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मुआवजा लिया ही नहीं तो क्यों दें जमीन
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---फोटो 6 : अधिकारियों का विरोध जताते ग्रामीण।
- फोटो : Bahadurgarh
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गांव सांखोल में जमीन के कब्जे को लेकर वीरवार को हंगामा हो गया। यहां जमीन का कब्जा लेने पहुंची एचएसआईआईडीसी (हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन) एवं प्रशासनिक टीम का किसानों ने जमकर विरोध किया। किसानों ने कहा कि उन्होंने जब मुआवजा ही नहीं लिया तो जमीन कैसे दे दें। उनकी जमीन को जबरन छीना जा रहा है। चाहे कुछ भी हो जाए वे अपनी जमीन नहीं देंगे। ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए कब्जा लेने पहुंची टीम को पीछे हटना पड़े। जमीन के मालिकाना हक आदि दस्तावेज जमा कराने के लिए किसानों को दस दिन का समय दिया गया है।
ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की योजना
अभी कुछ समय पहले मुख्यमंत्री घोषणा में बहादुरगढ़ शहर में ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने को मंजूरी मिली है। एचएसआईआईडीसी ने सांखोल में पड़ी उक्त जमीन को ट्रांसपोर्ट नगर के लिए चुन लिया। दो जुलाई को एचएसआईआईडीसी की ओर से किसानों को नोटिस जारी किए गए कि चार जुलाई को वे कब्जा लेने आएंगे। इसी की तहत वीरवार की दोपहर ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार जगबीर सिंह की अगुवाई में पुलिस बल के साथ एचएसआईआईडीसी के अधिकारी मौके पर पहुुंचे। जैसे ही ये भनक ग्रामीणों को लगी तो वे मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने टीम का जमकर विरोध किया। ग्रामीणों ने कहा कि हमने मुआवजा नहीं लिया है और अपनी जमीन नहीं देंगे। मौके पर मौजूद एक्सईएन राजीव कुमार, डीटीपी बबीता शर्मा, मैनेजर हामिद व एसएचओ मनोज कुमार आदि ने ग्रामीणों को शांत कराने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीण नहीं माने और अपनी बात पर अड़े रहे।
यह है मामला
दरअसल, वर्ष-1974 में नॉर्दन ग्लास कंपनी के लिए सांखोल की 40 एकड़ जमीन अधिग्रहण की गई थी। 28 एकड़ पंचायती और 16 एकड़ किसानों की जमीन थी। जमीन देते हुए ये करार भी हुआ था कि उक्त कंपनी गांव के युवाओं को रोजगार देगी। इसके बाद किसानों ने मुआवजा बढ़ाने के लिए प्रयास शुरू किए लेकिन मुआवजा नहीं बढ़ा। फिर 1991 में किसान हाईकोर्ट में चले गए। कोर्ट ने किसानों के पक्ष में फैसला दिया। 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने नॉर्दन ग्लास को जमीन का मालिकाना हक दे दिया। तब 28 एकड़ पंचायती जमीन पर फैक्टर न लगाकर प्लॉटिंग कर दी गई। शेष बची 16 एकड़ जमीन पर दोनों तरफ से संघर्ष जारी रहा। हाल में इस जमीन पर एचएसआईआईडीसी अपना हक जताता है।
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15 दिन का समय मांगा, अधिकारियों ने दिए 10 दिन
ग्रामीणों ने अधिकारियों से कहा कि दो दिन पहले ही उन्हें स्टे मिला है। इसके विरोध में उन्होंने कोर्ट में अपील दायर कर दी है। अपना पक्ष रखने के लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया जाए। इस पर मौके पर मौजूद अधिकारियों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की और ग्रामीणों को 10 दिन का समय दे दिया। साथ ही ग्रामीणों से ये भी कहा कि आपके पास जमीन संबंधी जो भी दस्तावेज हैं, दस दिन के भीतर एचएसआईआईडीसी ऑफिस में जमा करा दें। इसके बाद प्रशासनिक टीम वापस लौट गई।
जनवरी में एचएसआईआईडीसी को दे दी जमीन
ग्रामीण उमेश राठी ने बताया कि फैक्टरी लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण की गई थी। जब फैक्टरी ही नहीं लगी तो उन्होंने कोर्ट में जाकर अपनी जमीन वापस ले ली थी। वर्ष 2002 से लेकर 2017 तक उक्त जमीन पर हमारा मालिकाना हक रहा। फिर 4 जुलाई 2018 को सरकार ने यह जमीन उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को दे दी। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने 25 जनवरी 2019 को यह जमीन एचएसआईआरईडीसी को ट्रांसफर कर दी। हैरानी की बात तो ये कि जिस 28 एकड़ पंचायती जमीन पर अवैध रूप से प्लॉटिंग की गई वहां तो प्रशासनिक टीम नहीं गई और हम किसानों की जमीन छीनने के लिए आ गई। हमें शुरू में जो मुआवजा मिला वो 1992 में लौटा दिया था। अब हम अपनी जमीन नहीं देना चाहते तो क्यों हमारे साथ जबरदस्ती की जा रही है।
