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खत्म होकर रहेगी पूंजीवादी व्यवस्था : झब्बर
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भाकियू की सभा में अपने नेताओं के विचार सुनते किसान। संवाद
- फोटो : Bahadurgarh
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बहादुरगढ़। तीन नए केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के टीकरी बार्डर पड़ाव में नयागांव के चौक के पास गदरी बीबी गुलाब कौर नगर में किसानों की सभा हुई। सभा को भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के कई नेताओं के अलावा कई अन्य किसान नेताओं ने संबोधित किया। यूनियन के मानसा जिला महासचिव इंद्रजीत सिंह झब्बर ने कहा कि पूंजीवादी व्यवस्था ने इंसानों में गहरी खाई बना है, लेकिन अब जनता जाग चुकी और पूरी दुनिया से यह शोषक व्यवस्था खत्म होकर रहेगी।
यूनियन के बठिंडा जिला के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोथू सिंह कोटरा ने कहा कि पूंजीपति लोग अपनी पसंद के कानून बनवाना और लागू करवाना चाहते हैं। इन कानूनों का मुद्दा न केवल भारत में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कई देशों में फैल चुका है। इन कंपनियों ने जहां भी अपना कारोबार शुरू किया है, भारत समेत दुनिया भर के देशों में ऐसे जनविरोधी कानूनों का इन कानूनों के कारण विरोध बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया में इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों का हाल के दिनों में व्यापक विरोध हुआ है। देश के अभिजात वर्ग को इसके विरोध में सदन से बेदखल कर दिया गया है, इसलिए निकट भविष्य में जन-समर्थक आंदोलन की उम्मीद है।
यूनियन के अमृतसर जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह ने कहा कि एक तरफ किसान तीन कृषि कानूनों से अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और दूसरी तरफ पांच राज्यों में 2022 के चुनाव के लिए सभी सियासी दल अपने-अपने तरीके से प्रचार करने की राह पर हैं। इसलिए मेहनतकश लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है और सभी दलों को इन कानूनों पर शांति से सवाल उठाने की जरूरत है। जसवंत सिंह टोलावाल, बिट्टू मल्लन और देसा सिंह घड़ियाला ने भी मंच से किसानों को संबोधित किया।
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यूनियन के बठिंडा जिला के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोथू सिंह कोटरा ने कहा कि पूंजीपति लोग अपनी पसंद के कानून बनवाना और लागू करवाना चाहते हैं। इन कानूनों का मुद्दा न केवल भारत में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कई देशों में फैल चुका है। इन कंपनियों ने जहां भी अपना कारोबार शुरू किया है, भारत समेत दुनिया भर के देशों में ऐसे जनविरोधी कानूनों का इन कानूनों के कारण विरोध बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया में इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों का हाल के दिनों में व्यापक विरोध हुआ है। देश के अभिजात वर्ग को इसके विरोध में सदन से बेदखल कर दिया गया है, इसलिए निकट भविष्य में जन-समर्थक आंदोलन की उम्मीद है।
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यूनियन के अमृतसर जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह ने कहा कि एक तरफ किसान तीन कृषि कानूनों से अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और दूसरी तरफ पांच राज्यों में 2022 के चुनाव के लिए सभी सियासी दल अपने-अपने तरीके से प्रचार करने की राह पर हैं। इसलिए मेहनतकश लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है और सभी दलों को इन कानूनों पर शांति से सवाल उठाने की जरूरत है। जसवंत सिंह टोलावाल, बिट्टू मल्लन और देसा सिंह घड़ियाला ने भी मंच से किसानों को संबोधित किया।
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