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सरकारी संपत्ति को बेचकर कब तक काम चलाएगी सरकार : दीपेंद्र हुड्डा
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नोटबंदी के बाद सरकार के बाद अब सरकार सड़क, रेलवे, हवाई अड्डों, खेल स्टेडियमों, बिजली की लाइनों और गैस पाइपलाइनों सहित देश की संपत्ति को निजी कंपनियों को सौंपने का फैसला शर्मनाक है। इससे आर्थिक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। आखिर सरकारी संपत्ति बेचकर कब तक काम चलाएगी सरकार। यह बात कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा ने मंगलवार को सुबाना गांव में कही।
उन्होंने कहा कि हर कोई इस बात को जानता है कि जब परिवार का मुखिया घर की जमीन और जेवर बेचने लगे तो समझ लेना चाहिए कि परिवार भयंकर आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है। सरकार का ये निर्णय स्वत: दर्शाता है कि देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जिसे सरकार भले स्वीकार न करे, लेकिन सरकार के हर कदम से ऐसा लगता है कि स्थिति बहुत दयनीय है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे।
कांग्रेस सांसद ने सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकार की आर्थिक बदहाली का आलम यह है कि पिछले 7 साल से सरकार ने तेल और गैस कीमतें बढ़ाकर भारी मुनाफा कमाया, आम लोगों पर भारी भरकम कर का बोझ लादा, फिर भी उसे सरकारी संपत्ति बेचनी पड़ रही हैं। सरकार डीजल-पेट्रोल पर भारी कर लगाकर आम जनता को लूट रही है। बावजूद इसके अगर सरकार को देश की संपत्तियों को बेचना पड़ रहा है तो इससे स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था पूरी तरह से खोखली हो चुकी है। इस अवसर पर अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे।
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उन्होंने कहा कि हर कोई इस बात को जानता है कि जब परिवार का मुखिया घर की जमीन और जेवर बेचने लगे तो समझ लेना चाहिए कि परिवार भयंकर आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है। सरकार का ये निर्णय स्वत: दर्शाता है कि देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जिसे सरकार भले स्वीकार न करे, लेकिन सरकार के हर कदम से ऐसा लगता है कि स्थिति बहुत दयनीय है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे।
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कांग्रेस सांसद ने सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकार की आर्थिक बदहाली का आलम यह है कि पिछले 7 साल से सरकार ने तेल और गैस कीमतें बढ़ाकर भारी मुनाफा कमाया, आम लोगों पर भारी भरकम कर का बोझ लादा, फिर भी उसे सरकारी संपत्ति बेचनी पड़ रही हैं। सरकार डीजल-पेट्रोल पर भारी कर लगाकर आम जनता को लूट रही है। बावजूद इसके अगर सरकार को देश की संपत्तियों को बेचना पड़ रहा है तो इससे स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था पूरी तरह से खोखली हो चुकी है। इस अवसर पर अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे।
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