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काले धन का होगा पर्दाफाश, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी हो रही प्रभावित

Sat, 19 Nov 2016 01:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर Updated Sat, 19 Nov 2016 01:03 AM IST
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500 and 1000 rupees changed in bank, crowd came in Bank, Jhajjar
नोटों को लेकर विवाद - फोटो : bureau
 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद करने वाला सरकार का फैसला इस कहावत से दूर नहीं है कि गेहूं के साथ घुन भी पिसता है। ये सच है कि सरकार के इस फैसले से कालेधन का कारोबार करने वालों पर नकेल कसेगी, लेकिन इसके साथ ही आमजन को भी परेशानी के रूप में इसका भुगतान करना पड़ रहा है।
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 जनता के दिल में कालेधन का पर्दाफाश होने का हौसला तो जागा, लेकिन बैंकों के सामने लाइन में घंटों खड़े रहने के बाद भी कैश न मिलने के कारण उनकी रोजमर्रा की दिक्कतें बढ़ती ही जा रही हैं। अगर जिलेभर की स्थिति पर नजर डाली जाए तो कुछ बैंक एवं बैंक के एटीएम ही हैं जहां से कैश मिल रहा है, वहां लंबी लाइनें लगी हुई हैं और जहां कैश मिलना बंद हो गया है वहां लोग सरकार को कोसते नजर आ रहे हैं। रोज पूरा दिन बर्बाद करने के बाद भी लोगों का नंबर नहीं आ रहा और बैंक का रुपया एवं समय समाप्त हो जाता है।
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 कुछ बैंक हैं जो कैश होने पर बैंक की समय अवधि समाप्त होने पर भी रुपये दे रहे हैं, लेकिन इससे भी समस्या का समाधान नहीं दिख रहा है, क्योंकि इसका लाभ सिर्फ बैंक के शाखा एवं बैंक एटीएम तक पहुंचने वाले लोग ही ले रहे हैं।
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आज परिस्थितियां ये हैं कि 500 व 1000 रुपये कोई ले नहीं रहा है और बिना 500 व 1000 के नोटों के काम भी नहीं चल पा रहा है, क्योंकि अभी सभी लोगों के पास न तो नई करेंसी की उपलब्धता हो सकी है और न ही सौ के नोट उनके पास बचे हैं। क्षेत्र में ऐसे जन भी मौजूद हैं जिनका बैंकों में कोई खाता ही नहीं है, जिसकी पहुंच से बैंक भी दूर है तो उसका काम कैसे चलेगा।

पैट्रोल पंप पर भी नहीं मिल रहे छुट्टे
पैट्रोल पंप पर भी 500 और 1000 का पैट्रोल दिया जा रहा है। अगर किसी के पास जेब में सिर्फ 500 का नोट है तो उसे पूरे पैसों का ही पैट्रोल डलवाना पड़ेगा इसके अलावा उसके पास और कोई चारा नहीं है। अभी तक क्षेत्र में कार्ड से पेमेंट करने का इतना चलन नहीं है सारा काम कैश से ही होने वाला है।

रास्ते पर निकले किसी भी दूर दराज के क्षेत्र में रहने वाले नागरिक के लिए सरकार का यह फैसला एक फरमान ही साबित हुआ है। क्योंकि जब वह घर से निकला होगा तो उसने अपनी जेब में बड़े नोट ही रखे होंगे और कुछ भरोसा एटीएम कार्ड के सहारे भी था लेकिन सरकार के इस फैसले ने यात्रियों की यात्रा और आमजन को एक बार तो दुविधा में जरूर डाल दिया है।

नहीं है कार्ड से पेमेंट करने की सुविधा
क्षेत्र में ऐसे बहुत जन हैं जो सरकार के फैसले के कारण परेशानियों से दो चार हो रहे हैं। किसी को अस्पताल में जाना हो, शहर व शहर के साथ अन्य छोटे स्टेशनों में प्राइवेट नर्सिंग होम इलाज के लिए तो हैं लेकिन सभी के पास कार्ड से पेमेंट लेने की सुविधा नहीं है और सभी लोग कार्ड से पेमेंट देने में असमर्थ भी हैं।

शादी विवाह व अन्य किसी भी आपातकालीन स्थिति में तत्काल रुपये की आवश्यकता होती है। किसी भी आवश्यक कार्य के लिए तत्काल जिसको 50 हजार से एक लाख रुपये की आवश्यकता है वह समय पर कैश न मिलने के कारण सरकार को कोस रहा है, क्योंकि कार्य का समय या अवधि निर्धारित है और उसे टाला भी नहीं जा सकता, लेकिन सरकार के इस फैसले ने लोगों की आस को जरूर आधा अधूरा सा करके रख दिया दिया है।


एटीएम भी नहीं दे पा रहे साथ
24 घंटे सेवा देने वाले एटीएम कैश खत्म हो जाने के कारण कुछ ही घंटों में दम तोड़ती नजर आ रही है। रोज सुबह बैंक खुलने से लेकर बंद होने तक लोगों में अफरा-तफरी देखी जा रही है, यहां तक कि मजबूरियों में फंसे मजदूर, किसान, मध्य वर्ग के लोगों, छोटे कारोबारियों का कहना है कि नोटबंदी के सभी पहलुओं पर ठीक से विचार नहीं किया गया था, जिसके कारण अब इस फैसले के कारण आमजन भी पिसता नजर आ रहा है। बैंकों में व्यवस्था सुचारु न होने के कारण भी परेशानी बढ़ी है।
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