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Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   Kharna is celebrated on the second day of Chhath, kheer is made as Prasad.

Jhajjar-Bahadurgarh News: छठ महापर्व... अस्ताचलगामी सूर्य को आज देंगे अर्घ्य

Mon, 27 Oct 2025 02:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Mon, 27 Oct 2025 02:11 AM IST
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Kharna is celebrated on the second day of Chhath, kheer is made as Prasad.
-फोटो 53 : छठ महापर्व को लेकर पूजा पाठ से संबंधित सामान खरीदते श्रद्धालु। संवाद
बहादुरगढ़। छठ महापर्व के दूसरे दिन रविवार को व्रतियों ने खरना मनाया। पहले दिन शनिवार को नहाय-खाय प्रक्रिया हुई। छठ पर्व 28 अक्तूबर तक चलेगा। इसको लेकर बहादुरगढ़ में रह रहे हजारों पूर्वांचलवासियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। नहर किनारे घाटों पर पूजा अर्चना करने के लिए सफाई की गई।
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इस दिन छठ पूजा का विशेष प्रसाद बनाने की परंपरा है। प्रसाद में खीर बनाई जाती है। खरना कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। खरना का मतलब होता है शुद्धिकरण और इसे लोहंडा भी कहा जाता है। मान्यता है कि छठ के नियमों का पालन करने से उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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खरना के दिन बाजारों में काफी भीड़भाड़ रही। रविवार को व्रतियों ने खरना किया और सोमवार को सूर्यास्त के समय अर्घ्य दिया जाएगा तो वहीं मंगलवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का विधिवत तरीके से समापन होगा।
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बिहार के सिवान जिले की रहने वाली कलावती, मधुबनी के रहने वाले चंचल, उत्तर प्रदेश के बलिया की रहने वाली सुमन, गोपालगंज बिहार की सुमन और संजय ने बताया कि भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए छठ पर्व मनाया जाता है। पूर्वांचल क्षेत्र के लोग इसे उत्साह के साथ मनाते हैं।
व्रती तालाब में उतरकर करते हैं पूजा
व्रतधारियों ने अपना चूल्हा अलग रखा और अरवा चावल, चने की दाल व लौकी की सब्जी का सेवन किया। हरिकरण ने कहा कि यह पर्व बहुत कठिन है। 4 दिन तक निर्जला व्रत भी रखना होता है। पर्व के अंतिम दिन यानी अब 28 अक्तूबर की सुबह उदीयमान सूरज को अर्घ्य देकर मन्नतें मांगी जाएंगी। इसके बाद यह पर्व संपन्न हो जाएगा।

छठ पर्व में होती है सूर्यास्त पूजन
पूर्वांचलवासी हरिकरण, मनोज, प्रदीप सिन्हा समेत अन्य ने बताया कि व्रती को सादगी और पवित्रता को अपनाना होता है। व्रत में नारियल, अनानास, अदरक, शरीफा, गागल, अभरक, आंवला, सुपारी, लोंग, इलाइची, चावल, मटर, ईख, टोकरी और छाज आदि वस्तुओं का इस्तेमाल होता है।

व्रत के समापन पर गुड़ और आटे का देशी घी से ठेकुआ बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया की अन्य सभ्यताओं में उगते सूर्य की पूजा होती है। मगर सूर्यास्त पूजा कोई नहीं करता। छठ पर्व में सूर्यास्त पूजा की जाती है।

-फोटो 53 : छठ महापर्व को लेकर पूजा पाठ से संबंधित सामान खरीदते श्रद्धालु। संवाद

-फोटो 53 : छठ महापर्व को लेकर पूजा पाठ से संबंधित सामान खरीदते श्रद्धालु। संवाद

-फोटो 53 : छठ महापर्व को लेकर पूजा पाठ से संबंधित सामान खरीदते श्रद्धालु। संवाद

-फोटो 53 : छठ महापर्व को लेकर पूजा पाठ से संबंधित सामान खरीदते श्रद्धालु। संवाद

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