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हरियाणा : विदेशी पक्षियों से गुलजार हुई भिंडावास झील, 15 हजार से अधिक परिंदे पहुंचे

Sat, 07 Nov 2020 11:15 PM IST
रोहतक ब्यूरो मुकेश शर्मा, अमर उजाला, झज्जर (हरियाणा)
मुकेश शर्मा, अमर उजाला, झज्जर (हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Sat, 07 Nov 2020 11:15 PM IST
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Haryana News in Hindi: Foreign birds reach Jhajjar of Haryana
भिड़ावास झील में जलक्रीड़ा करते पक्षी। - फोटो : अमर उजाला

सर्दी का मौसम आते ही विदेशी मेहमानों का आगमन शुरू हो गया है। हरियाणा के झज्जर क्षेत्र में करीब चार माह तक इन पक्षियों की अठखेलियां व जलक्रीड़ा देखी जा सकती है। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से फरवरी तक विदेशी मेहमान यहां पर रुकते हैं। साइबेरिया सहित विभिन्न ठंडे प्रदेशों से आने वाले पक्षियों से झज्जर की भिंडावास झील गुलजार हो गई है। 

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झील और उसके आसपास के क्षेत्र में विदेशी पक्षियों का कलरव गूंज रहा है। झील का क्षेत्र हर साल सर्दी का मौसम शुरू होते ही विदेशी परिंदों के आगमन से गुलजार रहता है। उनकी मेजबानी का दशकों से चला आ रहा यह सिलसिला अब भिंडावास झील क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए डीघल, मांडौठी व धौड़ सहित कई स्थानों पर होने लगा है।
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जब ये पक्षी झुंड के झुंड भोजन की तलाश में जलाशय या उस के आसपास उतरते हैं, उड़ान भरते हैं या जल विहार करते हैं तो इनकी सुंदरता देखते ही बनती है। हर साल इनकी जलक्रीड़ा और अठखेलियों को निहारने के लिए पक्षी प्रेमी भी भिंडावास झील व उसके आसपास के क्षेत्र में पहुंचते हैं। फिलहाल यहां पर करीब 15 हजार पक्षी पहुंच चुके हैं।

विदेश में बर्फ जमने के बाद करते हैं भारत का रुख
साइबेरिया समेत अन्य ठंडे इलाकों से हर साल हजारों किलोमीटर की दूरी तय प्रवासी परिंदे आते हैं। जब विदेश में चारों तरफ बर्फ जम जाती है तो इन्हें भोजन मिलने में दिक्कत होती है। क्योंकि ये जिन कीड़ों, वनस्पतियों या जीवों को खाते हैं वे बर्फीले मौसम में समाप्त हो जाते हैं या फिर जमीन में छिपकर शीत निद्रा में चले जाते हैं। इसीलिए ये परिंदे भोजन की तलाश में भारत जैसे देशों में आते हैं। इनके आगमन के समय यहां शरद ऋतु होती है। इस दौरान नदी और जलाशय भरे होते हैं।

हर जगह हरियाली होती है, जिसके बीच इन्हें पर्याप्त आहार मिल जाता है। भिंडावास के अलावा क्षेत्र के डीघल गांव में विदेशी मेहमान ठहर रहे हैं। यहां बाइपास के साथ-साथ बारिश के कारण बने जलाशयों में दिसंबर माह तक पानी का भरा रहना है। इसके साथ ही सेम ग्रस्त भूमि होने के कारण यहां पर पानी भरा रहता है। डीघल टोल के पास भरे पानी में भी विदेशी परिंदों का जमावड़ा होने लगा है।

कम गहराई वाले पानी में उतरना करते हैं पसंद
वन्य प्राणी विभाग का कहना है कि इस बदलाव के पीछे कारण यह है कि ये पक्षी उस पानी में उतरना अधिक पसंद करते हैं जो कम गहरा हो और उनको आसानी से आहार मिल जाए। डीघल जहां पर ये पक्षी खासी तादात में नजर आ रहे हैं। वहां पानी कम गहरा है और उसमें पर्याप्त मात्रा में मछलियां हैं। इसके कारण यहां बहुत अधिक संख्या में पक्षियों का कलरव बना रहता है। झज्जर क्षेत्र में करीब 25 से 30 हजार पक्षी आ चुके हैं। अकेले भिंडावास झील में 15 हजार से अधिक पक्षी आ चुके हैं। 



ये पक्षी पहुंचे झील पर
भिंडावास झील पर विदेशी मेहमान पक्षी आने शुरू हो गए हैं। इनमें पेलीसिन, रोजी पेलीसन, कॉमन क्रेन, डेमार सेल, बारहेडिड गूज, परपर्ल हॉर्न, नेकस्टॉर्क, पेंटेड स्टॉर्क, ह्वाइट नेक, ग्रे पेल्सिन, पिनटेल डक, शोवलर, डक, कॉमनटील, डेल चिक, मेलर्ड, पोचार्ड, गारगेनी टेल व फ्लेमिंगो सहित कई प्रजाति के पक्षी आए हैं।

इन देशों से आते हैं पक्षी
सर्दी का मौसम शुरू होते ही साइबेरिया, ब्रिटेन, मंगोलिया व मध्य एशिया से हजारों की संख्या में विदेशी परिंदे मध्यभारत के मैदानों में आते हैं। जिनमें कॉमन सैंड पाइपर, वूड सैंड पाइपर, स्पॉटेड रेड सैंक, मार्स सैंडपाइपर, ग्रे लेग गूज और वार हेडेड गूज आदि पक्षी शामिल हैं।

भिंडावास झील में विदेशी मेहमान पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। यहां पर करीब 15 हजार से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पक्षी पहुंच चुके हैं। यहां पर करीब 50 हजार पक्षियों के आने की संभावना है। - देवेंद्र हुड्डा, निरीक्षक, वन्य प्राणी विहार, भिंडावास।

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