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घरों के अंदर बंदर बेखौफ, लोग खौफजदा
Updated Wed, 10 Oct 2018 01:05 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। शहर के सभी 21 वार्डों में इस समय बंदरों का आतंक है। बंदरों का झुंड घरों में बेखौफ होकर घुस ुरहे हैं जिससे लोग खौफजदा हैं। अपने ही घर में इस समय न तो लोग सुरक्षित हैं और न ही उनका सामान। वार्ड-19 और 20 में पिछले दो माह में बंदर घर में घुसकर छह लोगों को काट चुके हैं और एक घर से सामान उठाकर ले जा चुके हैं। इन वार्डों के लोगों का कहना है कि वार्डों में बंदरों के शिकार लोगों की संख्या 50 के पार जा चुकी है। वहीं, बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर परिषद की है लेकिन नप कार्यालय परिसर में भी बंदर घुमते रहते हैं। इस ओर अधिकारियों को कोई ध्यान नहीं है। पिछले अगर चार साल की बात करें तो पांच बार अभियान शुरू कराया गया लेकिन एक बार भी नगर परिषद शहर को बंदर मुक्त नहीं कर पाई।
ठेकेदार अभियान को अधर में लटकाकर चले जाते हैं। प्रतिदिन अधिकारियों और पार्षदों के पास पूरे शहर से बंदरों से 50 से अधिक शिकायतें पहुंच रही हैं इसके बाद भी नतीजा शून्य है। चेयरमैन की मानें तो नए सिरे से नगर परिषद अभियान शुरू कराने की तैयारी में है और इसके लिए दो-तीन दिन में ही टेंडर लगाए जाएंगे। शहर में बंदरों की तादाद करीब 1500 से पार है लेकिन नगर परिषद 500 बंदरों को पकड़ने का ही टेंडर लगाएगी। हर बार फ्लॉप होता है बंदर पकड़ो अभियान
वहीं, बंदर पकड़ो अभियान का मुद्दा हाउस की प्रत्येक बैठक में पार्षद उठाते हैं और इस संदर्भ में प्रस्ताव भी पास किया जाता है। इसके बाद प्रक्रिया कागजों में ही उलझकर रह जाती है। हर बार नगर परिषद का बंदर पकड़ो अभियान फ्लॉप होना भी बड़ा सवालिया निशान उठा रहा है, चूंकि ठेकेदार अभियान छोड़ने का कारण पेमेंट का भुगतान देरी से करना या फिर न करना बता चुके हैं।
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बंदरों के आतंक का शिकार बने लोगों के जहन में डर बरकरार
केस नंबर:-1:: बुजुर्ग महिला को दो बार काट चुके बंदर
किसान चौक निवासी चांदकौर (75) ने बताया कि उनकी कालोनी में बंदरों का झुंड डेरा डाले हुए है। उसे बंदर घर में घुसकर दो बार काट चुके हैं। महिला ने बताया कि दोनों बार उसे छत पर कपड़े सूखाते समय बंदरों ने अपना शिकार बनाया। घटनाओं के बाद से ही जहन में डर है।
केस नंबर -2: घर के आंगन में सात साल के बच्चे को काटा
वार्ड 20 निवासी राजकुमार ने बताया कि उसका बेटा वंश(7) कुछ दिन पहले घर के आंगन में खेल रहा था। इसी दौरान बंदर उनके घर में घुस गए और उसके बेटे के हाथ पर बंदरों ने काट लिया। इसके बाद से ही परिवार व आस-पड़ोस के लोगों में खौफ बना हुआ है।
केस नंबर-3 : तीन जोड़ी कपड़े उठा ले गए बंदर
किसान चौक निवासी रणधीर(62) ने बताया कि करीब दस दिन पहले वह तीन जोड़ी नए कुर्ता-पायजामा सिलवाकर लाया था। उसने थैली घर पर कमरे में रखी हुई थी। वहां से इस थैली को बंदर उठा ले गए।
केस नंबर -4 : खिड़की के शीशे तोड़कर कमरे में घुसे बंदर, सामान भी तोड़ा
वार्ड 20 निवासी सुनीता (40) ने बताया कि कुछ समय पहले बंदर उनके छत पर बने कमरे की खिड़कियों के कांच तोड़कर अंदर घुस गए। इसके बाद उन्होंने खूब उत्पात मचाते हुए कूलर व अन्य सामान तोड़ डाला। घटना में उन्हें करीब पांच हजार रुपये का नुकसान हुआ था।
ये भी हुए बंदरों के शिकार
वार्ड 20 निवासी जगवंती (50)को भी बंदरों ने काट लिया। जगवंती अपने घर के आंगन में कपड़े सूखा रही थी कि इसी दौरान एक बंदर ने उस पर हमला बोल दिया। इसके अलावा वार्ड निवासी सावित्री पत्नी धर्मपाल और उमा देवी पत्नी अत्तर सिंह पर बंदरों ने हमला बोला था। लोगों ने बताया कि प्लॉट में लगाए गए पेड़ों पर दिनभर बंदरों का झुंड बैठा रहता है।
