{"_id":"6092ff2c8ebc3ebf15195ad4","slug":"day-long-discussion-about-momita-s-death-on-the-tiki-border-bahadurgarh-news-rtk6073393163","type":"story","status":"publish","title_hn":"टीकरी बॉर्डर पर मोमिता की मौत को लेकर दिनभर रही चर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टीकरी बॉर्डर पर मोमिता की मौत को लेकर दिनभर रही चर्चा
विज्ञापन
बहादुरगढ़। किसान आंदोलन में शामिल रही मोमिता बसु की पिछले सप्ताह हुई मौत के मामले की बुधवार को टीकरी बॉर्डर पर दिनभर चर्चा होती रही। गुस्साए आंदोलनकारियों ने अपने पड़ाव में बनी एक झोपड़ी को तोड़कर तहस-नहस कर दी।
पिछले शुक्रवार को पश्चिमी बंगाल की किसान आंदोलनकारी मोमिता की एक स्थानीय अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उस समय मोमिता की मौत का कारण कोरोना संक्रमण बताया गया था। युवती की अंत्येष्टि कोविड प्रोटोकाल के अनुसार की गई। जिस दिन मोमिता की मौत हुई उसके बाद से ही मौत के कारणों पर सवाल उठाए जा रहे थे। चर्चा यह भी रही कि इस युवा किसान आंदोलनकारी के साथ आपराधिक वारदात हुई।
एक आंदोलनकारी किसान ने बताया कि मोमिता की मां बुधवार को टीकरी बॉर्डर पहुंची और उन्होंने कई किसानों से मुलाकात कर अपनी बेटी की मौत के मामले की जांच करवाने की मांग की। मोमिता की मौत के रोष स्वरूप कुछ आंदोलनकारियों ने टीकरी बार्डर पर ईंटों व अन्य सामान से बनी एक झोपड़ी को तहस-नहस कर दिया। मामले में कोई भी किसान नेता आधिकारिक रूप से कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुआ, लेकिन हरेक किसान नेता ने यह जरूर कहा कि जो भी हुआ बहुत बुरा हुआ।
विज्ञापन
मोमिता तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन में भाग लेने के लिए गत 11 अप्रैल को टीकरी बार्डर आई थी। बेटी की मौत की सूचना मिलने पर मोमिता के पिता उत्पल बसु बहादुरगढ़ पहुंचे और बेटी का शहर की रामबाग शमशान भूमि में बेटी का अंतिम संस्कार किया। बीते रविवार को टीकरी बॉर्डर पर हुई सभा में किसानों ने मोमिता को श्रद्धांजलि भी दी।
विज्ञापन
पिछले शुक्रवार को पश्चिमी बंगाल की किसान आंदोलनकारी मोमिता की एक स्थानीय अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उस समय मोमिता की मौत का कारण कोरोना संक्रमण बताया गया था। युवती की अंत्येष्टि कोविड प्रोटोकाल के अनुसार की गई। जिस दिन मोमिता की मौत हुई उसके बाद से ही मौत के कारणों पर सवाल उठाए जा रहे थे। चर्चा यह भी रही कि इस युवा किसान आंदोलनकारी के साथ आपराधिक वारदात हुई।
विज्ञापन
एक आंदोलनकारी किसान ने बताया कि मोमिता की मां बुधवार को टीकरी बॉर्डर पहुंची और उन्होंने कई किसानों से मुलाकात कर अपनी बेटी की मौत के मामले की जांच करवाने की मांग की। मोमिता की मौत के रोष स्वरूप कुछ आंदोलनकारियों ने टीकरी बार्डर पर ईंटों व अन्य सामान से बनी एक झोपड़ी को तहस-नहस कर दिया। मामले में कोई भी किसान नेता आधिकारिक रूप से कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुआ, लेकिन हरेक किसान नेता ने यह जरूर कहा कि जो भी हुआ बहुत बुरा हुआ।
विज्ञापन
मोमिता तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन में भाग लेने के लिए गत 11 अप्रैल को टीकरी बार्डर आई थी। बेटी की मौत की सूचना मिलने पर मोमिता के पिता उत्पल बसु बहादुरगढ़ पहुंचे और बेटी का शहर की रामबाग शमशान भूमि में बेटी का अंतिम संस्कार किया। बीते रविवार को टीकरी बॉर्डर पर हुई सभा में किसानों ने मोमिता को श्रद्धांजलि भी दी।