बहादुरगढ़: टोक्यो में राहुल नहीं दिखा पाया अपनी चाल, अगले ओलंपिक में जीत का लिया संकल्प
हादुरगढ़ से इससे पहले कोई भी खिलाड़ी ओलंपिक तक नहीं पहुंच पाया। राहुल के कोच रहे भीम अवार्डी चरण सिंह राठी ने कहा कि राहुल अपना स्वाभाविक खेल नहीं दिखा पाया। दरअसल, उसने शुरू से ही सुबह के समय पैदल चाल में भाग लिया और टोक्यो ओलंपिक में यह स्पर्धा शाम के वक्त होने से उस पर मानसिक तौर पर दबाव बढ़ा।
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विस्तार
हरियाणा के बहादुरगढ़ से पहले ओलंपिक खिलाड़ी बने सेना के जवान राहुल रोहिल्ला टोक्यो ओलंपिक में 20 किलोमीटर पैदल चाल स्पर्धा में जीत हासिल नहीं कर पाए। गुरुवार को उनकी चाल का दमखम देखने के लिए सुबह से ही परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, कोच व खेल प्रशंसक मोबाइल व टीवी स्क्रीन पर नजर गड़ाए रहे। लेकिन राहुल की हार से सभी के चेहरों पर उदासी आ गई।
अब वर्ल्ड चैंपियनशिप से उम्मीदें
इस खिलाड़ी से लोगों को पदक की उम्मीद बंधी थी। राहुल के कोच भीम अवार्डी चरण सिंह राठी ने कहा कि मौसम अनुकूल न होने का कारण उनकी चाल पर विपरीत असर पड़ा। अपने देश में वह सुबह के वक्त अभ्यास करता है, जबकि टोक्यो ओलंपिक में शाम के वक्त खेल होने से उसके मनोबल पर असर पड़ा।
परिवार के लोग उसकी हार के बाद मायूस जरूर हैं लेकिन उनका कहना है कि ओलंपिक में भाग लेना ही बड़े गर्व की बात है। आगे वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन गेम्स व कॉमनवेल्थ गेम्स होने हैं, उनमें उनका बेटा जरूर पदक जीतकर अपना व देश का नाम रोशन करेगा।
क्वालिफाइंग टाइम जैसी चाल दिखाने पर भी आता मेडल
बेहद गरीबी में जीवन जीने वाले राहुल रोहिल्ला ने अपनी प्रतिभा के बल पर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था। रांची में हुई 20 किलोमीटर पैदल चाल एक घंटा 20 मिनट 26 सेकंड में पूरी करके रजत पदक जीत राहुल ने टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था। लेकिन जितने समय में उसने इस चाल को पूरा किया उस समय को वह टोक्यो ओलंपिक में नहीं दोहरा पाया। यदि वह क्वालिफाइंग टाइम के अनुसार ही अपनी चाल दिखा पाता तो भारत के लिए पदक पक्का हो जाता।
छोटे से ब्लैक एंड व्हाइट टीवी पर ही देखा मैच
एथलीट राहुल रोहिल्ला की जीत के लिए सुबह से ही लोग किसी न किसी तरह से दुआएं कर रहे थे। इलेक्ट्रिशियन पिता रोहतास रोहिल्ला व बाकी परिजन भी अपना कामकाज छोड़ अपने छोटे से ब्लैक एंड व्हाइट टीवी के आगे बैठ राहुल का मैच देखते रहे। वे घर में आने वालों की आवभगत करने में भी पीछे नहीं रहे। मां रामरति व ताई प्रेमलता पूजा पाठ करती रहीं।
बहन उर्मिला व सुमन, दोस्त सौरभ और कोच भीम अवार्डी चरण सिंह राठी ने घर में बैठकर राहुल की 20 किलोमीटर पैदल चाल स्पर्धा देखी। शुरू में राहुल का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा लेकिन धीरे-धीरे वह पिछड़ता गया। विजेता प्रतिभागियों से काफी पीछे रहने के कारण परिवार के सदस्यों के चेहरे पर मायूसी साफ तौर पर देखी गई। बेटे की हार से मां काफी मायूस नजर आई और कुछ भी नहीं बोल पाई।
मौसम व समय प्रतिकूल होने का पड़ा विपरीत असर
छोटी बहनें मायूस दिखी लेकिन वे अपने भाई के ओलंपिक में खेलने से उत्साहित भी रहीं। बहादुरगढ़ से इससे पहले कोई भी खिलाड़ी ओलंपिक तक नहीं पहुंच पाया। राहुल के कोच रहे भीम अवार्डी चरण सिंह राठी ने कहा कि राहुल अपना स्वाभाविक खेल नहीं दिखा पाया। दरअसल, उसने शुरू से ही सुबह के समय पैदल चाल में भाग लिया और टोक्यो ओलंपिक में यह स्पर्धा शाम के वक्त होने से उस पर मानसिक तौर पर दबाव बढ़ा। जिस कारण वह पदक नहीं झटक पाया।