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कोहलावास में पुलिस के पहुंचने से पहले ही बंधक बनाए लावारिस गोवंश छोड़े
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अमर उजाला ब्यूरो
बौंदकलां। गांव कोहलावास में लावारिस गो वंशों को एक प्लाट में बंधक बनाने और बेरहमी से पिटाई करने की सूचना बौंदकलां पुलिस के पास पहुंची। पुलिस टीम जब तक मौके पर पहुंचती इससे पहले ही गोवंशों को मुक्त कर दिया गया। पुलिस इस मामले में पूछताछ के लिए चार व्यक्तियों को थाने भी लाई थी। बाद में पंचायती तौर पर मामले का समझौता होने पर शिकायत दर्ज नहीं हो सकी।
मंगलवार को अज्ञात ने पुलिस को सूचना दी कि गांव के ही एक व्यक्ति के प्लांट में लावारिस गोवंश बंधक बनाकर रखे हैं। इन्हें बेरहमी से पीटने की सूचना भी पुलिस को मिली थी। पूरे मामले की फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। एसएचओ बौंदकलां राजेंद्र कुमार के मौके पर पहुंचने से पहले ही इन पशुओं को वहां से भगा दिया गया। पुलिस मौके पर पहुंची तो प्लाट में केवल एक सांड़ और एक गाय ही मिली। इसके बाद पुलिस ने गांव के ही चार व्यक्तियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। इस बारे में एसएचओ राजेंद्र सिंह ने बताया कि तीन गांवों के सरपंचों व मौजिज लोगों ने आपसी समझौते में बताया कि इन पशुओं को गोशाला में भेजा जाना था। एक प्लाट में ही रोका गया था। इस मामले में गोवंश के साथ अत्याचार वाली कोई बात सामने नहीं आई है। पुलिस ने इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं किया है।
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बौंदकलां। गांव कोहलावास में लावारिस गो वंशों को एक प्लाट में बंधक बनाने और बेरहमी से पिटाई करने की सूचना बौंदकलां पुलिस के पास पहुंची। पुलिस टीम जब तक मौके पर पहुंचती इससे पहले ही गोवंशों को मुक्त कर दिया गया। पुलिस इस मामले में पूछताछ के लिए चार व्यक्तियों को थाने भी लाई थी। बाद में पंचायती तौर पर मामले का समझौता होने पर शिकायत दर्ज नहीं हो सकी।
मंगलवार को अज्ञात ने पुलिस को सूचना दी कि गांव के ही एक व्यक्ति के प्लांट में लावारिस गोवंश बंधक बनाकर रखे हैं। इन्हें बेरहमी से पीटने की सूचना भी पुलिस को मिली थी। पूरे मामले की फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। एसएचओ बौंदकलां राजेंद्र कुमार के मौके पर पहुंचने से पहले ही इन पशुओं को वहां से भगा दिया गया। पुलिस मौके पर पहुंची तो प्लाट में केवल एक सांड़ और एक गाय ही मिली। इसके बाद पुलिस ने गांव के ही चार व्यक्तियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। इस बारे में एसएचओ राजेंद्र सिंह ने बताया कि तीन गांवों के सरपंचों व मौजिज लोगों ने आपसी समझौते में बताया कि इन पशुओं को गोशाला में भेजा जाना था। एक प्लाट में ही रोका गया था। इस मामले में गोवंश के साथ अत्याचार वाली कोई बात सामने नहीं आई है। पुलिस ने इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं किया है।
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