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राजनेताओं ने लोगों के दिलों में भरा जहर

Wed, 24 Feb 2016 12:58 AM IST
अमर उजाला झज्जर/ब्यूरो
अमर उजाला झज्जर/ब्यूरो Updated Wed, 24 Feb 2016 12:58 AM IST
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Full poison into the hearts of political leaders

जाट आंदोलन से शुरू हुई हिंसा में शहर क्यों जला? इस सवाल पर शहरवासी भले ही प्रशासन को कोस रहे हों, लेकिन पुलिस इसके पीछे फैली अफवाहों को जिम्मेदार बता रही है।

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आरक्षण को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी से समाज के दो वर्गों में पहले ही वैमनस्य पनप रहा था। फिर कुंठा पैदा हुई, बाद में अफवाहों ने आग में घी डाला और उपद्रवियों ने शहर को जला दिया।
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पड़ोसी एक दूसरे के दुश्मन बन गए। ऊपर से कुछ ने हिंसा के बहाने रंजिश निकाल ली। हिंसा को लेकर अब लोग खुलकर बोल रहे हैं।

जातीय संघर्ष को ऐसे मिला बल

बात जातीय हिंसा के भड़कने की करें तो शुरुआत सिलानी गेट पर लगी शहीद राव तुलाराम की प्रतिमा और उसके बाद जाट धर्मशाला की घटनाओं से हुई।

इन घटनाओं के बाद गांवों में मुनादी कराकर अफवाहों को भड़काया गया और लोगों को इकट्ठा किया गया। इसके बाद तो गांवों से 20 से 25 हजार लोगों की भीड़ शहर पहुंच गई। इसके बाद छावनी मोहल्ले में जमकर उपद्रव किया गया।
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पड़ोसी भी बने दुश्मन
छावनी मोहल्ले के निवासियों की मानें तो पड़ोसी ही उनके दुश्मन बन गए थे। लोगों ने उपद्रवियों से बचने के लिए घरों के दरवाजे बंद कर लिए तो पड़ोस के लोगों ने उपद्रवियों को अपने घरों से रास्ते देकर उन तक पहुंचा दिया।

ये घटनाएं बताती हैं कि जातीय जहर लोगों के दिलों में किस कदर भरा गया था। जो भी व्यक्ति एक दूसरे को खटक रहे थे, उन से हिंसा की आड़ में दुश्मनी का हिसाब कर लिया गया।

छावनी में लोगों पर चुन चुन कर हमला किया गया। यहीं हाल शहर में दुकानों में आगजनी व तोड़फोड़ का रहा। शनिवार को एक वर्ग विशेष तो रविवार को दूसरे वर्ग से जुड़े लोगों के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।

व्यापारी बोले, पुलिस प्रशासन ने सहयोग दिया होता तो न जलता शहर
व्यापारियों ने डीसी को दो टूक कहा कि पुलिस प्रशासन ने साथ दिया होता तो 100 साल का भाईचारा खत्म नहीं होता। हिंसा के पीछे प्रशासन का पूरा हाथ रहा है।

पुलिस लोगों को अपने हाल पर छोड़ कर भाग गई। आगजनी में खाक हुए चावला इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम के मालिक नरेंद्र चावला ने कहा कि हम पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहते, लेकिन सच है कि प्रशासन जिम्मेदार है।


आईजी ने कहा, अफवाहों ने भटकाया
जाट आंदोलन से निपटने के लिए झज्जर में नियुक्त आईजी केके राव ने माना कि अफवाहों से आग लगी। कहा कि उपद्रवियों की भीड़ कम थी, लेकिन अफवाह ज्यादा की रही। अफवाहों से हम निपट नहीं पाए। इससे हालात बिगड़े और शहर जला।

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