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5 जून को कारपोरेट भगाओ-खेती बचाओ दिवस मनाएंगे किसान

Mon, 31 May 2021 12:49 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 31 May 2021 12:49 AM IST
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Farmers will celebrate Corporate Shove-Save Farming Day on June 5
बहादुरगढ़। कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे आंदोलनकारी किसान 5 जून को कारपोरेट भगाओ-खेती बचाओ दिवस मनाएंगे। किसान नेताओं ने रविवार को बैठक कर किसानों से पूंजीवाद का विरोध करने का आह्वान किया।
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बॉर्डर के पास किसानों की बैठक को संबोधित करते हुए किसान नेता कुलविंदर सिंह ने कहा कि देश में मेहनतकशों की बर्बादी का सबसे प्रमुख कारण पूंजीवादी व्यवस्था है। जब पूंजीवाद कायम रहेगा तब तक जनता का भला नहीं हो सकता। खेती को बचाने के लिए पूंजीवाद को भगाना जरूरी है। इसलिए आगामी 5 जून को कॉरपोरेट भगाओ-खेती बचाओ दिवस मनाने का फैसला लिया गया है। नयागांव चौक के पास हुआ भाकियू एकता की किसान सभा में भी इस पर चर्चा हुई और किसानों से पूंजीवाद का विरोध करने का आह्वान किया गया।
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ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन की ऑनलाइन बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह मातनहेल ने की और संचालन प्रदेश सचिव जयकरण मांडोठी ने किया। इसमें संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यवान ने भी भाग लिया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आने वाली 5 जून को कॉरपोरेट भगाओ-खेती बचाओ दिवस के रूप में मनाया जाए। उस दिन पूरे प्रदेश में किसान विरोधी तीन कृषि कानूनों और बिजली बिल 2020 की प्रतियों की प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा गांवों में होली जलाई जाए।
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अनूप सिंह ने कहा कि आज से एक वर्ष पहले 5 जून 2020 को खेती और देश के किसानों व जनता के हितों के खिलाफ भाजपा की मोदी सरकार ने अचानक तीन अध्यादेश जारी किए थे। इन्हीं अध्यादेशों को बाद में कानूनों की शक्ल दी गई थी। इनके खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हम सब मिलकर लड़ रहे हैं। जयकरण ने कहा कि अध्यादेश जारी करने के दिन से ही 21 राज्यों में लगातार संघर्ष चल रहा है।

सत्यवान ने बताया कि कॉरपोरेट भगाओ-खेती बचाओ दिवस पर 5 जून को गांव-गांव में किसान इकट्ठे होकर तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाएंगे, ताकि इन कानूनों और बिजली संशोधन विधेयक 2020 को रद्द कराने के लिए सरकार पर दवाब बढ़ाया जा सके। विजय कुमार व बाबूराम ने बताया कि किसानों पर पराली जलाने के नाम पर प्रदूषण फैलाने के आरोप में एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने का फैसला भी ले रखा है जिसका संगठन कड़ा विरोध करता है। बैठक में राजकुमार सारसा, रामकुमार, बलवीर सिंह, रोहतास, करतार सिंह, ईश्वर सिंह, रामकरण, सुखबीर सिंह, भीम सिंह और करतार सिंह अछेज ने भी भाग लिया।
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