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पैरोल पर आया कैदी बोला, बंदियों को परेशान करते हैं कमिश्नर
Updated Tue, 08 May 2018 01:36 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। दुलीना जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे एक कैदी ने बंदियों की परेशानी को लेकर सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में डाबौदा खुर्द निवासी कैदी जितेंद्र ने बताया है कि वह इस समय 14 दिन की पैरोल पर आया हुआ है। जितेंद्र के अनुसार बंदियों को छुट्टियों के लिए रोहतक रेंज के कमिश्नर कार्यालय के द्वारा परेशान किया जा रहा है। बंदियों के पैरोल के लिए गृह विभाग के द्वारा तय किया गया है कि पैरोल की अर्जी 36 दिन में पास कर दी जाएगी। लेकिन कई महीनों तक भी पैरोल के आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जाता। जितेंद्र ने आसौदा गांव निवासी एक बंदी जगदीश का उदाहरण देते हुए बताया कि उक्त बंदी ने 5 माह पूर्व अपने बेटे की शादी में शामिल होने के लिए आवेदन किया था लेकिन कमिश्नर कार्यालय की लचर प्रणाली के कारण वह बेटे की शादी में शामिल नहीं हो सका। कैदी जितेंद्र के अनुसार खेती के लिए कैदियों को 42 दिन की छुट्टी मिलती है लेकिन कमिश्नर कार्यालय उसे कम करके 25 दिन कर देता है। वहीं मकान मरम्मत के लिए कोई कैदी 287 दिन का पैरोल मांगता है तो उसे 15 दिन कर दिया जाता है। कई बार पैरोल खारिज कर दिया जाता है तो कुछ बंदी हाईकोर्ट चले जाते हैं, जहां से उन्हें राहत मिलती है। लेकिन बहुत कैदी व बंदी ऐसे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे कैदियों व बंदियों के बड़ी परेशानी कमिश्नर कार्यालय के द्वारा खड़ी की जा रही है। सीएम विंडो पर शिकायत के साथ जितेंद्र ने 55 बंदियों व कैदियों के हस्ताक्षर भी साथ भेजे हैं।
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झज्जर। दुलीना जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे एक कैदी ने बंदियों की परेशानी को लेकर सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में डाबौदा खुर्द निवासी कैदी जितेंद्र ने बताया है कि वह इस समय 14 दिन की पैरोल पर आया हुआ है। जितेंद्र के अनुसार बंदियों को छुट्टियों के लिए रोहतक रेंज के कमिश्नर कार्यालय के द्वारा परेशान किया जा रहा है। बंदियों के पैरोल के लिए गृह विभाग के द्वारा तय किया गया है कि पैरोल की अर्जी 36 दिन में पास कर दी जाएगी। लेकिन कई महीनों तक भी पैरोल के आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जाता। जितेंद्र ने आसौदा गांव निवासी एक बंदी जगदीश का उदाहरण देते हुए बताया कि उक्त बंदी ने 5 माह पूर्व अपने बेटे की शादी में शामिल होने के लिए आवेदन किया था लेकिन कमिश्नर कार्यालय की लचर प्रणाली के कारण वह बेटे की शादी में शामिल नहीं हो सका। कैदी जितेंद्र के अनुसार खेती के लिए कैदियों को 42 दिन की छुट्टी मिलती है लेकिन कमिश्नर कार्यालय उसे कम करके 25 दिन कर देता है। वहीं मकान मरम्मत के लिए कोई कैदी 287 दिन का पैरोल मांगता है तो उसे 15 दिन कर दिया जाता है। कई बार पैरोल खारिज कर दिया जाता है तो कुछ बंदी हाईकोर्ट चले जाते हैं, जहां से उन्हें राहत मिलती है। लेकिन बहुत कैदी व बंदी ऐसे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे कैदियों व बंदियों के बड़ी परेशानी कमिश्नर कार्यालय के द्वारा खड़ी की जा रही है। सीएम विंडो पर शिकायत के साथ जितेंद्र ने 55 बंदियों व कैदियों के हस्ताक्षर भी साथ भेजे हैं।