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डॉ.सुरेश ने अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शोध- पत्र किया प्रस्तुत
Updated Fri, 18 Aug 2017 01:56 AM IST
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डॉ. सुरेश ने अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शोधपत्र किया प्रस्तुत
चरखी दादरी।
जनता कॉलेज में राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार जांगिड़ ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में राजनीतिक चिंतन की भारतीय दृष्टि: वैश्विक विकल्प की संभावनाएं’ विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया है। भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद एवं ग्लोबल आर्गेनाइजेशन ऑफ पीपुल्स ऑफ इंडियन ओरिजन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. सुरेश ने बंसीलाल विश्वविद्यालय भिवानी की ओर से प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने बताया कि इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश एवं विदेश के करीब 500 से अधिक राजनीति विज्ञान विद्वानों ने भाग लिया। इन विद्वानों ने राजनीतिक क्षेत्र में भारतीय दृष्टिकोण के परिप्रेक्ष्य में वैश्विक विकल्प की संभावनाओं पर गहरा चिंतन एवं मनन किया। डॉ. सुरेश ने बताया कि इस चिंतन के दौरान पाया कि भारतीय दृष्टि विश्व को समयानुकूल पथ प्रदर्शक के रूप में विकासोन्मुख एवं शांतिमय विश्व की ओर अग्रसर करने वाली पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन की एकात्म मानवतावाद की अवधारणा एक वैश्विक विकल्प के रूप में सिद्ध हो सकती है।
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चरखी दादरी।
जनता कॉलेज में राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार जांगिड़ ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में राजनीतिक चिंतन की भारतीय दृष्टि: वैश्विक विकल्प की संभावनाएं’ विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया है। भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद एवं ग्लोबल आर्गेनाइजेशन ऑफ पीपुल्स ऑफ इंडियन ओरिजन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. सुरेश ने बंसीलाल विश्वविद्यालय भिवानी की ओर से प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने बताया कि इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश एवं विदेश के करीब 500 से अधिक राजनीति विज्ञान विद्वानों ने भाग लिया। इन विद्वानों ने राजनीतिक क्षेत्र में भारतीय दृष्टिकोण के परिप्रेक्ष्य में वैश्विक विकल्प की संभावनाओं पर गहरा चिंतन एवं मनन किया। डॉ. सुरेश ने बताया कि इस चिंतन के दौरान पाया कि भारतीय दृष्टि विश्व को समयानुकूल पथ प्रदर्शक के रूप में विकासोन्मुख एवं शांतिमय विश्व की ओर अग्रसर करने वाली पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन की एकात्म मानवतावाद की अवधारणा एक वैश्विक विकल्प के रूप में सिद्ध हो सकती है।