की लाइन। संवाद
बहादुरगढ़। लोग गहरी नींद में आमतौर पर खर्राटे लेते हैं लेकिन यह गंभीर समस्या भी हो सकती है। इसके बारे में कम ही लोगों को पता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब खर्राटे रोज आने लगे और आवाज बहुत तेज हो तो यह हार्ट और ब्रेन अटैक का जोखिम बढ़ा देता है। खर्राटों को कभी नजरअंदाज न करें।
ईएनटी डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि ठंड में हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व नाक और गले की नलियों में सूजन पैदा करते हैं। इससे ऑक्सीजन का स्तर घटना है और सांस लेने में दिक्कत होती है। इस कारण खर्राटे तेज होते हैं और शरीर पर तनाव बढ़ता है। नागरिक अस्पताल में खर्राटों की समस्या से पीड़ित प्रतिदिन 12 से 15 मरीज पहुंच रहे हैं।
उन्होंने बताया कि महिलाओं में सुबह उठते ही सिर में भारीपन या दर्द महसूस हो तो यह भी खर्राटों की बीमारी का संकेत हो सकता है। महिलाओं में हार्मोनल और जेनेटिक कारणों से यह लक्षण अक्सर माइग्रेन समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।
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बच्चों में मुख्य वजह नाक की एडिनॉयड ग्रंथि या पॉलिप का बढ़ना माना जाता है। रोजाना योग, हल्का व्यायाम और प्रोटीनयुक्त भोजन लेने से स्थिति में सुधार आता है।
कैसे होता है इलाज
डॉक्टर पहले नाक, गले और नींद से संबंधित जांच कर कारण की पहचान करते हैं। अगर नाक के पर्दे का तिरछापन, टॉन्सिल या एडिनॉयड की सूजन कारण हो तो ऑपरेशन की सलाह दी जाती है। मोटापे वाले मरीजों को पैप थेरेपी दी जाती है जो नींद के दौरान सांस की नली खुली रखती है। वजन कम करना, धूम्रपान से दूरी और पर्याप्त नींद से स्थिति में सुधार होता है।
केस 1
खर्राटों से परेशान नई बस्ती निवासी हरीश कुमार नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि सर्दी में खर्राटों की ज्यादा समस्या रहती है। इसी का इलाज कराने के लिए वह नागरिक अस्पताल में आए हैं। यह परेशानी हर बार सर्दी के सीजन में भी आती है। इसके कारण परिवार के अन्य सदस्य भी परेशान रहते हैं।
केस 2
खर्राटों की समस्या से पीड़ित लाइनपार के शंकर गार्डन निवासी नरेंद्र शर्मा भी अस्पताल में इलाज कराने आए। बताया कि डॉक्टर ने उन्हें कुछ दवाइयां दी हैं। सर्दी के मौसम में खर्राटे ज्यादा आते हैं। इसके कारण पास सो रहा व्यक्ति भी परेशान होता है। गर्मी के मौसम में खर्राटों की समस्या कम रहती है।
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ईएनटी डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि ठंड में हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व नाक और गले की नलियों में सूजन पैदा करते हैं। इससे ऑक्सीजन का स्तर घटना है और सांस लेने में दिक्कत होती है। इस कारण खर्राटे तेज होते हैं और शरीर पर तनाव बढ़ता है। नागरिक अस्पताल में खर्राटों की समस्या से पीड़ित प्रतिदिन 12 से 15 मरीज पहुंच रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि महिलाओं में सुबह उठते ही सिर में भारीपन या दर्द महसूस हो तो यह भी खर्राटों की बीमारी का संकेत हो सकता है। महिलाओं में हार्मोनल और जेनेटिक कारणों से यह लक्षण अक्सर माइग्रेन समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।
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बच्चों में मुख्य वजह नाक की एडिनॉयड ग्रंथि या पॉलिप का बढ़ना माना जाता है। रोजाना योग, हल्का व्यायाम और प्रोटीनयुक्त भोजन लेने से स्थिति में सुधार आता है।
कैसे होता है इलाज
डॉक्टर पहले नाक, गले और नींद से संबंधित जांच कर कारण की पहचान करते हैं। अगर नाक के पर्दे का तिरछापन, टॉन्सिल या एडिनॉयड की सूजन कारण हो तो ऑपरेशन की सलाह दी जाती है। मोटापे वाले मरीजों को पैप थेरेपी दी जाती है जो नींद के दौरान सांस की नली खुली रखती है। वजन कम करना, धूम्रपान से दूरी और पर्याप्त नींद से स्थिति में सुधार होता है।
केस 1
खर्राटों से परेशान नई बस्ती निवासी हरीश कुमार नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि सर्दी में खर्राटों की ज्यादा समस्या रहती है। इसी का इलाज कराने के लिए वह नागरिक अस्पताल में आए हैं। यह परेशानी हर बार सर्दी के सीजन में भी आती है। इसके कारण परिवार के अन्य सदस्य भी परेशान रहते हैं।
केस 2
खर्राटों की समस्या से पीड़ित लाइनपार के शंकर गार्डन निवासी नरेंद्र शर्मा भी अस्पताल में इलाज कराने आए। बताया कि डॉक्टर ने उन्हें कुछ दवाइयां दी हैं। सर्दी के मौसम में खर्राटे ज्यादा आते हैं। इसके कारण पास सो रहा व्यक्ति भी परेशान होता है। गर्मी के मौसम में खर्राटों की समस्या कम रहती है।