{"_id":"5bd8b06dbdec2269b642a377","slug":"31540927597-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विकास कार्यों में धांधली बरतने पर सरपंच जितना ही दोषी माना जाएगा ग्राम सचिव: डीसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विकास कार्यों में धांधली बरतने पर सरपंच जितना ही दोषी माना जाएगा ग्राम सचिव: डीसी
Updated Wed, 31 Oct 2018 01:04 AM IST
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चरखी दादरी। ग्रामीण क्षेत्र में विकास कार्यों को निर्धारित मापदंडों और प्रदेश सरकार द्वारा जारी हिदायतों के अनुसार पूरा किया जाए। इनमें अनियमितता मिलने पर संबधित ग्राम सचिव और सरपंच को कानूनी व विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। धांधली बरतने पर जितना कसूर सरपंच का होगा उतना ही ग्राम सचिव का भी माना जाएगा। उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने मंगलवार को लघु सचिवालय के सभागार में जिले के ग्राम सचिव, पंचायती राज के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशाला को संबोधित किया।
विकास कार्यों को पूरा करवाने की प्रक्रिया समझाने के लिए आयोजित इस कार्यशाला में उपायुक्त ने कहा कि गांवों में ग्राम सभा का नियमित रूप से आयोजन किया जाए और उसमें प्रस्ताव पारित करवा कर प्रशासनिक स्वीकृति से विकास के काम करवाए जाएं। कोई भी कार्य शुरू करने से पहले उसकी नियमानुसार सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएं और उसके बाद सक्षम अधिकारी की स्वीकृति लेकर मानदंडों के अनुरूप काम करवाया जाए। तोमर ने कहा कि किसी भी कार्य के लिए सरपंच के साथ ग्राम सचिव भी उतना ही जिम्मेदार है। इसलिए पहले पूरी प्रक्रिया को समझें और उसका पालन कर काम को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि विकास कार्य में पारदर्शिता का ध्यान रखें और किसी भी स्तर पर नियमों से परे न जाएं। ग्राम सचिव अपने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी के निरंतर संपर्क में रहें और उनको प्रत्येक विकास कार्य की रिपोर्ट दें। एसडीएम ओमप्रकाश दंवराला ने कहा कि ग्राम पंचायतों के ऊपर ही गांव के विकास का उत्तरदायित्व होता है। गांव की दशा से ही हमारे देश का समुचित विकास होता है।
कार्यशाला में जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी विशाल चौधरी और पंचायती राज के कार्यकारी अभियंता युनूस खान ने भी अपने विचार रखे। खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी नरेंद्र मल्होत्रा ने सरकार के निर्देशों की कर्मचारियों को जानकारी दी। इस मौके पर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी जितेंद्र कुमार, देशबंधु, मंजीत फौगाट, पंचायती राज के एसडीओ अनूप देशवाल, कनिष्ठ अभियंता कृष्ण कुमार, बारूराम, सोमवीर, अजीत सिंह, अनिल कुमार मौजूद रहे।
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एक काम के नहीं बनेंगे अलग-अलग एस्टिमेट
कार्यशाला में अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि जून, 2017 में जारी की गई हिदायतों के अनुसार ग्राम पंचायतों को अब 20 लाख की राशि तक विकास के काम करवाने के अधिकार दे दिए हैं। इनकी राशि आरटीजीएस के माध्यम से सीधे पंचायतों के खातों में जमा होगी। पंचायती राज द्वारा विकास कार्यों के एस्टिमेट तैयार किए जाएंगे। एक कार्य के लिए एक ही एस्टिमेट बनेगा और अलग- अलग एस्टिमेट एक काम के नहीं बनेंगे।
निर्माण सामग्री की 24 वस्तुओं के रेट निर्धारित
