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पशुओं को मुहंखुर व गलघोटू का पूरे देश में लगेगा अब इंजेक्शन
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। पूरे प्रदेश में इस बार पशुओं को गलघोंटू व मुंहखुर रोग की रोकथाम के लिए एक ही वैक्सीन लगाई जाएगी। इससे पहले दोनों रोगों के लिए अलग-अलग समय पर टीकाकरण किया जाता था। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ओर से पशुपालकों के पशुओं को घर-घर जाकर टीके लगाए जाते थे। लेकिन पशुपालक उस समय भी दुधारू पशुओं को टीके लगवाने से इनकार कर देते थे। हालांकि इस बार एक बार ही वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाएगा। विभाग की टीमें लोगों के घर द्वार पर जाकर पशुओं को टीके लगाएंगे। दोनों रोगों के लिए वाईवेल्ट नाम की वैक्सीन तैयार की गई है और प्रदेश को गलघोंटू और मुंहखुर रोग मुक्त बनाने के लिए विभाग का लक्ष्य है। जिले में पशुपालन विभाग की तरफ से पशुओं के इलाज के लिए 92 पशु अस्पताल और 49 डिस्पेंसरी खोली गई हैं। इनमें 95 वीएलडीए नियुक्त किए गए हैं। एक बार में ही वैक्सीनेशन का कार्य पूरा होने पर इसको भी पशुओं के इलाज के लिए अधिक समय मिल सकेगा।
पशुपालकों का बचेगा खर्च
पहले दो बार अभियान चलाया जाता था। इसके कारण विभाग के पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों को दो बार पशु पालकों के घर-घर जाना पड़ता था। लेकिन दोनों रोगों की वैक्सीन एक होने से एक बार में ही वैक्सीनेशन का कार्य पूरा हो जाएगा। इससे पशुपालकों को एक बार का समय और खर्च दोनों ही बच जाएगा। इसके अलावा टीका लगाने पर पशुओं को होने वाला दर्द भी एक बार ही सहन करना पड़ेगा। 19वीं गणना के अनुसार जिले में करीब 338474 पशु थे। जबकि 185665 घर थे। इन पशुओं में 52815 गोवंश, 247486 भैंस, 19876 भेड़, 10270 बकरी, 8027 सुअर शामिल थे।
दूध में कमी की धारणा गलत
जिले में फिलहाल पशुओं की डिजिटल गणना का कार्य चल रहा है। जिले में कितने पशु हैं इसकी जानकारी 15 अप्रैल के बाद आने की संभावना है। क्योंकि उस समय तक पशुओं की गणना का कार्य पूरा होने की पूरा हो जाएगा। पशु पालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पशु पालकों में धारणा बनी हुई हे कि टीके लगवाने से पशुओं का दूध कम हो जाता है। लेकिन यह धारणा गलत है। पशुओं को रोगों से बचाने के लिए टीके अवश्य लगवाने चाहिए।
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पशुओं को इस बार मुंहखुर और गलघोंटू की बीमारी से बचाने के लिए एक ही टीका लगाया जाएगा। अप्रैल के दूसरे सप्ताह में वैक्सीन आ जाएगी और उसके बाद विभाग की टीमें लोगों के घर-घर पशुओं को टीके लगाएंगी।
डॉ. मनीष डबास, डीडीए, पशु पालन विभाग, झज्जर।
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झज्जर। पूरे प्रदेश में इस बार पशुओं को गलघोंटू व मुंहखुर रोग की रोकथाम के लिए एक ही वैक्सीन लगाई जाएगी। इससे पहले दोनों रोगों के लिए अलग-अलग समय पर टीकाकरण किया जाता था। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ओर से पशुपालकों के पशुओं को घर-घर जाकर टीके लगाए जाते थे। लेकिन पशुपालक उस समय भी दुधारू पशुओं को टीके लगवाने से इनकार कर देते थे। हालांकि इस बार एक बार ही वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाएगा। विभाग की टीमें लोगों के घर द्वार पर जाकर पशुओं को टीके लगाएंगे। दोनों रोगों के लिए वाईवेल्ट नाम की वैक्सीन तैयार की गई है और प्रदेश को गलघोंटू और मुंहखुर रोग मुक्त बनाने के लिए विभाग का लक्ष्य है। जिले में पशुपालन विभाग की तरफ से पशुओं के इलाज के लिए 92 पशु अस्पताल और 49 डिस्पेंसरी खोली गई हैं। इनमें 95 वीएलडीए नियुक्त किए गए हैं। एक बार में ही वैक्सीनेशन का कार्य पूरा होने पर इसको भी पशुओं के इलाज के लिए अधिक समय मिल सकेगा।
पशुपालकों का बचेगा खर्च
पहले दो बार अभियान चलाया जाता था। इसके कारण विभाग के पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों को दो बार पशु पालकों के घर-घर जाना पड़ता था। लेकिन दोनों रोगों की वैक्सीन एक होने से एक बार में ही वैक्सीनेशन का कार्य पूरा हो जाएगा। इससे पशुपालकों को एक बार का समय और खर्च दोनों ही बच जाएगा। इसके अलावा टीका लगाने पर पशुओं को होने वाला दर्द भी एक बार ही सहन करना पड़ेगा। 19वीं गणना के अनुसार जिले में करीब 338474 पशु थे। जबकि 185665 घर थे। इन पशुओं में 52815 गोवंश, 247486 भैंस, 19876 भेड़, 10270 बकरी, 8027 सुअर शामिल थे।
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दूध में कमी की धारणा गलत
जिले में फिलहाल पशुओं की डिजिटल गणना का कार्य चल रहा है। जिले में कितने पशु हैं इसकी जानकारी 15 अप्रैल के बाद आने की संभावना है। क्योंकि उस समय तक पशुओं की गणना का कार्य पूरा होने की पूरा हो जाएगा। पशु पालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पशु पालकों में धारणा बनी हुई हे कि टीके लगवाने से पशुओं का दूध कम हो जाता है। लेकिन यह धारणा गलत है। पशुओं को रोगों से बचाने के लिए टीके अवश्य लगवाने चाहिए।
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पशुओं को इस बार मुंहखुर और गलघोंटू की बीमारी से बचाने के लिए एक ही टीका लगाया जाएगा। अप्रैल के दूसरे सप्ताह में वैक्सीन आ जाएगी और उसके बाद विभाग की टीमें लोगों के घर-घर पशुओं को टीके लगाएंगी।
डॉ. मनीष डबास, डीडीए, पशु पालन विभाग, झज्जर।