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नोटबंदी पर किसी ने देश की अर्थव्यवस्था के लिए सही बताया तो किसी ने किए सवाल खड़े
Updated Thu, 09 Nov 2017 12:30 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
नोटबंदी को हुए एक वर्ष हो गया है। इसका प्रभाव सकारात्मक रहा या नकारात्मक। इसको लेकर शहर के विभिन्न क्षेत्र के लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया है। कोई इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए सही बता रहा है तो कोई इस पर सवाल खड़े कर रहा है। आम लोगों का कहना है कि नोटबंदी के बाद अब उन्हें कोई दिक्कत नहीं आ रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष 8 नवंबर की रात 500 और 1000 के नोट बंद होने की घोषणा की थी।
इस अप्रत्याशित फैसले ने एक झटके में लोगों की जिंदगी बदल दी थी। करीब 15 दिनों तक प्रतिबंधित करेंसी को जमा करने और कैश निकालने के लिए सुबह से देर शाम तक बैंकों में लोगों की लंबी लाइनें लगी दिखाई थी। वहीं रात 12 बजे से ही शहर के हर एटीएम पर लाइन लग जाती थी। लोगों को मजबूरी में डिजिटल लेन-देन को अपनाना पड़ा। लोगों का कहना है कि अब नोटबंदी का असर पूरी तरह से समाप्त हो गया है।
बोले लोग-
अकाउंटेंट अजय कुमार ने कहा कि नोटबंदी में कोई बुराई नहीं थी। लेकिन इसको लागू करने का जो ढंग और समय था वह उचित नहीं था। इससे लोगों को हासिल क्या हुआ यह सोचने वाली बात है।
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निजी व्यवसाय करने वाले प्रमोद कुमार ने कहा कि अगर डिजिटल पेमेंट के हिसाब से देखा जाए तो नोटबंदी काफी सकारात्मक साबित हुई है। नोटबंदी के पहले 20 दिन काफी कठिन थे। दिसंबर से पहले सप्ताह में स्थिति सामान्य होने लगी। नोटबंदी का ही असर है कि त्योहारी सीजन में लोगों ने डिजिटल पेमेंट के माध्यम से खूब खरीदारी की।
शिक्षक सुदेश ने कहा कि नोटबंदी के एतिहासिक फैसले से देश को नई दिशा मिली। सही मायने में इस अप्रत्याशित अभूतपूर्व फैसले से न्यू इंडिया का सूत्रपात हुआ। नोटबंदी से कालेधन पर कड़ा प्रहार हुआ है और धन छिपाने वालों की कमर टूट गई। इस ऐतिहासिक फैसले के लिए देश के नागरिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं।
शिक्षण केंद्र संचालक मनोज कुमार ने कहा कि सरकार ने जो भी फैसला लिया था, वह जनहित में रहा। कुछ समय के लिए दिक्कत जरूर आई, लेकिन अब सब कुछ सामान्य हो गया है। नोटबंदी के दौर ने लोगों को नए-नए अनुभव दिलाए। लोगों को कई चीजों की कदर समझ आई थी। खैर जो कुछ भी रहा मगर यादगार अनुभव रहा।
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बहादुरगढ़।
नोटबंदी को हुए एक वर्ष हो गया है। इसका प्रभाव सकारात्मक रहा या नकारात्मक। इसको लेकर शहर के विभिन्न क्षेत्र के लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया है। कोई इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए सही बता रहा है तो कोई इस पर सवाल खड़े कर रहा है। आम लोगों का कहना है कि नोटबंदी के बाद अब उन्हें कोई दिक्कत नहीं आ रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष 8 नवंबर की रात 500 और 1000 के नोट बंद होने की घोषणा की थी।
इस अप्रत्याशित फैसले ने एक झटके में लोगों की जिंदगी बदल दी थी। करीब 15 दिनों तक प्रतिबंधित करेंसी को जमा करने और कैश निकालने के लिए सुबह से देर शाम तक बैंकों में लोगों की लंबी लाइनें लगी दिखाई थी। वहीं रात 12 बजे से ही शहर के हर एटीएम पर लाइन लग जाती थी। लोगों को मजबूरी में डिजिटल लेन-देन को अपनाना पड़ा। लोगों का कहना है कि अब नोटबंदी का असर पूरी तरह से समाप्त हो गया है।
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बोले लोग-
अकाउंटेंट अजय कुमार ने कहा कि नोटबंदी में कोई बुराई नहीं थी। लेकिन इसको लागू करने का जो ढंग और समय था वह उचित नहीं था। इससे लोगों को हासिल क्या हुआ यह सोचने वाली बात है।
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निजी व्यवसाय करने वाले प्रमोद कुमार ने कहा कि अगर डिजिटल पेमेंट के हिसाब से देखा जाए तो नोटबंदी काफी सकारात्मक साबित हुई है। नोटबंदी के पहले 20 दिन काफी कठिन थे। दिसंबर से पहले सप्ताह में स्थिति सामान्य होने लगी। नोटबंदी का ही असर है कि त्योहारी सीजन में लोगों ने डिजिटल पेमेंट के माध्यम से खूब खरीदारी की।
शिक्षक सुदेश ने कहा कि नोटबंदी के एतिहासिक फैसले से देश को नई दिशा मिली। सही मायने में इस अप्रत्याशित अभूतपूर्व फैसले से न्यू इंडिया का सूत्रपात हुआ। नोटबंदी से कालेधन पर कड़ा प्रहार हुआ है और धन छिपाने वालों की कमर टूट गई। इस ऐतिहासिक फैसले के लिए देश के नागरिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं।
शिक्षण केंद्र संचालक मनोज कुमार ने कहा कि सरकार ने जो भी फैसला लिया था, वह जनहित में रहा। कुछ समय के लिए दिक्कत जरूर आई, लेकिन अब सब कुछ सामान्य हो गया है। नोटबंदी के दौर ने लोगों को नए-नए अनुभव दिलाए। लोगों को कई चीजों की कदर समझ आई थी। खैर जो कुछ भी रहा मगर यादगार अनुभव रहा।