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Bahadurgarh: दालों और सब्जियों पर महंगाई की मार, बिगड़ रहा रसोई का बजट
Sat, 22 Jun 2024 12:33 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sat, 22 Jun 2024 12:33 AM IST
सार
आसमान से बरस रही आग से जहां आम आदमी झुलस रहा है। वहीं, महंगाई भी बढ़ रही है। सब्जी मंडी के आढ़ती विजय कुमार ने बताया कि गर्मी के मौसम में सब्जियों का उत्पादन कम हो रहा है। मंडी में आवक भी कम हो गई है। इसकी वजह से अचानक सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं।
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सब्जी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पिछले एक महीने में सभी खाद्यान्नों के भाव बढ़ गए हैं। दालें 30 से 40 रुपये तक महंगी हो गई हैं। वहीं एक सप्ताह में सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं। हरा धनिया फुटकर में 180 रुपये प्रति किलो तक बेचा जा रहा है। टमाटर 60 रुपये किलो तक हैं।
मसाले और ड्राइफ्रूट्स भी आम आदमी के बजट से बाहर हो रहे हैं। प्याज जहां 30 रुपये से बढ़कर 40 रुपये पहुंच गया है। वहीं, घीया 80 रुपये किलो पर पहुंच गई है। दालों और सब्जियों के महंगा होने का सीधा असर रसोई बजट पर पड़ा है।
ये बोली महिलाएं
गर्मी में बीमारी से बचाव के लिए हरी सब्जी अधिक खाई जाती है। दाल, ड्राइफू्रट, मसाले सभी महंगे है। सरकार को इनके दामों में कमी लानी चाहिए। बढ़ते दामों पर रोक लगानी चाहिए। -बबीता, शिक्षिका
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सब्जी हो या दाल सभी महंगे हैं। इतनी महंगाई में रसोई का बजट बिगड़ना तय है। एक सप्ताह पहले 150 रुपये में जो सब्जी झोला भरकर आती थी, वह 300 रुपये पर पहुंच गई है। महंगाई की मार दोगुनी हो गई है। इसे कम किया जाना चाहिए। -कौशल्या, गृहिणी
हम जैसे-तैसे रसोई का बजट बनाती हैं। आए दिन बिगड़ जाता है। सभी खाद्यान्न के रेट बढ़ने से बड़ी समस्या है। महिलाओं को रसोई का बजट बनाने में कई तरह की समस्याएं झेलनी पड़ रही है। -आरती, गृहिणी
सरकार को खाद्य सामग्री पर एक मुनाफा निर्धारित करना चाहिए। मुनाफाखोरी में जनता लुट रही है। कुल मिलाकर मसालों, दालों के भाव कम होने चाहिए। -अनुपमा शर्मा, मॉडल टाउन निवासी
खाद्यान्न 21 जून 20 मई
मसाले व सूखे मेवे
मसाले 21 जून 20 मई
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मसाले और ड्राइफ्रूट्स भी आम आदमी के बजट से बाहर हो रहे हैं। प्याज जहां 30 रुपये से बढ़कर 40 रुपये पहुंच गया है। वहीं, घीया 80 रुपये किलो पर पहुंच गई है। दालों और सब्जियों के महंगा होने का सीधा असर रसोई बजट पर पड़ा है।
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ये बोली महिलाएं
गर्मी में बीमारी से बचाव के लिए हरी सब्जी अधिक खाई जाती है। दाल, ड्राइफू्रट, मसाले सभी महंगे है। सरकार को इनके दामों में कमी लानी चाहिए। बढ़ते दामों पर रोक लगानी चाहिए। -बबीता, शिक्षिका
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सब्जी हो या दाल सभी महंगे हैं। इतनी महंगाई में रसोई का बजट बिगड़ना तय है। एक सप्ताह पहले 150 रुपये में जो सब्जी झोला भरकर आती थी, वह 300 रुपये पर पहुंच गई है। महंगाई की मार दोगुनी हो गई है। इसे कम किया जाना चाहिए। -कौशल्या, गृहिणी
हम जैसे-तैसे रसोई का बजट बनाती हैं। आए दिन बिगड़ जाता है। सभी खाद्यान्न के रेट बढ़ने से बड़ी समस्या है। महिलाओं को रसोई का बजट बनाने में कई तरह की समस्याएं झेलनी पड़ रही है। -आरती, गृहिणी
सरकार को खाद्य सामग्री पर एक मुनाफा निर्धारित करना चाहिए। मुनाफाखोरी में जनता लुट रही है। कुल मिलाकर मसालों, दालों के भाव कम होने चाहिए। -अनुपमा शर्मा, मॉडल टाउन निवासी
खाद्यान्न 21 जून 20 मई
- अरहर की दाल 180 140
- उड़द धुली 150 120
- उड़द साबुत 135 110
- चने की दाल 100 80
- बेसन 100 80
- राजमा 150 130
मसाले व सूखे मेवे
मसाले 21 जून 20 मई
- गरम मसाला 1200 900
- हल्दी 280 180
- लौंग 1400 900
- बड़ी इलायची 2500 1200
- छोटी इलायची 5000 3500
- काजू 850 650
- मखाना 1250 700