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दस दिन में सात लोगों को बंदरों ने काटा, सिविल में अस्पताल नहीं लगा रैबिज इंजेक्शन

Tue, 08 May 2018 01:16 AM IST
Updated Tue, 08 May 2018 01:16 AM IST
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दस दिन में सात लोगों को बंदरों ने काटा, सिविल में अस्पताल नहीं लगा रैबिज इंजेक्शन
दस दिन में सात लोगों को बंदरों ने काटा, सिविल में अस्पताल नहीं है रैबिज इंजेक्शन
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चरखी दादरी। बंदरों का झुंड आए दिन लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। वहीं, बंदरों के हमलों में घायल लोगों के उपचार के लिए सिविल अस्पताल में एंटी रैबिज इंजेक्शन तक नहीं हैं। बीते दस दिनों में रामदास नगर व काठमंडी क्षेत्र में बंदर चार महिलाओं सहित सात लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। इनमें से एक घायल को तो निजी अस्पताल से पीजीआई रेफर किया था। बंदर पकड़ो अभियान बंद होने व एंटी रैबिज के इंजेक्शन नहीं मिलने से लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ रही है। उल्लेखनीय है कि बंदर के काटने से घायल हुए व्यक्ति को एक माह के अंदर पांच इंजेक्शन लगते हैं और एक की कीमत करीब 300 रुपये है।
रामदास नगर व काठमंडी क्षेत्र में बंदरों के हमले से घायल हुई बुजुर्ग महिलाओं व बच्चों सहित अन्य को सिविल अस्पताल में एंटी रैबिज इंजेक्शन तक मुहैया नहीं लगा। इसके चलते उन्हें निजी अस्पतालों में जाकर महंगे दामों पर उपचार कराना पड़ा। इस समय सिविल अस्पताल के अलावा शहर में ही एंटी रैबिज इंजेक्शन की कमी है। एक मेडिकल स्टोर संचालक ने बताया कि शहर में करीब 100 मेडिकल स्टोर हैं और इनमें से गिने-चुनों को छोड़कर किसी के पास इस समय एंटी रैबिज इंजेक्शन नहीं हैं।
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उल्लेखनीय है कि करीब तीन माह पूर्व नगर परिषद को बंदर पकड़ो अभियान शुरू करने के लिए ठेकेदार मिला था। ठेकेदार को 500 बंदर पकड़ने का ठेका दिया गया था। इसके बाद ठेकेदार ने अभियान चलाकर शहर में बंदर भी पकड़े। अभियान धीमी गति से चलाना नप अधिकारियों को रास नहीं आया। इसे लेकर नगर परिषद अधिकारियों के साथ उसकी ठन गई। ठेकेदार का तर्क है कि शहर में करीब 350 बंदर पकड़े गए। वहीं, नप अधिकारियों का कहना है उसे करीब सवा लाख रुपये नगर परिषद की तरफ से दिए गए लेकिन बीच में ही वह अभियान को छोड़कर चला गया। करीब एक सप्ताह पहले आयोजित नगर परिषद की बैठक में भी यह मुद्दा पार्षदों ने जोर-शोर से उठाते हुए नए ठेकेदार का प्रबंध करने की मांग की थी। फिलहाल नगर परिषद अधिकारी ठेकेदार की तलाश में जुटे हुए हैं।
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मंदिर जाते समय बुजुर्ग महिला को काटा
रामदास नगर निवासी 60 वर्षीय कृष्णा देवी ने बताया कि वह घर से मंदिर जा रही थी और इसी दौरान बंदरों के झुंड ने उस पर हमला बोल दिया। उसके हाथ पर चार टांके आए और सिविल अस्पताल में उन्हें इंजेक्शन तक नहीं मिला। मजबूरी में निजी अस्पताल में जाकर उपचार कराना पड़ा।

छत पर नहा रहे बच्चे के गर्दन पर काटा
रामदास नगर निवासी 12 वर्षीय किशोर राहुल ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले वह स्कूल जाने के लिए छत पर नहा रहा था। इसी दौरान दो बंदर वहां आ गए। उनमें से एक बंदर ने उसकी गर्दन पर काट लिया, जिसके कारण खून भी बहने लगा। परिजनों उसे अस्पताल ले गए लेकिन इंजेक्शन नहीं मिला।

घर में घुसकर बुजुर्ग महिला को काटा
रामदास नगर निवासी 55 वर्षीय बुजुर्ग महिला संतोष देवी ने बताया कि वह घर के आंगन में काम कर रही थी, इसी दौरान बंदरों के झुंड ने घर में घुसकर हमला कर दिया। जिससे उसे आठ टांके आए हैं। उपाचर के लिए सिविल अस्पताल में गए लेकिन वहां एंटी रैबिज इंजेक्शन नहीं मिला और परिजन उसे निजी अस्पताल में ले गए।

बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रहे व्यक्ति पर रास्ते में बोला हमला
काठमंडी क्षेत्र निवासी 30 वर्षीय अजीत ने बताया कि चार दिन पहले वह बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रहा था। इसी दौरान बंदरों ने उस पर हमला बोल दिया। सिविल अस्पताल में गया तो वहां एंटी रैबिज इंजेक्शन नहीं मिला। इसके बाद निजी अस्पताल से उसे पीजीआई रेफर किया गया। उसे रविवार को ही उसे छुट्टी मिली है।

सामान लेकर लौट रही बुजुर्ग महिला को बनाया निशाना
रामदास नगर निवासी रामकलां देवी ने बताया कि गत मंगलवार को वह बाजार से सामान लेकर घर लौट रही थी। इसी दौरान बंदरों के झुंड ने उस पर हमला बोल दिया। महिला ने बताया कि एक बंदर ने उसके हाथ पर काट लिया। सिविल अस्पताल में इंजेक्शन नहीं मिलने पर परिजन उसे निजी अस्पताल ले गए।

छत पर टहल रही महिला के सिर में आई चोटें
रामदास नगर निवासी महिला संतोष अपनी छत पर टहल रही थी। इसी दौरान तीन-चार बंदरों का झुंड आया और उस पर हमला बोल दिया। बंदरों के हमले से महिला के सिर व हाथ-पैरों पर चोटें आई और परिजनों ने उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया। परिजनों ने बताया कि एंटी रैबिज इंजेक्शन के लिए उन्हें चक्कर काटने पड़े।

एक्सपर्ट व्यू: डिटाल लगाकर बहते पानी से तुरंत घाव करें साफ
सीएमओ एएस गुप्ता ने बताया कि बंदर या कुत्ते के काटने से रैबिज की संभावनाएं सबसे अधिक होती है। उन्होंने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को बंदर या कुत्ता काटता है तो तुरंत घाव को डिटोल साबुन लगाकर नल से बहते पानी में उसे साफ करें। इससे रैबिज की संभावनाएं 95 प्रतिशत खत्म हो जाती है।

एंटी रैबिज इंजेक्शन की हर जगह कमी चल रही है। हमने हेड ऑफिस डिमांड भेजी हुई है। जल्द से जल्द सिविल अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था कर एंटी रैबिज इंजेक्शन पहुंचा दिए जाएंगे।

- ए एस गुप्ता, सीएमओ

बंदर पकड़ो अभियान शुरू कराने के लिए हम ठेकेदार तलाश रहे हैं। जल्द ही शहर में दोबारा से अभियान शुरू कराया जाएगा। इस संबंध में शिकायतें भी लगातार मिल रही हैं।
- संजय छपारिया, चेयरमैन, नगर परिषद

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