{"_id":"602040e78ebc3e27ee32be11","slug":"agriculture-minister-is-looking-at-agricultural-laws-through-the-spax-of-the-rich-dipendra-hooda-jhjhar-news-rtk5942959129","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृषि मंत्री कृषि कानूनों को धनवानों के चश्मे से देख रहेः दीपेंद्र हुड्डा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कृषि मंत्री कृषि कानूनों को धनवानों के चश्मे से देख रहेः दीपेंद्र हुड्डा
विज्ञापन
कार्यक्रम को संबोधित करते राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा। संवाद
- फोटो : Jhjhar
झज्जर। राज्य सभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान जब कृषि मंत्री ने पूछा कि तीन कृषि कानूनों में काला क्या है तो मैंने इसका जवाब दिया कि पूरा कानून ही काला है। कृषि मंत्री इन कानूनों को धनवानों के हित के नजरिये से पढ़ रहे हैं और हम इन्हें किसानों के हित के नजरिये से पढ़ रहे हैं। नजरिये का फर्क है। ये बातें रविवार को राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने पत्रकारों से बातचीत में कहीं।
उन्होंने कहा कि किसान संगठनों ने 12 दौर की वार्ता में एक-एक बिंदु पर सरकार को स्पष्ट बताया कि काला क्या है, लेकिन कृषि मंत्री कुछ सुनने, समझने को ही तैयार नहीं हैं। वे धनवानों के चश्मे से कानूनों को देख रहे हैं, अगर किसान के चश्मे से देखेंगे तो उन्हें स्पष्ट पता चल जाएगा।
कांग्रेस सांसद बोले कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा दिया था। जिसे इस सरकार ने पलट दिया, अब न जवान, न किसान, जय धनवान है। दीपेंद्र हुड्डा ने उम्मीद जताई कि सोमवार को राज्य सभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा का जवाब देते समय प्रधानमंत्री अपने और किसानों के बीच एक फोन कॉल की दूरी को खत्म करेंगे और किसानों की मांग को स्वीकार करेंगे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सरकार के लोग शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे किसानों को देशद्रोही, आतंकवादी, चीन-पाक से फंडेड, नक्सली आदि न जाने क्या-क्या कह रहे हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या भाजपा सरकार 12 दौर की वार्ता देशद्रोहियों से कर रही थी? सरकार कहती है कि किसान आंदोलन के पीछे चीन-पाकिस्तान का हाथ है, तो क्या चीन-पाकिस्तान का हाथ गाजीपुर और सिंघु बॉर्डर तक पहुंच गया है? आखिर सरकार कहना क्या चाहती है। उन्होंने कहा कि पिछले 74 दिन से सिंघु बॉर्डर पर 17 किलोमीटर, टीकरी बॉर्डर पर 21 किलोमीटर तक कई लाख किसान शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। इन 74 दिनों में 194 किसानों की जानें चली गई पर सत्ता के अहंकार में चूर इस सरकार के मुंह उफ तक नहीं निकला।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि किसान संगठनों ने 12 दौर की वार्ता में एक-एक बिंदु पर सरकार को स्पष्ट बताया कि काला क्या है, लेकिन कृषि मंत्री कुछ सुनने, समझने को ही तैयार नहीं हैं। वे धनवानों के चश्मे से कानूनों को देख रहे हैं, अगर किसान के चश्मे से देखेंगे तो उन्हें स्पष्ट पता चल जाएगा।
विज्ञापन
कांग्रेस सांसद बोले कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा दिया था। जिसे इस सरकार ने पलट दिया, अब न जवान, न किसान, जय धनवान है। दीपेंद्र हुड्डा ने उम्मीद जताई कि सोमवार को राज्य सभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा का जवाब देते समय प्रधानमंत्री अपने और किसानों के बीच एक फोन कॉल की दूरी को खत्म करेंगे और किसानों की मांग को स्वीकार करेंगे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सरकार के लोग शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे किसानों को देशद्रोही, आतंकवादी, चीन-पाक से फंडेड, नक्सली आदि न जाने क्या-क्या कह रहे हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या भाजपा सरकार 12 दौर की वार्ता देशद्रोहियों से कर रही थी? सरकार कहती है कि किसान आंदोलन के पीछे चीन-पाकिस्तान का हाथ है, तो क्या चीन-पाकिस्तान का हाथ गाजीपुर और सिंघु बॉर्डर तक पहुंच गया है? आखिर सरकार कहना क्या चाहती है। उन्होंने कहा कि पिछले 74 दिन से सिंघु बॉर्डर पर 17 किलोमीटर, टीकरी बॉर्डर पर 21 किलोमीटर तक कई लाख किसान शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। इन 74 दिनों में 194 किसानों की जानें चली गई पर सत्ता के अहंकार में चूर इस सरकार के मुंह उफ तक नहीं निकला।