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परनाला, लाइनपार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का टोटा, कैसे होगी बच्चों की पढ़ाई
Updated Mon, 18 Dec 2017 12:29 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
सरकारी स्कूलों में इन दिनों अध्यापकों की भारी कमी विद्यार्थियों को झेलनी पड़ रही है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों के चलते सरकार का अनिवार्य व मुफ्त शिक्षा का दावा खोखला ही साबित हो रहा है। अधिकतर बच्चे ट्यूशन का सहारा ले रहे हैं। शहर में ही नहीं, बल्कि गांवों में भी अध्यापकों की कमी से सरकारी विद्यालयों में बदहाल शैक्षणिक व्यवस्था के चलते कोचिंग और ट्यूशन सेंटर पनप रहे हैं। मजबूरी में बच्चों को ट्यूशन करना पड़ रहा है।
इससे गरीब बच्चों के परिजनों की जेब खाली हो रही है। जानकार लोगों ने बताया कि सरकारी विद्यालयों की लचर शिक्षण व्यवस्था का नतीजा है कि अभिभावकों को मजबूरन कोचिंग भेजना पड़ रहा है। परिणाम स्वरूप सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का ग्राफ गिरने का भी मुख्य कारण अध्यापकों की कमी को ही माना जा रहा है।
एक ओर जहां सरकारी शिक्षक विद्यालयों में बेहतर परिणाम देने में नाकामयाब हो रहे हैं। वहीं कई शिक्षक कोचिंग में बेधड़क बच्चों को पढ़ा रहे हैं जबकि सरकार ने सरकारी शिक्षकों के काचिंग व ट्यूशन पढ़ाने पर पाबंदी लगाई हुई है। यहां तक की स्कूलों में भी बच्चों को ट्यूशन की बात कही जाती है।
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अधिकतर स्कूलों में नहीं शिक्षक
अधिकतर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का टोटा बना हुआ है। खासकर विषय अध्यापकों की कमी के कारण विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी ठीक ढंग से नहीं कर पाते हैं। यह भी कोचिंग को बढ़ावा मिलने का प्रमुख कारण माना जा रहा है। बहादुरगढ़ परनाला गांव में स्थित प्राइमरी स्कूल में कुल 5 अध्यापक इन दिनों बच्चों को पढ़ा रहे हैं जबकि यहां पर 11 शिक्षकों की जरूरत है। वहीं दूसरी ओर लाइन पार के शंकर गार्डन में स्थित प्राइमरी स्कूल में भी 6 टीचरों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। इन्हीं दो स्थानों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अन्य सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की खासी कमी है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई किस प्रकार सुचारू हो रही होगी।
रिक्त पदों की सूचना भेज दी है सरकार को : बीईओ
इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी मदन चोपड़ा का कहना है कि शिक्षकों के रिक्त पदों की सूचना सरकार को भेज रहे हैं। जैसे ही उन्हें शिक्षक मिलेंगी, रिक्त पदों पर तैनाती कर दी जाएगी।
स्कूलों में नहीं अध्यापक, कैसे तैयार होगा देश का ‘भविष्य’
परनाला, लाइनपार के सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की भारी कमी
-सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे ले रहे ट्यूशन का सहारा
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बहादुरगढ़।
सरकारी स्कूलों में इन दिनों अध्यापकों की भारी कमी विद्यार्थियों को झेलनी पड़ रही है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों के चलते सरकार का अनिवार्य व मुफ्त शिक्षा का दावा खोखला ही साबित हो रहा है। अधिकतर बच्चे ट्यूशन का सहारा ले रहे हैं। शहर में ही नहीं, बल्कि गांवों में भी अध्यापकों की कमी से सरकारी विद्यालयों में बदहाल शैक्षणिक व्यवस्था के चलते कोचिंग और ट्यूशन सेंटर पनप रहे हैं। मजबूरी में बच्चों को ट्यूशन करना पड़ रहा है।
इससे गरीब बच्चों के परिजनों की जेब खाली हो रही है। जानकार लोगों ने बताया कि सरकारी विद्यालयों की लचर शिक्षण व्यवस्था का नतीजा है कि अभिभावकों को मजबूरन कोचिंग भेजना पड़ रहा है। परिणाम स्वरूप सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का ग्राफ गिरने का भी मुख्य कारण अध्यापकों की कमी को ही माना जा रहा है।
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एक ओर जहां सरकारी शिक्षक विद्यालयों में बेहतर परिणाम देने में नाकामयाब हो रहे हैं। वहीं कई शिक्षक कोचिंग में बेधड़क बच्चों को पढ़ा रहे हैं जबकि सरकार ने सरकारी शिक्षकों के काचिंग व ट्यूशन पढ़ाने पर पाबंदी लगाई हुई है। यहां तक की स्कूलों में भी बच्चों को ट्यूशन की बात कही जाती है।
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अधिकतर स्कूलों में नहीं शिक्षक
अधिकतर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का टोटा बना हुआ है। खासकर विषय अध्यापकों की कमी के कारण विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी ठीक ढंग से नहीं कर पाते हैं। यह भी कोचिंग को बढ़ावा मिलने का प्रमुख कारण माना जा रहा है। बहादुरगढ़ परनाला गांव में स्थित प्राइमरी स्कूल में कुल 5 अध्यापक इन दिनों बच्चों को पढ़ा रहे हैं जबकि यहां पर 11 शिक्षकों की जरूरत है। वहीं दूसरी ओर लाइन पार के शंकर गार्डन में स्थित प्राइमरी स्कूल में भी 6 टीचरों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। इन्हीं दो स्थानों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अन्य सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की खासी कमी है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई किस प्रकार सुचारू हो रही होगी।
रिक्त पदों की सूचना भेज दी है सरकार को : बीईओ
इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी मदन चोपड़ा का कहना है कि शिक्षकों के रिक्त पदों की सूचना सरकार को भेज रहे हैं। जैसे ही उन्हें शिक्षक मिलेंगी, रिक्त पदों पर तैनाती कर दी जाएगी।
स्कूलों में नहीं अध्यापक, कैसे तैयार होगा देश का ‘भविष्य’
परनाला, लाइनपार के सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की भारी कमी
-सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे ले रहे ट्यूशन का सहारा