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संबंधों में कटुता का मूल कारण अहंकार: वसुधा
Updated Mon, 06 Nov 2017 02:14 AM IST
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संबंधों में कटुता का मूल कारण अहंकार: वसुधा
चरखी दादरी।
श्रेष्ठ जीवन बनाने के लिए श्रेष्ठ विचार जरूरी है वर्तमान समय संबंधों में कटुता का मूल कारण अहंकार है। इसलिए लोग एक-दूसरे के आगे झुकने को तैयार नहीं होते हैं। जीवन में हम सुख शांति से रहना चाहते हैं तो दूसरों की दुआएं लेना बहुत जरुरी है। यह उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की कादमा शाखा के तत्वावधान में झोझू कलां में आयोजित कार्यक्रम में सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी वसुधा ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि बुजुर्ग या अनुभवी व्यक्ति उस छायादार वृक्ष के समान है जिससे निरंतर शीतल छाया प्राप्त होती है। बुजुर्गों का सम्मान करना हमारे देश की महान परंपरा रही है । इसलिए हमें अपने बड़ों का आदर करना चाहिए तथा उनसे अनुभवों का लेन-देन करना चाहिए। ब्रह्माकुमारी ने कहा कि राजयोग स्वस्थ, निरोगी व सुखी रहने का पासपोर्ट है लेकिन इसके लिए हमें अतीत की बातें व व्यर्थ चिंतन को छोड़ना होगा क्योंकि व्यर्थ हमारी मानसिक शांति व आंतरिक शक्तियों को कमजोर करता है जबकि राजयोग के नियमित अभ्यास से व्यक्ति का मनोबल बढ़ता है। वसुधा ने ग्रामीणों को अपनी दिनचर्या में राजयोग को शामिल करने के लिए कहा जिससे दैनिक जीवन में आंतरिक शक्तियों व खुशी का संचार होगा तथा मूल्यों का समावेश होगा जिससे समाज भी शक्तिशाली सुदृढ़ बन बनेगा।
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चरखी दादरी।
श्रेष्ठ जीवन बनाने के लिए श्रेष्ठ विचार जरूरी है वर्तमान समय संबंधों में कटुता का मूल कारण अहंकार है। इसलिए लोग एक-दूसरे के आगे झुकने को तैयार नहीं होते हैं। जीवन में हम सुख शांति से रहना चाहते हैं तो दूसरों की दुआएं लेना बहुत जरुरी है। यह उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की कादमा शाखा के तत्वावधान में झोझू कलां में आयोजित कार्यक्रम में सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी वसुधा ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि बुजुर्ग या अनुभवी व्यक्ति उस छायादार वृक्ष के समान है जिससे निरंतर शीतल छाया प्राप्त होती है। बुजुर्गों का सम्मान करना हमारे देश की महान परंपरा रही है । इसलिए हमें अपने बड़ों का आदर करना चाहिए तथा उनसे अनुभवों का लेन-देन करना चाहिए। ब्रह्माकुमारी ने कहा कि राजयोग स्वस्थ, निरोगी व सुखी रहने का पासपोर्ट है लेकिन इसके लिए हमें अतीत की बातें व व्यर्थ चिंतन को छोड़ना होगा क्योंकि व्यर्थ हमारी मानसिक शांति व आंतरिक शक्तियों को कमजोर करता है जबकि राजयोग के नियमित अभ्यास से व्यक्ति का मनोबल बढ़ता है। वसुधा ने ग्रामीणों को अपनी दिनचर्या में राजयोग को शामिल करने के लिए कहा जिससे दैनिक जीवन में आंतरिक शक्तियों व खुशी का संचार होगा तथा मूल्यों का समावेश होगा जिससे समाज भी शक्तिशाली सुदृढ़ बन बनेगा।
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