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जब तक बाढ़सा एम्स के सभी मंजूरशुदा संस्थान बनकर तैयार नहीं हो जाते मैं आवाज उठाता रहूंगा : दीपेंद्र हुड्डा

Fri, 22 Oct 2021 12:33 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 22 Oct 2021 12:33 AM IST
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I will keep raising my voice till all the approved institutes of Badsa AIIMS are ready : Deepender Hooda
एक बार फिर प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में न बुलाने पर राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने आपत्ति दर्ज कराई है और कहा ऐसी हरकतों से उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि एम्स-2 बाढ़सा परिसर स्थित कैंसर संस्थान के विश्राम सदन के उद्घाटन समारोह में अगर उन्हें बुलाया जाता तो वे प्रधानमंत्री से बाकी बचे दस मंजूरशुदा संस्थानों को बनवाने की अपील करते।
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यूपीए सरकार के दौरान मंजूरशुदा संस्थानों के निर्माण की मांग उठाना सांसद होने के नाते मेरा कर्तव्य और प्रधानमंत्री का दायित्व बनता है। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने से पहले वे खुद इंफोसिस में काम कर चुके हैं और उन्होंने भी इंफोसिस फाउंडेशन से इस विश्राम सदन के निर्माण का अनुरोध किया था। उन्हें खुशी है कि आज यह विश्राम सदन बनकर तैयार हो गया है लेकिन सांसद दीपेंद्र ने इस बात की पीड़ा व्यक्त की कि यूपीए सरकार के समय काफी मेहनत से मंजूर कराए गए बाकी बचे 10 संस्थानों के काम में एक इंच भी प्रगति नहीं हुई। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में मुझे न बुलाने से मेरी आवाज कमजोर नहीं पड़ेगी। वो यूपीए सरकार के समय मंजूर कराये सभी 11 संस्थानों के निर्माण होने तक चुप नहीं बैठेंगे और पूरी ताकत से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने पूछा कि सरकारी कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ को किस हैसियत से बुलाया गया और उन्हें सांसद होते हुए भी क्यों नहीं बुलाया गया जबकि ये सरकारी कार्यक्रम था न कि भाजपा का।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली वाले एम्स से भी बड़े एम्स-2 को 300 एकड़ में बनाने की परिकल्पना की गई। सबसे पहले फरवरी 2009 में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अंबुमणि रामदौस ने एम्स-2 को बाढ़सा में बनाने की सहमति दी। 2012 में तत्कालीन केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने एम्स-2 ओपीडी के उद्घाटन के साथ ही घोषणा की थी कि यहां एशिया ही नहीं, पूरे विश्व का सबसे बड़ा स्वास्थ्य परिसर बनेगा। जुलाई 2013 में योजना आयोग से राष्ट्रीय कैंसर संस्थान को मंजूरी मिली। 26 दिसंबर, 2013 को भारत सरकार की कैबिनेट ने 2035 करोड़ रुपये मंजूर करके परियोजना को मंजूरी दी। इसके बाद रिकार्ड एक हफ्ते के अंदर 3 जनवरी 2014 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इसका शिलान्यास करके इसके काम की शुरुआत की।
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