{"_id":"66f9c25534cf6d4d72084f94","slug":"how-to-maintain-friendship-learn-it-from-lord-shri-krishna-and-sudama-ajay-sati-bahadurgarh-news-c-195-1-nnl1001-114214-2024-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्री कृष्ण सुदामा से समझें : अजय सती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्री कृष्ण सुदामा से समझें : अजय सती
Mon, 30 Sep 2024 02:40 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 30 Sep 2024 02:40 AM IST
विज्ञापन
29jjrp07- बेरी। गोशाला में श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते आचार्य। स्
बेरी। कस्बे की श्री 108 जयराम गोशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर भागवत कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन कथा व्यास अजय सती ने विभिन्न प्रसंगों पर प्रवचन दिए। उन्होंने कृष्ण के अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया गया।
कथा व्यास आचार्य अजय सती ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्री कृष्ण सुदामा से समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर मित्र से सखा सुदामा मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे। द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया।
तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है, जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा-सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया-कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे सभी लोग अचंभित हो गए।
विज्ञापन
कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया हुआ। उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। गोशाला के उप प्रधान राजीव मित्तल ने कहा कि गोशाला में सात दिनों चली भागवत कथा होने के बाद रविवार को गोशाला में हवन-यज्ञ के साथ भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में आसपास के लोगों प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर कादयान खाप के प्रधान देवेंद्र उर्फ बिल्लू पहलवान, दिनेश शर्मा, मंदीप कादयान, सुरेंद्र शर्मा, प्रकाश बंसल, धर्मेंद्र मौजूद रहे।
विज्ञापन
कथा व्यास आचार्य अजय सती ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्री कृष्ण सुदामा से समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर मित्र से सखा सुदामा मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे। द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया।
विज्ञापन
तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है, जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा-सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया-कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे सभी लोग अचंभित हो गए।
विज्ञापन
कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया हुआ। उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। गोशाला के उप प्रधान राजीव मित्तल ने कहा कि गोशाला में सात दिनों चली भागवत कथा होने के बाद रविवार को गोशाला में हवन-यज्ञ के साथ भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में आसपास के लोगों प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर कादयान खाप के प्रधान देवेंद्र उर्फ बिल्लू पहलवान, दिनेश शर्मा, मंदीप कादयान, सुरेंद्र शर्मा, प्रकाश बंसल, धर्मेंद्र मौजूद रहे।

29jjrp07- बेरी। गोशाला में श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते आचार्य। स्