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जिले को न तो शिक्षा बजट मिला न डीईओ
Updated Mon, 05 Feb 2018 12:21 AM IST
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जिले को न तो शिक्षा बजट मिला न डीईओ
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
एक साल से ज्यादा समय बीतने पर भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्थापित न होने से करीब पांच हजार शिक्षकों और लाखों अभिभावकों को पुराने जिला मुख्यालय पर चक्कर काटने पड़ रहे हैं। शिक्षकों की एसीपी फाइल, पे-फिक्सेशन, मेडिकल संबंधी फाइलों की समय पर पैरवी नहीं हो पाती। इतना ही नहीं अभिभावकों को समय- समय पर अपने बच्चों की एसएलसी और अन्य दस्तावेजों पर काउंटर साइन करवाने के लिए पुराने जिला मुख्यालय ही जाना पड़ रहा है। जिले में करीब दो लाख से ज्यादा स्कूली बच्चे हैं। विभाग का अलग से बजट भी जारी नहीं हुआ है।
सरकार ने गत नवंबर 2016 में चरखी दादरी को अधिकारिक तौर पर जिला घोषित किया था लेकिन अब तक काफी सरकारी सरकारी विभाग अस्तित्व में नहीं आए हैं। इनमें शिक्षा विभाग सबसे प्रमुख विषय है। शिक्षा विभाग का जिला स्तर का कार्यालय यहां आज तक शुरू नहीं हुआ है। इस समय यह विभाग पुराने ढर्रे पर ही चला आ रहा है। यहां जिला शिक्षा अधिकारी डीईओ का अलग से पद सृजित न होने की वजह से शिक्षकों व बच्चों के अभिभावकों को आए दिन अपने कामकाज करवाने के लिए पुराने जिला मुख्यालय ही जाना पड़ रहा है। जिससे इन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
काउंटर साइन के लिए जाना पड़ता है भिवानी
छात्रों के अभिभावकों को समय- समय पर काउंटर साइन के लिए पुराने जिला मुख्यालय ही जाना पड़ रहा है। छात्रों से जुड़े अन्य कई प्रकार के मामलों में भी अभिभावकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। जिले में इस समय दो लाख से ज्यादा छात्र विभिन्न सरकारी व निजी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। निजी व प्राइवेट स्कूलों में करीब पांच हजार शिक्षक भी हैं जिनको अपने रूटीन के कामकाज करवाने के लिए पुराने जिला मुख्यालय ही जाना पड़ रहा है।
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शिक्षकों की मेडिकल फाइलों का काम बाधित
शिक्षकों के मेडिकल से जुड़े मामलों का निपटान भी यहां नहीं हो पा रहा है। यहां से फाइल डीईओ कार्यालय भिवानी ही मंजूरी के लिए भेजनी पड़ती है ऐसे में एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जिससे फाइल का निपटान होने में दोगुना समय लग जाता है। फाइल की पैरवी के लिए शिक्षकों को समय- समय पर भिवानी जाकर अपडेट लेनी पड़ती है जिससे उनके समय की भी बर्बादी होती है तथा काम समय पर भी पूरा नहीं हो पाता।
एसीपी व एसीआर के मामले भी सफर हो रहे
शिक्षकों की एसीआर व एसीपी के मामलों का निपटान भी समय पर पूरा नहीं हो पाता। यह सारा कामकाज भिवानी में ही निपटाया जा रहा है जिससे शिक्षक काफी परेशानी में हैं। एसीपी व एसीआर दोनो की प्रमुख विषय है। इसी प्रकार पे-फिक्सेसशन के मामलों से जुड़ी फाइलों का काम भी बाधित हो रहा है। वेतन विसंगतियों से जुड़े मामले भी बाधित हो रहे हैं। शिक्षकों के अनुभव प्रमाण- पत्र भी यहां नहीं बन पा रहे हैं।
शिक्षक संघ सौंप चुका ज्ञापन
डीईओ कार्यालय स्थापित करने की मांग को लेकर शिक्षक संघ शिक्षा विभाग अधिकारियों व प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुका है। जिला प्रतियोगिताएं चरखी दादरी में ही करवाए जाने की मांग कर चुका है लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। जिला स्तर पर होने वाली स्कूली खेल प्रतियोगिताएं भी नए जिले चरखी दादरी में नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में हजारों स्कूली छात्रों को पुराने जिला मुख्यालय पर ही खेलने के लिए जाना पड़ रहा है जिससे बच्चों व शिक्षकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
अलग से बजट भी शुरू नहीं
जिला शिक्षा विभाग का जिले के लिए अलग से बजट भी शुरू नहीं हो सका है जिससे विभाग की उन्नति से जुड़े कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। भिवानी को मिलने वाले बजट से ही काम चलाना पड़ रहा है जिससे कम बजट के अभाव में जिले में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की कल्पना संभव नहीं है। हालांकि इस समय भिवानी के पास ही डीईओ का चार्ज है।
:::
सरकार को चरखी दादरी में डीईओ का अलग से पद जल्द ही सृजित करना चाहिए। शिक्षकों और छात्रों के अभिभावकों को अपने कामकाज के लिए भिवानी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसे लेकर शिक्षक संघ अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंप चुका है। नए जिले का अलग से बजट भी पास होना चाहिए। जिला खेल स्पर्धाएं चरखी दादरी में ही होनी चाहिए। - संजय शास्त्री, जिला कार्यालय सचिव, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ
::: वर्सन-
सरकार को कई बार जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्टाफ व कार्यालय स्थापित करने को लेकर लिखा जा चुका है। सरकार के निर्देश पर ही विभाग अगला कदम उठा पाएगा। फिलहाल डीईओ का चार्ज उनके पास ही है। डीईओ सुरेश कुमार शर्मा, भिवानी
