टीबी उन्मूलन अभियान में घोटाला: फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने के आरोप, बीसीजी वैक्सीन पर क्या बोले लोग?
बहादुरगढ़ की कई कालोनियों में टीबी ग्रस्त रोगियों के परिवारजनों और संभावित टीबी मरीजों को बीसीजी का टीका लगाया जाना था, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके क्षेत्र में कोई टीकाकरण अभियान चलाया ही नहीं गया।
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केंद्र सरकार द्वारा संचालित टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत बहादुरगढ़ में स्वास्थ्य विभाग पर बड़े घोटाले के आरोप लगे हैं। आरोप है कि कई कॉलोनियों में बीसीजी का टीका लगाए बिना ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर दिए, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है। इतना ही नहीं करोड़ो रुपये की बीसीजी वैक्सिन ब्लैक मार्किट में बेचने के भी आरोप लगे हैं।
लोग बोले नहीं हुआ टीकाकरण
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत देश के 22 राज्यों में यह कार्यक्रम लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य देश को टीबी मुक्त बनाना है। बहादुरगढ़ की कई कालोनियों में टीबी ग्रस्त रोगियों के परिवारजनों और संभावित टीबी मरीजों को बीसीजी का टीका लगाया जाना था, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके क्षेत्र में कोई टीकाकरण अभियान चलाया ही नहीं गया।
स्वास्थ्य मंत्री से की गई शिकायत
मामले की शिकायत अनूप अहलावत द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव से किए जाने के बाद जांच शुरू की गई। जांच कमेटी ने आदर्श नगर अर्बन पीएचसी पहुंचकर शिकायतकर्ता से पूरे मामले की जानकारी ली। इस दौरान कई महिलाएं भी अर्बन पीएचसी पहुंचीं, जिनके नाम स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में दर्ज पाए गए, लेकिन महिलाओं ने बताया कि उन्हें या उनके परिवार के किसी सदस्य को बीसीजी का टीका नहीं लगाया गया।
स्थानीय लोगों ने खोले राज
महिलाओं का कहना है कि उनकी कालोनी में स्वास्थ्य विभाग की ओर से न तो कोई सर्वे टीम आई और न ही टीकाकरण अभियान चलाया गया। इसके बावजूद कागजों में टीकाकरण पूरा दिखा दिया गया। शिकायतकर्ता अनूप अहलावत का आरोप है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की बीसीजी वैक्सीन को ब्लैक मार्केट में बेचा गया है। उन्होंने इस मामले की जांच उच्च स्तर पर करवाये जाने की मांग की है
अनूप अहलावत ने चेतावनी दी है कि यदि जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई या सही कार्रवाई नहीं हुई तो वह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करेंगे। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है और पूरे मामले पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है। मगर इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग का कोई भी अधिकारी जानकारी नहीं दे रहा।