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Jhajjar-Bahadurgarh News: अब आवासीय प्लॉट पर खुलेंगे नर्सिंग होम
Tue, 15 Sep 2026 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Tue, 15 Sep 2026 12:47 AM IST
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बहादुरगढ़। शहर में तेजी से विकसित हो रही लाइसेंसशुदा (वैध) आवासीय कॉलोनियों में आवासीय भूखंडों पर नर्सिंग होम खोलने की अनुमति देने के लिए नई नीति जारी की गई है। बहादुरगढ़ में अब तक 10 से अधिक लाइसेंसशुदा कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं, जबकि 20 से अधिक कॉलोनियों में विकास कार्य चल रहा है। ऐसे में नई नीति का सीधा लाभ शहर की इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को मिल सकेगा।
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग की ओर से 8 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार योग्य चिकित्सक निर्धारित शुल्क जमा करवाकर आवासीय भूखंड पर नर्सिंग होम स्थापित कर सकेंगे। सरकार ने यह निर्णय भारतीय चिकित्सा संघ की मांग और लोगों को उनके आसपास बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया है। नई नीति ने 10 फरवरी 2026 को जारी पिछली नीति का स्थान लिया है।
नर्सिंग होम के लिए भूखंड चिकित्सक के स्वामित्व में होना चाहिए या कम से कम 10 वर्ष की लीज पर लिया गया होना जरूरी है। चिकित्सक का संबंधित चिकित्सा परिषद में वैध पंजीकरण होना चाहिए और वह वर्तमान में चिकित्सा कार्य कर रहा हो। स्थानीय भारतीय चिकित्सा संघ की शाखा में पंजीकरण और इस संबंध में शपथपत्र भी देना होगा।
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हाइपर और हाई क्षेत्र में न्यूनतम 350 वर्ग गज तथा मध्यम और निम्न क्षेत्र में 250 वर्ग गज के भूखंड पर नर्सिंग होम की अनुमति होगी। हाइपर और हाई क्षेत्र में नर्सिंग होम सेक्टर या मुख्य मार्ग से लगे सर्विस रोड पर ही बनाए जा सकेंगे। एक सेक्टर में अधिकतम चार नर्सिंग होम की अनुमति होगी।
सरकार ने क्षेत्र के अनुसार रूपांतरण शुल्क भी तय किया है। हाइपर क्षेत्र में 10 हजार, हाई में 8 हजार, मध्यम में 6 हजार और निम्न क्षेत्र में चार हजार रुपये प्रति वर्ग गज शुल्क देना होगा। इसके अलावा वाह्य विकास शुल्क समेत कोई अन्य शुल्क नहीं लिया जाएगा।
पार्किंग और पर्यावरण नियमों का पालन अनिवार्य
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल ने बताया कि नर्सिंग होम के लिए भवन निर्माण, ऊंचाई, फर्श क्षेत्र अनुपात और सेट बैक के नियम लागू होंगे। स्टिल्ट पार्किंग अनिवार्य होगी और एंबुलेंस समेत सभी वाहनों की पार्किंग भूखंड की सीमा के भीतर करनी होगी। भवन का नक्शा स्वीकृत कराने के साथ पूर्णता प्रमाणपत्र लेना होगा। जैव चिकित्सीय कचरे के निस्तारण की व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में आवश्यक पंजीकरण भी अनिवार्य रहेगा। मरीजों के लिए परिसर में दवा की दुकान संचालित की जा सकेगी, जबकि अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी।
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नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग की ओर से 8 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार योग्य चिकित्सक निर्धारित शुल्क जमा करवाकर आवासीय भूखंड पर नर्सिंग होम स्थापित कर सकेंगे। सरकार ने यह निर्णय भारतीय चिकित्सा संघ की मांग और लोगों को उनके आसपास बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया है। नई नीति ने 10 फरवरी 2026 को जारी पिछली नीति का स्थान लिया है।
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नर्सिंग होम के लिए भूखंड चिकित्सक के स्वामित्व में होना चाहिए या कम से कम 10 वर्ष की लीज पर लिया गया होना जरूरी है। चिकित्सक का संबंधित चिकित्सा परिषद में वैध पंजीकरण होना चाहिए और वह वर्तमान में चिकित्सा कार्य कर रहा हो। स्थानीय भारतीय चिकित्सा संघ की शाखा में पंजीकरण और इस संबंध में शपथपत्र भी देना होगा।
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हाइपर और हाई क्षेत्र में न्यूनतम 350 वर्ग गज तथा मध्यम और निम्न क्षेत्र में 250 वर्ग गज के भूखंड पर नर्सिंग होम की अनुमति होगी। हाइपर और हाई क्षेत्र में नर्सिंग होम सेक्टर या मुख्य मार्ग से लगे सर्विस रोड पर ही बनाए जा सकेंगे। एक सेक्टर में अधिकतम चार नर्सिंग होम की अनुमति होगी।
सरकार ने क्षेत्र के अनुसार रूपांतरण शुल्क भी तय किया है। हाइपर क्षेत्र में 10 हजार, हाई में 8 हजार, मध्यम में 6 हजार और निम्न क्षेत्र में चार हजार रुपये प्रति वर्ग गज शुल्क देना होगा। इसके अलावा वाह्य विकास शुल्क समेत कोई अन्य शुल्क नहीं लिया जाएगा।
पार्किंग और पर्यावरण नियमों का पालन अनिवार्य
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल ने बताया कि नर्सिंग होम के लिए भवन निर्माण, ऊंचाई, फर्श क्षेत्र अनुपात और सेट बैक के नियम लागू होंगे। स्टिल्ट पार्किंग अनिवार्य होगी और एंबुलेंस समेत सभी वाहनों की पार्किंग भूखंड की सीमा के भीतर करनी होगी। भवन का नक्शा स्वीकृत कराने के साथ पूर्णता प्रमाणपत्र लेना होगा। जैव चिकित्सीय कचरे के निस्तारण की व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में आवश्यक पंजीकरण भी अनिवार्य रहेगा। मरीजों के लिए परिसर में दवा की दुकान संचालित की जा सकेगी, जबकि अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी।