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29 जनवरी को आए थे 1200 एंटी रैबीज इंजेक्शन, 26 फरवरी को हुए खत्म तो खरीदने को मजबूर लोग
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। कुत्ता, बंदर या अन्य जीव के काटने पर लगाए जाने वाले एंटी रैबीज के इंजेक्शन खत्म होने के कारण मरीजों को सामान्य अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। लेकिन डिमांड भेजे जाने के बावजूद भी वेयर हाउस में एंटी रैबीज के टीके नहीं आए हैं। बताया जा रहा है कि विभाग के मुख्यालय से ही एआरवी के इंजेक्शन नहीं खरीदे
गए हैं। इसके कारण वेयर हाउसों में भी एंटी रैबीज के इंजेक्शन नहीं पहुंच पाए हैं। जबकि विभाग के पास इंजेक्शन खरीदने की पावर तो है, लेकिन बजट न होने के कारण विभाग इंजेक्शन नहीं खरीद पा रहा है। सूत्रों का कहना है कि विभाग के अधिकारी इंजेक्शन व अन्य टेस्टों के लिए काटी जाने वाली रसीद की राशि से दवाईयां खरीदने की बजाए पार्किंग आदि के लिए शेड तैयार करवाए जा रहे हैं और अन्य मदों पर राशि खर्च की जा रही है। जबकि मरीज इंजेक्शन के लिए भटक रहे हैं। लोगों को बाजार से 300 से 400 रुपये प्रति इंजेक्शन खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
खरीदकर लगवा रहे इंजेक्शन
कुत्ते या बंदर के काटने के बाद एक मरीज को इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। एक इंजेक्शन के लिए सरकारी अस्पताल में 100 रुपये की पर्ची काटी जाती है। लेकिन बाजार से अगर मरीज को इंजेक्शन खरीद कर लाना पड़े तो उसे 300 से 400 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। हर रोज सामान्य अस्पताल में 50 से 60 मरीज इंजेक्शन लगवाने के लिए आते हैं। विभाग की ओर से मरीजों को बेरी के अस्पताल में टीके लगवाने की बात भी कही जा रही है। क्योंकि बेरी के सामान्य अस्पताल में कुछ इंजेक्शन बचे होने की बात विभाग के अधिकारी कह रहे हैं।
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एक माह की डिमांड होती है 1200
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक माह की डिमांट 1200 होती है। ऐसे में 29 जनवरी को एआरवी के 1200 इंजेक्शन झज्जर आए थे। ये इंजेक्शन एक माह भी नहीं चले और 26 फरवरी को ही खत्म हो गए थे। विभाग की ओर से इंजेक्शन खत्म होने से पहले ही वेयर हाउस को डिमांड भेज दी गई थी। लेकिन उसके बाद से आज तक इंजेक्शन नहीं आए हैं। फरवरी के बाद मार्च की डिमांड भी वेयर हाउस को भेजी जा चुकी है। उसके बावजूद वेयर हाउस में टीके नहीं पहुंच पाए हैं। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
विभाग की ओर से वेयर हाउस को डिमांड भेजी गई थी। लेकिन अभी तक वहां से सप्लाई नहीं आई है। बेरी के सामान्य अस्पताल में इंजेक्शन बचे हुए हैं। वहां से टीके सरकारी दर पर लगवाए जा सकते हैं।
डॉ. संजय सचदेवा, एसएमओ, सामान्य अस्पताल, झज्जर।
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झज्जर। कुत्ता, बंदर या अन्य जीव के काटने पर लगाए जाने वाले एंटी रैबीज के इंजेक्शन खत्म होने के कारण मरीजों को सामान्य अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। लेकिन डिमांड भेजे जाने के बावजूद भी वेयर हाउस में एंटी रैबीज के टीके नहीं आए हैं। बताया जा रहा है कि विभाग के मुख्यालय से ही एआरवी के इंजेक्शन नहीं खरीदे
गए हैं। इसके कारण वेयर हाउसों में भी एंटी रैबीज के इंजेक्शन नहीं पहुंच पाए हैं। जबकि विभाग के पास इंजेक्शन खरीदने की पावर तो है, लेकिन बजट न होने के कारण विभाग इंजेक्शन नहीं खरीद पा रहा है। सूत्रों का कहना है कि विभाग के अधिकारी इंजेक्शन व अन्य टेस्टों के लिए काटी जाने वाली रसीद की राशि से दवाईयां खरीदने की बजाए पार्किंग आदि के लिए शेड तैयार करवाए जा रहे हैं और अन्य मदों पर राशि खर्च की जा रही है। जबकि मरीज इंजेक्शन के लिए भटक रहे हैं। लोगों को बाजार से 300 से 400 रुपये प्रति इंजेक्शन खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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खरीदकर लगवा रहे इंजेक्शन
कुत्ते या बंदर के काटने के बाद एक मरीज को इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। एक इंजेक्शन के लिए सरकारी अस्पताल में 100 रुपये की पर्ची काटी जाती है। लेकिन बाजार से अगर मरीज को इंजेक्शन खरीद कर लाना पड़े तो उसे 300 से 400 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। हर रोज सामान्य अस्पताल में 50 से 60 मरीज इंजेक्शन लगवाने के लिए आते हैं। विभाग की ओर से मरीजों को बेरी के अस्पताल में टीके लगवाने की बात भी कही जा रही है। क्योंकि बेरी के सामान्य अस्पताल में कुछ इंजेक्शन बचे होने की बात विभाग के अधिकारी कह रहे हैं।
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एक माह की डिमांड होती है 1200
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक माह की डिमांट 1200 होती है। ऐसे में 29 जनवरी को एआरवी के 1200 इंजेक्शन झज्जर आए थे। ये इंजेक्शन एक माह भी नहीं चले और 26 फरवरी को ही खत्म हो गए थे। विभाग की ओर से इंजेक्शन खत्म होने से पहले ही वेयर हाउस को डिमांड भेज दी गई थी। लेकिन उसके बाद से आज तक इंजेक्शन नहीं आए हैं। फरवरी के बाद मार्च की डिमांड भी वेयर हाउस को भेजी जा चुकी है। उसके बावजूद वेयर हाउस में टीके नहीं पहुंच पाए हैं। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
विभाग की ओर से वेयर हाउस को डिमांड भेजी गई थी। लेकिन अभी तक वहां से सप्लाई नहीं आई है। बेरी के सामान्य अस्पताल में इंजेक्शन बचे हुए हैं। वहां से टीके सरकारी दर पर लगवाए जा सकते हैं।
डॉ. संजय सचदेवा, एसएमओ, सामान्य अस्पताल, झज्जर।