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00 से अधिक विद्यार्थियों के काटे नाम, कॉलेज में विद्यार्थियों ने किया हंगामा
Updated Fri, 16 Nov 2018 02:27 AM IST
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झज्जर। शहर के राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय में विद्यार्थियों की हाजिरी कम होने के कारण 200 से अधिक विद्यार्थियों के नाम काट दिए गए हैं। जबकि काफी विद्यार्थियों की हाजरी भी नाम लिखे जाने के बाद भी 65 फीसद नहीं बनी है। ऐसी स्थिति में वे विभाग के नियमानुसार परीक्षा नहीं दे सकते हैं। इसे लेकर विद्यार्थियों ने कॉलेज में हंगामा किया और कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी भी की। विद्यार्थियों का आरोप है कि परीक्षा का समय नजदीक है और कॉलेज प्रशासन की तरफ से उनके नाम काट दिए गए हैं।
बच्चों के भविष्य के खिलाफ खिलवाड़ किया जा रहा है। वे अपने भविष्य के लिए शिक्षा ग्रहण करने के लिए कॉलेज में आ रहे हैं। कॉलेज प्रंबधन की तरफ से इन बच्चों से मिलने आए प्राध्यापकों ने कहा कि वे अगस्त में हाजरी कम होने पर उनके नाम काटे गए थे। उस समय दोबारा नाम लिखवाने के लिए नियमानुसार 15 दिन का समय दिया गया था। अब नवंबर में नाम कैसे लिखें और जब कॉलेज आए ही नहीं तो हाजिरी पूरी कैसे होगी। अगस्त में जब बच्चों के नाम काटे गए उस समय काफी विद्यार्थी अपने नाम भी लिखवा गए थे। लेकिन उसके बाद भी वे कॉलेज नहीं आए तो उनकी हाजिरी भी कम हो गई। बच्चों ने यह भी कहा कि पिछले दिनों काफी विद्यार्थियों के नाम एक-एक हजार रुपये लेकर लिखे गए हैं। उन्हें भी एक मौका और दिया जाए। लेकिन कॉलेज प्रबंधन नियमों की दुहाई दे रहा है। विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान प्राध्यापकों का कोई अवकाश नहीं था। लेकिन प्राध्यापक कॉलेज नहीं आए और अगले दिन आकर हाजिरी पूरी की थी। तो बच्चों की हाजिरी पूरी क्यों नहीं की जा रही है।
ये बोले अनुशासन समिति अध्यक्ष
अगस्त के अंत में काफी विद्यार्थियों के नाम काट दिए गए थे। कुछ ने तो 15 दिन में ही अपने नाम लिखवा लिये थे। लेकिन कुछ विद्यार्थी अब अपना नाम लिखवाने के लिए आ रहे हैं। अब नियमानुसार न तो ये परीक्षा दे सकते हैं और न ही इनके नाम लिखे जा सकते हैं। वैसे तो नियम 75 फीसद हाजिरी होनी चाहिए। लेकिन दस फीसद हाजिरी की पावर प्राचार्य के पास होती है। उसके बाद 65 फीसद हाजिरी होनी चाहिए। उसके बाद भी इन विद्यार्थियों के लेक्चर शॉर्ट हैं। इन बच्चों के लिए नोटिस भी लगाए गए थे। उनके घर पर पत्र भी लिखेे गए थे। ताकि उने अभिभावकों को स्थिति का पता लग सके। लेकिन उसके बाद भी उनके अभिभावक या विद्यार्थी कॉलेज में नहीं आए।
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डॉ. जगदीश राहड़, संयोजक कॉलेज अनुशासन समिति।
हाजिरी कम होने के कारण 200 से अधिक विद्यार्थियों के नाम काटे गए थे। कुछ के नाम लिखे जाने के बाद भी वे कॉलेज में नहीं आए। नियमानुसार लगातार एक सप्ताह तक विद्यार्थी शिक्षण संस्थान में नहीं आता है तो उसका नाम काट दिया जाता है।
- डॉ. अमित भारद्वाज, मीडिया प्रभारी, नेहरू कॉलेज, झज्जर।
बच्चों के भविष्य के खिलाफ खिलवाड़ किया जा रहा है। वे अपने भविष्य के लिए शिक्षा ग्रहण करने के लिए कॉलेज में आ रहे हैं। कॉलेज प्रंबधन की तरफ से इन बच्चों से मिलने आए प्राध्यापकों ने कहा कि वे अगस्त में हाजरी कम होने पर उनके नाम काटे गए थे। उस समय दोबारा नाम लिखवाने के लिए नियमानुसार 15 दिन का समय दिया गया था। अब नवंबर में नाम कैसे लिखें और जब कॉलेज आए ही नहीं तो हाजिरी पूरी कैसे होगी। अगस्त में जब बच्चों के नाम काटे गए उस समय काफी विद्यार्थी अपने नाम भी लिखवा गए थे। लेकिन उसके बाद भी वे कॉलेज नहीं आए तो उनकी हाजिरी भी कम हो गई। बच्चों ने यह भी कहा कि पिछले दिनों काफी विद्यार्थियों के नाम एक-एक हजार रुपये लेकर लिखे गए हैं। उन्हें भी एक मौका और दिया जाए। लेकिन कॉलेज प्रबंधन नियमों की दुहाई दे रहा है। विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान प्राध्यापकों का कोई अवकाश नहीं था। लेकिन प्राध्यापक कॉलेज नहीं आए और अगले दिन आकर हाजिरी पूरी की थी। तो बच्चों की हाजिरी पूरी क्यों नहीं की जा रही है।
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ये बोले अनुशासन समिति अध्यक्ष
अगस्त के अंत में काफी विद्यार्थियों के नाम काट दिए गए थे। कुछ ने तो 15 दिन में ही अपने नाम लिखवा लिये थे। लेकिन कुछ विद्यार्थी अब अपना नाम लिखवाने के लिए आ रहे हैं। अब नियमानुसार न तो ये परीक्षा दे सकते हैं और न ही इनके नाम लिखे जा सकते हैं। वैसे तो नियम 75 फीसद हाजिरी होनी चाहिए। लेकिन दस फीसद हाजिरी की पावर प्राचार्य के पास होती है। उसके बाद 65 फीसद हाजिरी होनी चाहिए। उसके बाद भी इन विद्यार्थियों के लेक्चर शॉर्ट हैं। इन बच्चों के लिए नोटिस भी लगाए गए थे। उनके घर पर पत्र भी लिखेे गए थे। ताकि उने अभिभावकों को स्थिति का पता लग सके। लेकिन उसके बाद भी उनके अभिभावक या विद्यार्थी कॉलेज में नहीं आए।
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डॉ. जगदीश राहड़, संयोजक कॉलेज अनुशासन समिति।
हाजिरी कम होने के कारण 200 से अधिक विद्यार्थियों के नाम काटे गए थे। कुछ के नाम लिखे जाने के बाद भी वे कॉलेज में नहीं आए। नियमानुसार लगातार एक सप्ताह तक विद्यार्थी शिक्षण संस्थान में नहीं आता है तो उसका नाम काट दिया जाता है।
- डॉ. अमित भारद्वाज, मीडिया प्रभारी, नेहरू कॉलेज, झज्जर।