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आठ माह से खेल नर्सरियों में नहीं पहुंची 34 लाख की डाइट मनी, खुराक के लिए परिजनों पर ही निर्भर खिलाड़ी
Updated Mon, 03 Dec 2018 12:59 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। सरकार के आदेशों पर जिले में शुरू की गई खेल नर्सरियों में खिलाड़ियों को दावों के मुताबिक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। प्रदेश सरकार ने जिले की 13 नर्सरियों के खिलाड़ियों को आठ माह से डाइट मनी नहीं दी है। उनके करीब 34 लाख रुपये सरकार की तरफ पेंडिंग हैं। इस संबंध में कई माह पहले ही फाइल सरकार के पास भेजी गई थी लेकिन अब तक बजट जारी नहीं किया गया है। इसके चलते जिले की 13 खेल नर्सरियों में अभ्यास कर रहे युवा अपनी खुराक के लिए परिजनों पर ही निर्भर हैं। सूत्र बताते हैं कि कुछ के परिजनों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। इसके चलते खिलाड़ियों को पर्याप्त खुराक नहीं मिल पा रही। डाइट चार्ट के मुताबिक आहार नहीं लेने से सीधे तौर पर इसका असर खिलाड़ी के प्रदर्शन और मनोबल पर भी पड़ता है।
सरकार ने जिला में खेल नर्सरियां तो शुरू करवा दी लेकिन इनमें अभ्यासरत खिलाड़ियों को आठ माह से डाइट मनी और अन्य भत्ता नहीं मिला है। सरकार खिलाड़ियों को सभी प्रकार की खेल सुविधाएं मुहैया की बात तो करती है जबकि वास्तविक स्थिति बिल्कुल उलट है। इतना ही नहीं इन नर्सरियों में प्रशिक्षण दे रहे कोच को भी नियुक्ति के बाद से वेतन नहीं मिला है। खिलाड़ियों को आयुवर्ग के मुताबिक 1500 और 2000 रुपये डाइट भत्ता मिलता है। खेल विभाग के निर्देश पर जिले में इस साल की शुरुआत में खेल नर्सरियां खोली गई थी। यहां 20 खेल नर्सरियां खोले जाने की प्लानिंग थी लेकिन कुछ व्यवस्था व सुविधाओं के अभाव के चलते 13 खेल नर्सरी ही ठीक प्रकार से शुरू हो पाई। इन नर्सरियों में कोच भी तैनात कर रखे हैं। यह नर्सरियां ज्यादातर स्कूलों में ही शुरू करवाई गई थी क्योंकि अन्य स्थानों पर खेल सुविधाएं नहीं होने की वजह से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने में कठिनाई होना स्वाभाविक था। कुछ प्राइवेट स्कूलों में भी यह खेल नर्सरियां खोल रखी है। इसके अलावा जहां कोच व अन्य खेल सुविधाओं की व्यवस्था है, वहां भी खेल नर्सरियां चल रही हैं। इन नर्सरियों में खिलाड़ियों को विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिले में एथलीट, कबड्डी, वॉलीबाल, कुश्ती, कराटे, पिस्टल स्पर्धा, खो-खो व क्रिकेट खिलाड़ियों की कमी नहीं है। इन नर्सरियों में कोच के जरिए नई तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
शुरू से ही नहीं मिला है डाइट भत्ता
आठ से 14 आयुवर्ग के खिलाड़ियों को सरकार की तरफ से प्रति माह 1500 रुपये डाइट मनी मिलता है। इसी प्रकार 15 से 19 आयुवर्ग के खिलाड़ियों को 2000 रुपये प्रति माह डाइट भत्ता दिया जाता है। इस समय जिले की 13 खेल नर्सरियों में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रत्येक नर्सरी में 25 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था होती है जबकि इस समय इन नर्सरियों में खिलाड़ियों की संख्या कम बनी हुई है। खिलाड़ियों को भत्ता व सभी प्रकार की सुविधाएं नहीं मिलने से दूर- दराज के खिलाड़ियों को काफी आर्थिक कठिनाई हो रही है। कई खिलाड़ी बीच में ही प्रशिक्षण छोड़ने को विवश हो जाते हैं।
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खिलाड़ियों के 34 तो कोचों के भी 15 लाख अटके
जिले के कई कोच और खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें फरवरी माह से अब तक एक पैसा भी नहीं मिला है जबकि विभाग अधिकारी अप्रैल माह से यह भत्ता व वेतन बकाया होने की बात स्वीकारते हैं। अगर खेल विभाग अधिकारियों की मानें तो इन खिलाड़ियों के करीब 34 लाख रुपये डाइट के अप्रैल माह से पेंडिंग चले आ रहे हैं। इसी प्रकार कोच के वेतन के रूप में करीब 15 लाख से ज्यादा बकाया चला रहा है। ऐसे में खिलाड़ियों व कोच का खेलों से मनोबल टूटने लगा है। नाम न छापने की शर्त पर एक कोच ने बताया कि जब यह खेल नर्सरियां शुरू हुई है तब से उन्हें वेतन का एक पैसा नहीं मिला है।
कोट
इन खिलाड़ियों और कोच की राशि का भुगतान करने संबंधी बिल फाइल हेड ऑफिस भेज रखी है। जल्दी ही कुछ दिनों में इन खिलाड़ियों को डाइट मनी व कोच का वेतन आवंटित कर दिया जाएगा। - सतपाल ढांडा, जिला खेल अधिकारी, चरखी दादरी।
