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23 को किसान बांधेंगे पगड़ी, धरनास्थलों पर अजीत सिंह की फोटो लगाई जाएंगी

Sun, 21 Feb 2021 12:56 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 21 Feb 2021 12:56 AM IST
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Farmers will tie turbans on 23rd, pictures of Ajit Singh will be put on picketing sites
टीकरी बॉर्डर पर सभा में अपने नेताओं के विचार सुनते किसान। - फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। टीकरी बार्डर पर शनिवार को पकौड़ा चौक के निकट किसानों की सभा को पंजाब व हरियाणा के कई किसानों नेताओं ने संबोधित किया। तीन कृषि कानूनों को वापस लेने व एमएसपी की गारंटी देने के लिए नया कानून बनाने की मांग की गई। वक्ताओं के पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें लगातार बढ़ने पर चिंता जताई। किसानों ने मंगलवार 23 फरवरी को पगड़ी संभाल दिवस मनाने का आह्वान किया गया। किसानों ने डीजल, पेट्रोल व रसोई गैस की कीमतों लगातार बढ़ाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतें दिनोंदिन बढ़ने से खेती पर लागत बढ़ती जा रही है और सरकार हमें एमएसपी तक देने को तैयार नहीं है।
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सभा को संबोधित करते हुए किसान नेता बलबीर सिंह ने किसानों को कहा कि सभी धरनास्थलों पर 23 फरवरी को शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह की फोटो लगाएं और किसी भी रंग की पगड़ी अवश्य पहनें। इससे हमें ताकत मिलेगी।
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उन्होंने कहा कि सरकार को ये भूल जाना चाहिए कि लंबे समय तक वार्ता नहीं करने से किसान निराश और हताश हो जाएंगे, ये सरकार का मुगालता होगा। अंग्रेजी हुकूमत के वक्त शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह ने नौ माह तक पगड़ी संभाल आंदोलन चलाया था और तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन चलाते हुए हमें तो अभी तक तीन महीने ही हुए हैं। ये लड़ाई लंबी चलने वाली है। हम इके लिए तैयार हैं, लेकिन कानूनों को रद्द करवाए बिना घर नही जाएंगे। उन्होंने बताया कि दिल्ली के मोर्चे पर डटे पंजाब के किसानों के खेत की जिम्मेदारी पंजाब में भाईचारा और पंचायतें खुद उठा रही हैं। गांव गांव जाकर पंचायतें कर आंदोलन पर डटे किसानों की खेती संभालने की जिम्मेदारी दी जा रही है।
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किसान नेता विकास ने कहा कि किसानों के साथ-साथ देशभर के आम नागरिकों को पेट्रोल, डीजल व गैस की बढ़ती कीमतों से भारी नुकसान होगा। जोगेंद्र सिंह ने हरियाणा के कृषि मंत्री के आंदोलनकारी किसानों की मौतों पर दिए गए बयान को किसानों के आत्मसम्मान को चोट पहुंचाने वाला बताया।
आंदोलनकारियों के टीकरी बॉर्डर पड़ाव में पकौड़ा चौक के निकट भी किसानों की सभा हुई। यहां भारतीय किसान यूनियन डकोंदा के नेताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। गुरदीप सिंह ने कहा कि मोदी सरकार की नीयत मेहनतकशों के हक में कभी नहीं रही। इस सरकार ने मजदूरों के खिलाफ फैक्टरी मालिकों के हक में कानून बनाए। अब किसानों की कमर तोडने के लिए पूंजीपतियों के खजाने भरने के लिए तीन नए खेती कानून बना दिए हैं।

उधर, ढांसा बार्डर पर किसान नेता दीपक धनखड़ ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर दूसरे दिन भी अनशन रखा। इस बीच इंग्लैंड में रह रहे हरियाणा के संयम सिवाच ने ढांसा बॉर्डर धरने के संयोजकों को सूचना दी है कि वह भी किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए इंग्लैंड से चल पड़ेे हैं और रविवार तक पहुंच जाएंगे। सिवाच ने संयोजकों को बताया कि वह किसान नेता दीपक धनखड़ का अनशन खत्म कराएंगे। ढांसा बॉर्डर पर धरनारत किसानों के लिए इंग्लैंड से गाजर पाक और पानी साथ ला रहे हैं। सिवाच का कहना है कि यह लड़ाई हमें हिम्मत से लड़नी है और भारत पहुंचते ही किसान नेता दीपक धनखड़ का अनशन खुलवाएंगे।
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