उपायुक्त ने बताया कि आज जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक आयोजित कर निर्माण सामग्री एवं विकास कार्यों की 24 वस्तुओं के रेट निर्धारित कर दिए गए हैं। जल्दी ही लगभग 50 वस्तुओं के और रेट सुनिश्चित कर दिए जाएंगे। जिला स्तर पर निर्धारित दरों पर ही वस्तुओं की खरीद की जाए व भुगतान किया जाए। जिस कार्य या वस्तु के रेट कमेटी ने निश्चित नहीं किए हैं, उन्हें न करवाएं। उन्होंने कहा कि एक पखवाड़े के बाद ग्रामीण विकास कार्यों का निरीक्षण करने का अभियान चलाया जाएगा।
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विकास कार्यों को पूरा करवाने की प्रक्रिया समझाने के लिए आयोजित इस कार्यशाला में उपायुक्त ने कहा कि गांवों में ग्राम सभा का नियमित रूप से आयोजन किया जाए और उसमें प्रस्ताव पारित करवा कर प्रशासनिक स्वीकृति से विकास के काम करवाए जाएं। कोई भी कार्य शुरू करने से पहले उसकी नियमानुसार सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएं और उसके बाद सक्षम अधिकारी की स्वीकृति लेकर मानदंडों के अनुरूप काम करवाया जाए। तोमर ने कहा कि किसी भी कार्य के लिए सरपंच के साथ ग्राम सचिव भी उतना ही जिम्मेदार है। इसलिए पहले पूरी प्रक्रिया को समझें और उसका पालन कर काम को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि विकास कार्य में पारदर्शिता का ध्यान रखें और किसी भी स्तर पर नियमों से परे न जाएं। ग्राम सचिव अपने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी के निरंतर संपर्क में रहें और उनको प्रत्येक विकास कार्य की रिपोर्ट दें। एसडीएम ओमप्रकाश दंवराला ने कहा कि ग्राम पंचायतों के ऊपर ही गांव के विकास का उत्तरदायित्व होता है। गांव की दशा से ही हमारे देश का समुचित विकास होता है।
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कार्यशाला में जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी विशाल चौधरी और पंचायती राज के कार्यकारी अभियंता युनूस खान ने भी अपने विचार रखे। खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी नरेंद्र मल्होत्रा ने सरकार के निर्देशों की कर्मचारियों को जानकारी दी। इस मौके पर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी जितेंद्र कुमार, देशबंधु, मंजीत फौगाट, पंचायती राज के एसडीओ अनूप देशवाल, कनिष्ठ अभियंता कृष्ण कुमार, बारूराम, सोमवीर, अजीत सिंह, अनिल कुमार मौजूद रहे।
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एक काम के नहीं बनेंगे अलग-अलग एस्टिमेट
कार्यशाला में अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि जून, 2017 में जारी की गई हिदायतों के अनुसार ग्राम पंचायतों को अब 20 लाख की राशि तक विकास के काम करवाने के अधिकार दे दिए हैं। इनकी राशि आरटीजीएस के माध्यम से सीधे पंचायतों के खातों में जमा होगी। पंचायती राज द्वारा विकास कार्यों के एस्टिमेट तैयार किए जाएंगे। एक कार्य के लिए एक ही एस्टिमेट बनेगा और अलग- अलग एस्टिमेट एक काम के नहीं बनेंगे।
निर्माण सामग्री की 24 वस्तुओं के रेट निर्धारित
उपायुक्त ने बताया कि आज जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक आयोजित कर निर्माण सामग्री एवं विकास कार्यों की 24 वस्तुओं के रेट निर्धारित कर दिए गए हैं। जल्दी ही लगभग 50 वस्तुओं के और रेट सुनिश्चित कर दिए जाएंगे। जिला स्तर पर निर्धारित दरों पर ही वस्तुओं की खरीद की जाए व भुगतान किया जाए। जिस कार्य या वस्तु के रेट कमेटी ने निश्चित नहीं किए हैं, उन्हें न करवाएं। उन्होंने कहा कि एक पखवाड़े के बाद ग्रामीण विकास कार्यों का निरीक्षण करने का अभियान चलाया जाएगा।