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शोध करता है मानव ज्ञान को दिशा प्रदान : डॉ. उमेंद्र मलिक
Sat, 13 Jan 2024 03:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sat, 13 Jan 2024 03:20 AM IST
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बहादुरगढ़। वैश्य आर्य शिक्षण महिला महाविद्यालय में शुक्रवार को अनुसंधान पद्धति पर विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य प्रवक्ता के रूप में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में शिक्षा विभाग एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. उमेंद्र मलिक उपस्थित रहे। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ.आशा शर्मा ने पौधा व स्मृति चिन्ह देकर उनका अभिवादन किया।
मलिक ने अपने व्याख्यान में कहा कि यह सीखने का विज्ञान है जिस तरह से अनुसंधान को व्यवस्थित रूप से किया जाना चाहिए। यह अनुसंधान की धारा में लागू विधियों के कठोर विश्लेषण को संदर्भित करता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि निकाले गए निष्कर्ष मान्य, विश्वसनीय हैं। यदि समस्या की प्रकृति वर्णनात्मक है, तो उसे वर्णनात्मक अनुसंधान और यदि समस्या की प्रकृति प्रयोगात्मक है तो उसे प्रयोगात्मक अनुसंधान कहेंगे। उन्होंने बीएड व एमएड की छात्राओं को अनुसंधान कार्यों के लिए प्रेरित किया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ.आशा शर्मा ने कहा कि अनुसंधान एक विशेष प्रकृति की समस्या का वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करता है। यदि समस्या की प्रकृति ऐतिहासिक है तो उसे हम ऐतिहासिक अनुसंधान कहेंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन एनएसएस, वाईआरसी व विस्तार व्याख्यान इकाई द्वारा किया।
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मलिक ने अपने व्याख्यान में कहा कि यह सीखने का विज्ञान है जिस तरह से अनुसंधान को व्यवस्थित रूप से किया जाना चाहिए। यह अनुसंधान की धारा में लागू विधियों के कठोर विश्लेषण को संदर्भित करता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि निकाले गए निष्कर्ष मान्य, विश्वसनीय हैं। यदि समस्या की प्रकृति वर्णनात्मक है, तो उसे वर्णनात्मक अनुसंधान और यदि समस्या की प्रकृति प्रयोगात्मक है तो उसे प्रयोगात्मक अनुसंधान कहेंगे। उन्होंने बीएड व एमएड की छात्राओं को अनुसंधान कार्यों के लिए प्रेरित किया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ.आशा शर्मा ने कहा कि अनुसंधान एक विशेष प्रकृति की समस्या का वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करता है। यदि समस्या की प्रकृति ऐतिहासिक है तो उसे हम ऐतिहासिक अनुसंधान कहेंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन एनएसएस, वाईआरसी व विस्तार व्याख्यान इकाई द्वारा किया।
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