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पशुओं पर गर्मी की मार, तेजी से घट रहा है दूध उत्पादन
Updated Tue, 05 Jun 2018 01:32 AM IST
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पशुओं पर गर्मी की मार, तेजी से घट रहा है दूध उत्पादन
अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी का असर इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशुओं पर भी कम नहीं पड़ रहा। गर्मी के कारण पशुओं खासकर गाय-भैंसों की दूध उत्पादन की क्षमता घट गई है। इससे पशुपालकों को तो घाटा हो ही रहा है, साथ ही लोगों को दूध मिलने में भी दिक्कत आ रही है। पशुओं की दुग्ध उत्पाद क्षमता पर 25 से 50 फीसदी तक असर पड़ा है।
इस बार गर्मी का पशुओं पर भी जबरदस्त असर पड़ रहा है। दुधारू पशुओं में भैंसों व गायों का दूध कम हो गया है। डेरी संचालक ललित ने बताया कि उनकी डेरी में ज्यादातर भैंसों का यही आलम हैैै। जो भैंस एक समय में 12 किलोग्राम दूध देती थी, अब गर्मी की वजह से वह घट कर 9 से 6 किलो तक आ गई है। इसके अलावा दूध की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है।
पशुपालक भैंसों को गर्मी से बचाने की कोशिश भी काफी कर रहे हैैं लेकिन इसके बावजूद भैंस दूध से गिरती जा रही हैं। डेरी संचालक सोनू ने बताया कि उनकी डेरी में हरेक भैंस को दिन में कम से कम चार बार ठंडे पानी से तसल्ली के साथ नहलाया जाता है। जौं का आटा और जौं का दाना आदि खुराक भी इस तरह की दी जाती है कि पशु को गर्मी से कुछ राहत मिल सके। गर्मी के कारण दूध का उत्पादन लगातार घट रहा है। उत्पादन कम होने से दूध महंगा हो गया है। डेरी में मार्च के अंत तक जो दूध 55 रुपये किलो के आसपास था, वह अब 60 रुपये किलो तक पहुंच गया है। दूध के घरेलू उत्पादन में कमी आई है, इसलिए मदर डेयरी के दूध और अमूल दूध की भारी बिक्री हो रही है। इनके रेट भी समय समय पर बढ़ते रहते हैं।
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क्या कहते हैं डाक्टर
भीषण गर्मी पड़ रही है। पशुओं को किसी भी तरह गर्मी से बचाना जरूरी है। अन्यथा पशु बीमार हो सकते हैं। वे गलघोंटू जैसी बीमारी के शिकार हो सकते हैं। इसलिए पशुओं को सरकारी अस्पताल से संपर्क कर गलघोंटू का टीका जरूर लगवाना चाहिए। खासतौर से गाय-भैंस ज्यादा गर्मी को सहन नहीं कर सकते। पशुओं को हर रोज कम से कम चार-पांच बार नहलाना चाहिए। छाया में रखना चाहिए और रूम कूलर लगा दें तो बेहतर है।
-डा. अनिल कुमार, पशु चिकित्सक
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी का असर इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशुओं पर भी कम नहीं पड़ रहा। गर्मी के कारण पशुओं खासकर गाय-भैंसों की दूध उत्पादन की क्षमता घट गई है। इससे पशुपालकों को तो घाटा हो ही रहा है, साथ ही लोगों को दूध मिलने में भी दिक्कत आ रही है। पशुओं की दुग्ध उत्पाद क्षमता पर 25 से 50 फीसदी तक असर पड़ा है।
इस बार गर्मी का पशुओं पर भी जबरदस्त असर पड़ रहा है। दुधारू पशुओं में भैंसों व गायों का दूध कम हो गया है। डेरी संचालक ललित ने बताया कि उनकी डेरी में ज्यादातर भैंसों का यही आलम हैैै। जो भैंस एक समय में 12 किलोग्राम दूध देती थी, अब गर्मी की वजह से वह घट कर 9 से 6 किलो तक आ गई है। इसके अलावा दूध की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है।
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पशुपालक भैंसों को गर्मी से बचाने की कोशिश भी काफी कर रहे हैैं लेकिन इसके बावजूद भैंस दूध से गिरती जा रही हैं। डेरी संचालक सोनू ने बताया कि उनकी डेरी में हरेक भैंस को दिन में कम से कम चार बार ठंडे पानी से तसल्ली के साथ नहलाया जाता है। जौं का आटा और जौं का दाना आदि खुराक भी इस तरह की दी जाती है कि पशु को गर्मी से कुछ राहत मिल सके। गर्मी के कारण दूध का उत्पादन लगातार घट रहा है। उत्पादन कम होने से दूध महंगा हो गया है। डेरी में मार्च के अंत तक जो दूध 55 रुपये किलो के आसपास था, वह अब 60 रुपये किलो तक पहुंच गया है। दूध के घरेलू उत्पादन में कमी आई है, इसलिए मदर डेयरी के दूध और अमूल दूध की भारी बिक्री हो रही है। इनके रेट भी समय समय पर बढ़ते रहते हैं।
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क्या कहते हैं डाक्टर
भीषण गर्मी पड़ रही है। पशुओं को किसी भी तरह गर्मी से बचाना जरूरी है। अन्यथा पशु बीमार हो सकते हैं। वे गलघोंटू जैसी बीमारी के शिकार हो सकते हैं। इसलिए पशुओं को सरकारी अस्पताल से संपर्क कर गलघोंटू का टीका जरूर लगवाना चाहिए। खासतौर से गाय-भैंस ज्यादा गर्मी को सहन नहीं कर सकते। पशुओं को हर रोज कम से कम चार-पांच बार नहलाना चाहिए। छाया में रखना चाहिए और रूम कूलर लगा दें तो बेहतर है।
-डा. अनिल कुमार, पशु चिकित्सक
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