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चरखी दादरी। सरकार के आदेशों पर जिले में शुरू की गई खेल नर्सरियों में खिलाड़ियों को दावों के मुताबिक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। प्रदेश सरकार ने जिले की 13 नर्सरियों के खिलाड़ियों को आठ माह से डाइट मनी नहीं दी है। उनके करीब 34 लाख रुपये सरकार की तरफ पेंडिंग हैं। इस संबंध में कई माह पहले ही फाइल सरकार के पास भेजी गई थी लेकिन अब तक बजट जारी नहीं किया गया है। इसके चलते जिले की 13 खेल नर्सरियों में अभ्यास कर रहे युवा अपनी खुराक के लिए परिजनों पर ही निर्भर हैं। सूत्र बताते हैं कि कुछ के परिजनों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। इसके चलते खिलाड़ियों को पर्याप्त खुराक नहीं मिल पा रही। डाइट चार्ट के मुताबिक आहार नहीं लेने से सीधे तौर पर इसका असर खिलाड़ी के प्रदर्शन और मनोबल पर भी पड़ता है।
सरकार ने जिला में खेल नर्सरियां तो शुरू करवा दी लेकिन इनमें अभ्यासरत खिलाड़ियों को आठ माह से डाइट मनी और अन्य भत्ता नहीं मिला है। सरकार खिलाड़ियों को सभी प्रकार की खेल सुविधाएं मुहैया की बात तो करती है जबकि वास्तविक स्थिति बिल्कुल उलट है। इतना ही नहीं इन नर्सरियों में प्रशिक्षण दे रहे कोच को भी नियुक्ति के बाद से वेतन नहीं मिला है। खिलाड़ियों को आयुवर्ग के मुताबिक 1500 और 2000 रुपये डाइट भत्ता मिलता है। खेल विभाग के निर्देश पर जिले में इस साल की शुरुआत में खेल नर्सरियां खोली गई थी। यहां 20 खेल नर्सरियां खोले जाने की प्लानिंग थी लेकिन कुछ व्यवस्था व सुविधाओं के अभाव के चलते 13 खेल नर्सरी ही ठीक प्रकार से शुरू हो पाई। इन नर्सरियों में कोच भी तैनात कर रखे हैं। यह नर्सरियां ज्यादातर स्कूलों में ही शुरू करवाई गई थी क्योंकि अन्य स्थानों पर खेल सुविधाएं नहीं होने की वजह से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने में कठिनाई होना स्वाभाविक था। कुछ प्राइवेट स्कूलों में भी यह खेल नर्सरियां खोल रखी है। इसके अलावा जहां कोच व अन्य खेल सुविधाओं की व्यवस्था है, वहां भी खेल नर्सरियां चल रही हैं। इन नर्सरियों में खिलाड़ियों को विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिले में एथलीट, कबड्डी, वॉलीबाल, कुश्ती, कराटे, पिस्टल स्पर्धा, खो-खो व क्रिकेट खिलाड़ियों की कमी नहीं है। इन नर्सरियों में कोच के जरिए नई तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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शुरू से ही नहीं मिला है डाइट भत्ता
आठ से 14 आयुवर्ग के खिलाड़ियों को सरकार की तरफ से प्रति माह 1500 रुपये डाइट मनी मिलता है। इसी प्रकार 15 से 19 आयुवर्ग के खिलाड़ियों को 2000 रुपये प्रति माह डाइट भत्ता दिया जाता है। इस समय जिले की 13 खेल नर्सरियों में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रत्येक नर्सरी में 25 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था होती है जबकि इस समय इन नर्सरियों में खिलाड़ियों की संख्या कम बनी हुई है। खिलाड़ियों को भत्ता व सभी प्रकार की सुविधाएं नहीं मिलने से दूर- दराज के खिलाड़ियों को काफी आर्थिक कठिनाई हो रही है। कई खिलाड़ी बीच में ही प्रशिक्षण छोड़ने को विवश हो जाते हैं।
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खिलाड़ियों के 34 तो कोचों के भी 15 लाख अटके
जिले के कई कोच और खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें फरवरी माह से अब तक एक पैसा भी नहीं मिला है जबकि विभाग अधिकारी अप्रैल माह से यह भत्ता व वेतन बकाया होने की बात स्वीकारते हैं। अगर खेल विभाग अधिकारियों की मानें तो इन खिलाड़ियों के करीब 34 लाख रुपये डाइट के अप्रैल माह से पेंडिंग चले आ रहे हैं। इसी प्रकार कोच के वेतन के रूप में करीब 15 लाख से ज्यादा बकाया चला रहा है। ऐसे में खिलाड़ियों व कोच का खेलों से मनोबल टूटने लगा है। नाम न छापने की शर्त पर एक कोच ने बताया कि जब यह खेल नर्सरियां शुरू हुई है तब से उन्हें वेतन का एक पैसा नहीं मिला है।
कोट
इन खिलाड़ियों और कोच की राशि का भुगतान करने संबंधी बिल फाइल हेड ऑफिस भेज रखी है। जल्दी ही कुछ दिनों में इन खिलाड़ियों को डाइट मनी व कोच का वेतन आवंटित कर दिया जाएगा। - सतपाल ढांडा, जिला खेल अधिकारी, चरखी दादरी।