कब्जा लेने के लिए गए थे लेकिन ग्रामीणों ने विरोध जताना शुरू कर दिया। उक्त जमीन पर ग्रामीण अपना हक जता रहे हैं। उन्हें दस दिन का समय दिया गया है। यदि जमीन संबंधी कुछ पुख्ता दस्तावेज हुए तो ठीक, वरना उक्त जमीन पर कब्जा ले लिया जाएगा।
राजीव कुमार, जीएम, एचएसआईआईडीसी।
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ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की योजना
अभी कुछ समय पहले मुख्यमंत्री घोषणा में बहादुरगढ़ शहर में ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने को मंजूरी मिली है। एचएसआईआईडीसी ने सांखोल में पड़ी उक्त जमीन को ट्रांसपोर्ट नगर के लिए चुन लिया। दो जुलाई को एचएसआईआईडीसी की ओर से किसानों को नोटिस जारी किए गए कि चार जुलाई को वे कब्जा लेने आएंगे। इसी की तहत वीरवार की दोपहर ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार जगबीर सिंह की अगुवाई में पुलिस बल के साथ एचएसआईआईडीसी के अधिकारी मौके पर पहुुंचे। जैसे ही ये भनक ग्रामीणों को लगी तो वे मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने टीम का जमकर विरोध किया। ग्रामीणों ने कहा कि हमने मुआवजा नहीं लिया है और अपनी जमीन नहीं देंगे। मौके पर मौजूद एक्सईएन राजीव कुमार, डीटीपी बबीता शर्मा, मैनेजर हामिद व एसएचओ मनोज कुमार आदि ने ग्रामीणों को शांत कराने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीण नहीं माने और अपनी बात पर अड़े रहे।
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यह है मामला
दरअसल, वर्ष-1974 में नॉर्दन ग्लास कंपनी के लिए सांखोल की 40 एकड़ जमीन अधिग्रहण की गई थी। 28 एकड़ पंचायती और 16 एकड़ किसानों की जमीन थी। जमीन देते हुए ये करार भी हुआ था कि उक्त कंपनी गांव के युवाओं को रोजगार देगी। इसके बाद किसानों ने मुआवजा बढ़ाने के लिए प्रयास शुरू किए लेकिन मुआवजा नहीं बढ़ा। फिर 1991 में किसान हाईकोर्ट में चले गए। कोर्ट ने किसानों के पक्ष में फैसला दिया। 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने नॉर्दन ग्लास को जमीन का मालिकाना हक दे दिया। तब 28 एकड़ पंचायती जमीन पर फैक्टर न लगाकर प्लॉटिंग कर दी गई। शेष बची 16 एकड़ जमीन पर दोनों तरफ से संघर्ष जारी रहा। हाल में इस जमीन पर एचएसआईआईडीसी अपना हक जताता है।
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15 दिन का समय मांगा, अधिकारियों ने दिए 10 दिन
ग्रामीणों ने अधिकारियों से कहा कि दो दिन पहले ही उन्हें स्टे मिला है। इसके विरोध में उन्होंने कोर्ट में अपील दायर कर दी है। अपना पक्ष रखने के लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया जाए। इस पर मौके पर मौजूद अधिकारियों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की और ग्रामीणों को 10 दिन का समय दे दिया। साथ ही ग्रामीणों से ये भी कहा कि आपके पास जमीन संबंधी जो भी दस्तावेज हैं, दस दिन के भीतर एचएसआईआईडीसी ऑफिस में जमा करा दें। इसके बाद प्रशासनिक टीम वापस लौट गई।
जनवरी में एचएसआईआईडीसी को दे दी जमीन
ग्रामीण उमेश राठी ने बताया कि फैक्टरी लगाने के लिए जमीन अधिग्रहण की गई थी। जब फैक्टरी ही नहीं लगी तो उन्होंने कोर्ट में जाकर अपनी जमीन वापस ले ली थी। वर्ष 2002 से लेकर 2017 तक उक्त जमीन पर हमारा मालिकाना हक रहा। फिर 4 जुलाई 2018 को सरकार ने यह जमीन उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को दे दी। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने 25 जनवरी 2019 को यह जमीन एचएसआईआरईडीसी को ट्रांसफर कर दी। हैरानी की बात तो ये कि जिस 28 एकड़ पंचायती जमीन पर अवैध रूप से प्लॉटिंग की गई वहां तो प्रशासनिक टीम नहीं गई और हम किसानों की जमीन छीनने के लिए आ गई। हमें शुरू में जो मुआवजा मिला वो 1992 में लौटा दिया था। अब हम अपनी जमीन नहीं देना चाहते तो क्यों हमारे साथ जबरदस्ती की जा रही है।
कब्जा लेने के लिए गए थे लेकिन ग्रामीणों ने विरोध जताना शुरू कर दिया। उक्त जमीन पर ग्रामीण अपना हक जता रहे हैं। उन्हें दस दिन का समय दिया गया है। यदि जमीन संबंधी कुछ पुख्ता दस्तावेज हुए तो ठीक, वरना उक्त जमीन पर कब्जा ले लिया जाएगा।
राजीव कुमार, जीएम, एचएसआईआईडीसी।