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हल्की ठंड बढ़ने से मरीजों की संख्या हुआ इजाफा, बुखार की चपेट में बच्चे व बुजुर्ग
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पारा गिरते ही सामान्य अस्पताल में बुखार की चपेट में आने वाली मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सर्दी की दस्तक के बीच वायरल बुखार ने बच्चों व बुजुर्गों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। सोमवार को बुखार, खांसी, जुकाम के मरीजों की संख्या नागरिक अस्पताल में ओपीडी पहुंचे।
सुबह शाम की ठंड होने पर ऊनी कपड़े पहने और आवश्यकता होने पर ही घर से बाहर निकले। उन्होंने बताया कि पटाखे के कारण वातावरण में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ने से बुजुर्गों व अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में काफी परेशानी हो रही है। ऐसे लक्षण आने पर चिकित्सकों से सलाह लेनी बेहद जरूरी है। इसके अलावा गर्म पानी का सेवन भी अस्थमा के मरीजों को राहत देने का काम करता है। वायरल बुखार के मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। जिसके चलते सामान्य अस्पताल के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में झोला छाप डॉक्टर व शहरों में निजी अस्पताल व नर्सिंग होम चांदी काट रहे हैं।
चिकित्सक के छुट्टी पर जाने से सामान्य अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन के कमरे पर ताला लटका हुआ है। जिसके चलते मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड न होने पर निजी केंद्रों पर जाकर अपनी जांच करवानी पड़ती है जोकि मरीजों पर अतिरिक्त खर्च बढ़ने से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आमतौर पर देखा जाता है कि ईट भट्ठों पर मजदूरी करने वाले श्रमिकों की महिलाओं के पास निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए पैसे भी नहीं पाए जाते हैं।
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मरीजों की संख्या में मौसम को देखते हुए बढ़ोतरी हुई। अस्थमा के मरीजों के लिए अस्पताल में दवा व भाप देने की मशीन व अन्य दवाएं उपलब्ध हैं। सुबह शाम की ठंड से बचने के लिए कोशिश लोगों को करनी चाहिए।
- डॉ. कनिका, एसएमओ, सामान्य अस्पताल, झज्जर।
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सुबह शाम की ठंड होने पर ऊनी कपड़े पहने और आवश्यकता होने पर ही घर से बाहर निकले। उन्होंने बताया कि पटाखे के कारण वातावरण में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ने से बुजुर्गों व अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में काफी परेशानी हो रही है। ऐसे लक्षण आने पर चिकित्सकों से सलाह लेनी बेहद जरूरी है। इसके अलावा गर्म पानी का सेवन भी अस्थमा के मरीजों को राहत देने का काम करता है। वायरल बुखार के मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। जिसके चलते सामान्य अस्पताल के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में झोला छाप डॉक्टर व शहरों में निजी अस्पताल व नर्सिंग होम चांदी काट रहे हैं।
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चिकित्सक के छुट्टी पर जाने से सामान्य अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन के कमरे पर ताला लटका हुआ है। जिसके चलते मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड न होने पर निजी केंद्रों पर जाकर अपनी जांच करवानी पड़ती है जोकि मरीजों पर अतिरिक्त खर्च बढ़ने से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आमतौर पर देखा जाता है कि ईट भट्ठों पर मजदूरी करने वाले श्रमिकों की महिलाओं के पास निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए पैसे भी नहीं पाए जाते हैं।
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मरीजों की संख्या में मौसम को देखते हुए बढ़ोतरी हुई। अस्थमा के मरीजों के लिए अस्पताल में दवा व भाप देने की मशीन व अन्य दवाएं उपलब्ध हैं। सुबह शाम की ठंड से बचने के लिए कोशिश लोगों को करनी चाहिए।
- डॉ. कनिका, एसएमओ, सामान्य अस्पताल, झज्जर।