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चरखी दादरी। शहर के सभी 21 वार्डों में इस समय बंदरों का आतंक है। बंदरों का झुंड घरों में बेखौफ होकर घुस ुरहे हैं जिससे लोग खौफजदा हैं। अपने ही घर में इस समय न तो लोग सुरक्षित हैं और न ही उनका सामान। वार्ड-19 और 20 में पिछले दो माह में बंदर घर में घुसकर छह लोगों को काट चुके हैं और एक घर से सामान उठाकर ले जा चुके हैं। इन वार्डों के लोगों का कहना है कि वार्डों में बंदरों के शिकार लोगों की संख्या 50 के पार जा चुकी है। वहीं, बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर परिषद की है लेकिन नप कार्यालय परिसर में भी बंदर घुमते रहते हैं। इस ओर अधिकारियों को कोई ध्यान नहीं है। पिछले अगर चार साल की बात करें तो पांच बार अभियान शुरू कराया गया लेकिन एक बार भी नगर परिषद शहर को बंदर मुक्त नहीं कर पाई।
ठेकेदार अभियान को अधर में लटकाकर चले जाते हैं। प्रतिदिन अधिकारियों और पार्षदों के पास पूरे शहर से बंदरों से 50 से अधिक शिकायतें पहुंच रही हैं इसके बाद भी नतीजा शून्य है। चेयरमैन की मानें तो नए सिरे से नगर परिषद अभियान शुरू कराने की तैयारी में है और इसके लिए दो-तीन दिन में ही टेंडर लगाए जाएंगे। शहर में बंदरों की तादाद करीब 1500 से पार है लेकिन नगर परिषद 500 बंदरों को पकड़ने का ही टेंडर लगाएगी। हर बार फ्लॉप होता है बंदर पकड़ो अभियान
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वहीं, बंदर पकड़ो अभियान का मुद्दा हाउस की प्रत्येक बैठक में पार्षद उठाते हैं और इस संदर्भ में प्रस्ताव भी पास किया जाता है। इसके बाद प्रक्रिया कागजों में ही उलझकर रह जाती है। हर बार नगर परिषद का बंदर पकड़ो अभियान फ्लॉप होना भी बड़ा सवालिया निशान उठा रहा है, चूंकि ठेकेदार अभियान छोड़ने का कारण पेमेंट का भुगतान देरी से करना या फिर न करना बता चुके हैं।
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बंदरों के आतंक का शिकार बने लोगों के जहन में डर बरकरार
केस नंबर:-1:: बुजुर्ग महिला को दो बार काट चुके बंदर
किसान चौक निवासी चांदकौर (75) ने बताया कि उनकी कालोनी में बंदरों का झुंड डेरा डाले हुए है। उसे बंदर घर में घुसकर दो बार काट चुके हैं। महिला ने बताया कि दोनों बार उसे छत पर कपड़े सूखाते समय बंदरों ने अपना शिकार बनाया। घटनाओं के बाद से ही जहन में डर है।
केस नंबर -2: घर के आंगन में सात साल के बच्चे को काटा
वार्ड 20 निवासी राजकुमार ने बताया कि उसका बेटा वंश(7) कुछ दिन पहले घर के आंगन में खेल रहा था। इसी दौरान बंदर उनके घर में घुस गए और उसके बेटे के हाथ पर बंदरों ने काट लिया। इसके बाद से ही परिवार व आस-पड़ोस के लोगों में खौफ बना हुआ है।
केस नंबर-3 : तीन जोड़ी कपड़े उठा ले गए बंदर
किसान चौक निवासी रणधीर(62) ने बताया कि करीब दस दिन पहले वह तीन जोड़ी नए कुर्ता-पायजामा सिलवाकर लाया था। उसने थैली घर पर कमरे में रखी हुई थी। वहां से इस थैली को बंदर उठा ले गए।
केस नंबर -4 : खिड़की के शीशे तोड़कर कमरे में घुसे बंदर, सामान भी तोड़ा
वार्ड 20 निवासी सुनीता (40) ने बताया कि कुछ समय पहले बंदर उनके छत पर बने कमरे की खिड़कियों के कांच तोड़कर अंदर घुस गए। इसके बाद उन्होंने खूब उत्पात मचाते हुए कूलर व अन्य सामान तोड़ डाला। घटना में उन्हें करीब पांच हजार रुपये का नुकसान हुआ था।
ये भी हुए बंदरों के शिकार
वार्ड 20 निवासी जगवंती (50)को भी बंदरों ने काट लिया। जगवंती अपने घर के आंगन में कपड़े सूखा रही थी कि इसी दौरान एक बंदर ने उस पर हमला बोल दिया। इसके अलावा वार्ड निवासी सावित्री पत्नी धर्मपाल और उमा देवी पत्नी अत्तर सिंह पर बंदरों ने हमला बोला था। लोगों ने बताया कि प्लॉट में लगाए गए पेड़ों पर दिनभर बंदरों का झुंड बैठा रहता है।