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ग्रामीण परिवेश में पढ़े संदीप का चयन एडीए में हुआ
Updated Tue, 27 Jun 2017 01:23 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बादली (झज्जर)।
मेहनत और लगन से मुश्किल लक्ष्य को भी आसानी से हासिल किया जा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है क्षेत्र के छोटे से गांव जरदकपुर के संदीप कुमार मेहरा ने। संदीप कुमार ने अपनी पहली ही मेहनत में हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा उत्तीर्ण कर असिस्टेंट डिस्ट्रिक एटोरनी के पद नियुक्त होकर साबित कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश से अच्छी प्रतिभाएं निखर कर सामने आती है। संदीप की नियुक्ति पर गांव और परिवार में खुशी का माहौल बना है और घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा है।
ग्रामीण परिवेश में रहते हुए महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के लॉ डिपार्टमेंट से एलएलबी और एलएलएमए पास करने के बाद संदीप का लक्ष्य सिर्फ जज बनने का रहा। जिसके लिए संदीप ने कड़ी मेहनत की। भले ही अभी सपना अधूरा है मगर एसिस्टेंट डिस्ट्रिक एटोरनी(एडीए) पद पर नियुक्त होनेे के बाद संदीप का कहना है कि फिलहाल वह मेहनत से संतुष्ट है मगर उनकी असली मेहनत उसी दिन पूरी होगी जब वह जज बनकर लोगों को न्याय दिलाने का काम करेंगे। मन में कुछ कर दिखाने का जज्बे को ही मेहनत की कुंजी मानने वाले संदीप का कहना है कि वर्तमान समय में न्याय प्रक्रिया का धीमा होना चिंता का विषय है। एक सामान्य परिवार से निकले संदीप के पिता सतनारायण दिल्ली में अपनी गाड़ी चलाते है। उनकी सफलता पर निशांत, कृष्ण और एडवोकेट सुमन मेहरा सहित काफी संख्या मे ग्रामीणों ने गांव में स्वागत किया।
- जज बनने का सपना रखते है संदीप मेहरा
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बादली (झज्जर)।
मेहनत और लगन से मुश्किल लक्ष्य को भी आसानी से हासिल किया जा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है क्षेत्र के छोटे से गांव जरदकपुर के संदीप कुमार मेहरा ने। संदीप कुमार ने अपनी पहली ही मेहनत में हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा उत्तीर्ण कर असिस्टेंट डिस्ट्रिक एटोरनी के पद नियुक्त होकर साबित कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश से अच्छी प्रतिभाएं निखर कर सामने आती है। संदीप की नियुक्ति पर गांव और परिवार में खुशी का माहौल बना है और घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा है।
ग्रामीण परिवेश में रहते हुए महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के लॉ डिपार्टमेंट से एलएलबी और एलएलएमए पास करने के बाद संदीप का लक्ष्य सिर्फ जज बनने का रहा। जिसके लिए संदीप ने कड़ी मेहनत की। भले ही अभी सपना अधूरा है मगर एसिस्टेंट डिस्ट्रिक एटोरनी(एडीए) पद पर नियुक्त होनेे के बाद संदीप का कहना है कि फिलहाल वह मेहनत से संतुष्ट है मगर उनकी असली मेहनत उसी दिन पूरी होगी जब वह जज बनकर लोगों को न्याय दिलाने का काम करेंगे। मन में कुछ कर दिखाने का जज्बे को ही मेहनत की कुंजी मानने वाले संदीप का कहना है कि वर्तमान समय में न्याय प्रक्रिया का धीमा होना चिंता का विषय है। एक सामान्य परिवार से निकले संदीप के पिता सतनारायण दिल्ली में अपनी गाड़ी चलाते है। उनकी सफलता पर निशांत, कृष्ण और एडवोकेट सुमन मेहरा सहित काफी संख्या मे ग्रामीणों ने गांव में स्वागत किया।
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- जज बनने का सपना रखते है संदीप मेहरा