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एनएच- 152 डी के लिए अधिग्रहित जमीन का 14 गांवों के किसानों ने मांगा दो करोड़ प्रति एकड़ मुआवजा

Sat, 23 Feb 2019 01:14 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 23 Feb 2019 01:14 AM IST
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एनएच- 152 डी के लिए अधिग्रहित जमीन का 14 गांवों के किसानों ने मांगा दो करोड़ प्रति एकड़ मुआवजा
अमर उजाला ब्यूरो
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चरखी दादरी। इस्माईलाबाद-गंगेहड़ी-नारनौल राष्ट्रीय राजमार्ग 152- डी के लिए अधिगृहीत जमीन का 14 गांवों के किसानों ने दो करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग सरकार से की है। किसानों ने शुक्रवार को प्रदर्शन कर तहसीलदार को मांगपत्र भी सौंपा। जमीन के नए कलेक्टर रेट लागू होने तक निर्माण कार्य से संबंधी आगामी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है। किसानों ने चेतावनी देकर कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वो जल्द धरना शुरू कर देंगे। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा है। प्रदर्शन की रूपरेखा शुक्रवार सुबह नई अनाज मंडी में आयोजित बैठक में तय की गई।

शुक्रवार सुबह गांव चिडिय़ा, दातौली, मकड़ानी, मकड़ाना, बलकरा, मौड़ी, कपूरी, टिकाण कलां, ढाणी फौगाट, समसपुर, खातीवास, झींझर,सांजरवास, रानीला और भागेश्वरी के ग्रामीण नई अनाज मंडी में एकत्र हुए। यहां करीब डेढ़ घंटे तक बैठक चली और इसे विभिन्न गांवों के मौजिज लोगों ने संबोधित किया। इसके बाद बैठक में उपस्थित ग्रामीण प्रदर्शन कर लघु सचिवालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 152- डी निर्माण के लिए किसानों की जमीन अधिगृहीत करने के लिए जो मुआवजा राशि तय की जा रही है वो पुराने कलेक्टर रेट के हिसाब से है। उन्होंने कहा कि 20 साल पहले तय किए गए एरिया कलेक्टर रेट में न के बराबर बढ़ोतरी हुई है और इससे किसानों को मोटा नुकसान झेलना पड़ेगा। यह किसानों को कतई मंजूर नहीं है। इन लोगों ने कहा कि सरकार उनकी उपजाऊ जमीन को औने-पौने दामों में खरीद कर उनकी रोजी-रोटी छीन रही है जिसे वे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। इन किसानों ने कहा कि इस बारे में वे डीआरओ और अन्य अधिकारियों से भी मिल चुके हैं लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने ज्ञापन बताया कि उनकी सरकार से मांग है कि जब तक पुराने थ्री- जी अवार्ड की समीक्षा कर नए रेट तय नहीं होते तब तक राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की आगामी कार्रवाई रोकी जाए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार किसानों की मांग पूरी नहीं करती है तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। किसान शहर में प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर काफी तादाद में ग्रामीण मौजूद थे।
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