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Jhajjar-Bahadurgarh News: पं. श्री राम शर्मा ने आजादी मिलने के 25 साल पहले ही टाउन हाल पर फहरा दिया था तिरंगा
Wed, 14 Aug 2024 04:29 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Wed, 14 Aug 2024 04:29 AM IST
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झज्जर लघु सचिवालय परिसर में बनी हुई पंडित श्री राम शर्मा की बनी हुईप्रतिमा।
झज्जर। देश को आजादी भले ही 15 अगस्त 1947 को मिली हो, लेकिन झज्जर शहर के टाउन हाल पर पंडित श्रीराम शर्मा ने आजादी मिलने के 25 वर्ष पहले ही 15 जनवरी 1922 तिरंगा फहरा दिया था। टाउन हाल पर ब्रिटिश सरकार का झंडा लगा 0 था, जिसे पंडित श्री राम शर्मा ने उतारकर तिरंगा फहराया था। इस पर स्वतंत्रता सेनानी पंडित श्री राम शर्मा को अंग्रेजी हुकूमत ने कठोर सजा दी। वे भारत माता के जयकारे लगाते रहे और अंग्रेजों की यातनाएं सहते रहे।
झज्जर के इतिहास में 15 जनवरी 1922 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज है। इस दिन टाउन हाल पर पंडित श्रीराम शर्मा ने जन सैलाब के साथ लोकमान्य तिलक व महात्मा गांधी के चित्र के साथ तिरंगा झंडा लहराया तो अंग्रेज इसे बर्दाश्त नहीं सके। अंग्रेजों ने लाठीचार्ज कर झंडे को उतरवा दिया था। इसके बाद श्रीराम शर्मा को जीप के पीछे बांधकर घसीटा गया और उनको कोड़े भी मारे गए। इन यातनाओं के बाद भी उनका हौंसला नहीं टूटा। वे भारत माता की जय बोलते रहे। उसके बाद उन्हें अंबाला जेल में डाल दिया गया। देश के स्वतंत्रता आंदोलन में जहां असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों की विशेष भूमिका रही है। पंडित श्रीराम शर्मा के योगदान को सदैव याद रखा जाएगा। पंडित श्रीराम शर्मा ने देश की आन-बान-शान को हासिल करने के लिए तथा लोगों को इस बारे में जागरूक करने के लिए अपनी लेखनी का भी प्रयोग किया।
1919 में कॉलेज छोड़ आंदोलन में लिया भाग
पंडित श्रीराम शर्मा का जन्म एक अक्तूबर 1899 को झज्जर में हुआ था। उन्होंने 1919 में अपनी शिक्षा के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रभावित होकर कालेज छोड़कर उनके साथ आंदोलनों में भाग लिया। उन्होंने आजादी के लिए चलाए गए चारों आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उसमें उन्हें सात वर्ष की कड़ी कारावास तक की सजा भी भोगनी पड़ी थी। देश की आजादी के लिए उन्हें यातनाएं भी सहनी पड़ी। 7 अक्तूबर 1989 को पंडित श्रीराम शर्मा का निधन हो गया था।
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झज्जर के इतिहास में 15 जनवरी 1922 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज है। इस दिन टाउन हाल पर पंडित श्रीराम शर्मा ने जन सैलाब के साथ लोकमान्य तिलक व महात्मा गांधी के चित्र के साथ तिरंगा झंडा लहराया तो अंग्रेज इसे बर्दाश्त नहीं सके। अंग्रेजों ने लाठीचार्ज कर झंडे को उतरवा दिया था। इसके बाद श्रीराम शर्मा को जीप के पीछे बांधकर घसीटा गया और उनको कोड़े भी मारे गए। इन यातनाओं के बाद भी उनका हौंसला नहीं टूटा। वे भारत माता की जय बोलते रहे। उसके बाद उन्हें अंबाला जेल में डाल दिया गया। देश के स्वतंत्रता आंदोलन में जहां असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों की विशेष भूमिका रही है। पंडित श्रीराम शर्मा के योगदान को सदैव याद रखा जाएगा। पंडित श्रीराम शर्मा ने देश की आन-बान-शान को हासिल करने के लिए तथा लोगों को इस बारे में जागरूक करने के लिए अपनी लेखनी का भी प्रयोग किया।
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1919 में कॉलेज छोड़ आंदोलन में लिया भाग
पंडित श्रीराम शर्मा का जन्म एक अक्तूबर 1899 को झज्जर में हुआ था। उन्होंने 1919 में अपनी शिक्षा के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रभावित होकर कालेज छोड़कर उनके साथ आंदोलनों में भाग लिया। उन्होंने आजादी के लिए चलाए गए चारों आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उसमें उन्हें सात वर्ष की कड़ी कारावास तक की सजा भी भोगनी पड़ी थी। देश की आजादी के लिए उन्हें यातनाएं भी सहनी पड़ी। 7 अक्तूबर 1989 को पंडित श्रीराम शर्मा का निधन हो गया था।
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