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
एक साल से ज्यादा समय बीतने पर भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्थापित न होने से करीब पांच हजार शिक्षकों और लाखों अभिभावकों को पुराने जिला मुख्यालय पर चक्कर काटने पड़ रहे हैं। शिक्षकों की एसीपी फाइल, पे-फिक्सेशन, मेडिकल संबंधी फाइलों की समय पर पैरवी नहीं हो पाती। इतना ही नहीं अभिभावकों को समय- समय पर अपने बच्चों की एसएलसी और अन्य दस्तावेजों पर काउंटर साइन करवाने के लिए पुराने जिला मुख्यालय ही जाना पड़ रहा है। जिले में करीब दो लाख से ज्यादा स्कूली बच्चे हैं। विभाग का अलग से बजट भी जारी नहीं हुआ है।
सरकार ने गत नवंबर 2016 में चरखी दादरी को अधिकारिक तौर पर जिला घोषित किया था लेकिन अब तक काफी सरकारी सरकारी विभाग अस्तित्व में नहीं आए हैं। इनमें शिक्षा विभाग सबसे प्रमुख विषय है। शिक्षा विभाग का जिला स्तर का कार्यालय यहां आज तक शुरू नहीं हुआ है। इस समय यह विभाग पुराने ढर्रे पर ही चला आ रहा है। यहां जिला शिक्षा अधिकारी डीईओ का अलग से पद सृजित न होने की वजह से शिक्षकों व बच्चों के अभिभावकों को आए दिन अपने कामकाज करवाने के लिए पुराने जिला मुख्यालय ही जाना पड़ रहा है। जिससे इन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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काउंटर साइन के लिए जाना पड़ता है भिवानी
छात्रों के अभिभावकों को समय- समय पर काउंटर साइन के लिए पुराने जिला मुख्यालय ही जाना पड़ रहा है। छात्रों से जुड़े अन्य कई प्रकार के मामलों में भी अभिभावकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। जिले में इस समय दो लाख से ज्यादा छात्र विभिन्न सरकारी व निजी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। निजी व प्राइवेट स्कूलों में करीब पांच हजार शिक्षक भी हैं जिनको अपने रूटीन के कामकाज करवाने के लिए पुराने जिला मुख्यालय ही जाना पड़ रहा है।
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शिक्षकों की मेडिकल फाइलों का काम बाधित
शिक्षकों के मेडिकल से जुड़े मामलों का निपटान भी यहां नहीं हो पा रहा है। यहां से फाइल डीईओ कार्यालय भिवानी ही मंजूरी के लिए भेजनी पड़ती है ऐसे में एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जिससे फाइल का निपटान होने में दोगुना समय लग जाता है। फाइल की पैरवी के लिए शिक्षकों को समय- समय पर भिवानी जाकर अपडेट लेनी पड़ती है जिससे उनके समय की भी बर्बादी होती है तथा काम समय पर भी पूरा नहीं हो पाता।
एसीपी व एसीआर के मामले भी सफर हो रहे
शिक्षकों की एसीआर व एसीपी के मामलों का निपटान भी समय पर पूरा नहीं हो पाता। यह सारा कामकाज भिवानी में ही निपटाया जा रहा है जिससे शिक्षक काफी परेशानी में हैं। एसीपी व एसीआर दोनो की प्रमुख विषय है। इसी प्रकार पे-फिक्सेसशन के मामलों से जुड़ी फाइलों का काम भी बाधित हो रहा है। वेतन विसंगतियों से जुड़े मामले भी बाधित हो रहे हैं। शिक्षकों के अनुभव प्रमाण- पत्र भी यहां नहीं बन पा रहे हैं।
शिक्षक संघ सौंप चुका ज्ञापन
डीईओ कार्यालय स्थापित करने की मांग को लेकर शिक्षक संघ शिक्षा विभाग अधिकारियों व प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुका है। जिला प्रतियोगिताएं चरखी दादरी में ही करवाए जाने की मांग कर चुका है लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। जिला स्तर पर होने वाली स्कूली खेल प्रतियोगिताएं भी नए जिले चरखी दादरी में नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में हजारों स्कूली छात्रों को पुराने जिला मुख्यालय पर ही खेलने के लिए जाना पड़ रहा है जिससे बच्चों व शिक्षकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
अलग से बजट भी शुरू नहीं
जिला शिक्षा विभाग का जिले के लिए अलग से बजट भी शुरू नहीं हो सका है जिससे विभाग की उन्नति से जुड़े कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। भिवानी को मिलने वाले बजट से ही काम चलाना पड़ रहा है जिससे कम बजट के अभाव में जिले में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की कल्पना संभव नहीं है। हालांकि इस समय भिवानी के पास ही डीईओ का चार्ज है।
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सरकार को चरखी दादरी में डीईओ का अलग से पद जल्द ही सृजित करना चाहिए। शिक्षकों और छात्रों के अभिभावकों को अपने कामकाज के लिए भिवानी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसे लेकर शिक्षक संघ अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंप चुका है। नए जिले का अलग से बजट भी पास होना चाहिए। जिला खेल स्पर्धाएं चरखी दादरी में ही होनी चाहिए। - संजय शास्त्री, जिला कार्यालय सचिव, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ
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सरकार को कई बार जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्टाफ व कार्यालय स्थापित करने को लेकर लिखा जा चुका है। सरकार के निर्देश पर ही विभाग अगला कदम उठा पाएगा। फिलहाल डीईओ का चार्ज उनके पास ही है। डीईओ सुरेश कुमार शर्मा, भिवानी