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पांच स्टार रैंक वाले बाढ़डा में नहीं एक भी सार्वजनिक शौचालय
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बाढड़ा। स्वच्छता में फाइव स्टार रैंक प्राप्त करने वाले बाढड़ा कस्बे में एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है। इसके चलते स्थानीय दुकानदारों और प्रतिदिन काम से आने वाले विभिन्न गांवों के ग्रामीणों को परेशानियां झेलनी पड़ रही है। वहीं, व्यापार मंडल शौचालय निर्माण के लिए जगह की तलाश कर रहा है, लेकिन अब तक उपयुक्त जगह नहीं मिल पाई है। वहीं, स्थानीय दुकानदारों और लोगों ने सार्वजनिक शौचालय के निर्माण की मांग की है।
एक तरफ सरकार स्वच्छता भारत अभियान के तहत लोगों को खुले की बजाय शौचालय में जाने के लिए जागरूक कर रही है तो वहीं कस्बे में सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से लोग परेशान हैं। बाढड़ा कस्बे को भले ही उपमंडल का दर्जा मिले दो साल से ज्यादा का समय बीत गया है, फिर भी अभी यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कस्बे में विभिन्न शिक्षण संस्थाओं सहित सरकारी व गैर सरकारी संस्थान हैं, लेकिन आमजन की सहूलियतों के लिए एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है। ऐसे में लोग शौच या लघु शंका खुले में ही करने को मजबूर हैं। कस्बे में प्रतिदिन पचास से भी ज्यादा गांवों के लोगों का आवागमन होता है। शौचालय नहीं होने से खासकर महिलाएं और छात्राओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दुकानदार नवीन, सत्यवान, रोहताश, राजेश, संजय आदि का कहना है कि सरकार स्वच्छता अभियान चलाकर शहर और गांवों में शौचालय बनवा रही है, लेकिन इस मामले में बाढड़ा कस्बे की ओर ध्यान तक नहीं दिया गया। हर रोज कस्बे में हजारों लोगों का आवागमन होता रहता है और सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से कस्बे में गंदगी पसरी रहती है। उन्होंने बताया कि कस्बे में सार्वजनिक शौचालय बन जाए तो इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इन दुकानदारों का कहना है कि स्वच्छता में बाढड़ा ने कुछ समय पहले ही फाइव स्टार रैंक हासिल की है और इसके लिए पंचायत को प्रदेश स्तर पर सम्मानित भी किया गया था।
सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए हम प्रयासरत हैं। फिलहाल जगह का चयन नहीं हो पाया है। हमारी प्लानिंग है कि कस्बे में दो-तीन सार्वजनिक शौचालय बनवाए जाएं ताकि लोगों को परेशानियां न झेलनी पड़े। जल्द ही कस्बे में शौचालय निर्माण की प्रक्रिया को अमलीजामा पहना दिया जाएगा।
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रामकिशन फौजी, प्रधान, बाढड़ा व्यापार मंडल
एक तरफ सरकार स्वच्छता भारत अभियान के तहत लोगों को खुले की बजाय शौचालय में जाने के लिए जागरूक कर रही है तो वहीं कस्बे में सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से लोग परेशान हैं। बाढड़ा कस्बे को भले ही उपमंडल का दर्जा मिले दो साल से ज्यादा का समय बीत गया है, फिर भी अभी यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कस्बे में विभिन्न शिक्षण संस्थाओं सहित सरकारी व गैर सरकारी संस्थान हैं, लेकिन आमजन की सहूलियतों के लिए एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है। ऐसे में लोग शौच या लघु शंका खुले में ही करने को मजबूर हैं। कस्बे में प्रतिदिन पचास से भी ज्यादा गांवों के लोगों का आवागमन होता है। शौचालय नहीं होने से खासकर महिलाएं और छात्राओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दुकानदार नवीन, सत्यवान, रोहताश, राजेश, संजय आदि का कहना है कि सरकार स्वच्छता अभियान चलाकर शहर और गांवों में शौचालय बनवा रही है, लेकिन इस मामले में बाढड़ा कस्बे की ओर ध्यान तक नहीं दिया गया। हर रोज कस्बे में हजारों लोगों का आवागमन होता रहता है और सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से कस्बे में गंदगी पसरी रहती है। उन्होंने बताया कि कस्बे में सार्वजनिक शौचालय बन जाए तो इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इन दुकानदारों का कहना है कि स्वच्छता में बाढड़ा ने कुछ समय पहले ही फाइव स्टार रैंक हासिल की है और इसके लिए पंचायत को प्रदेश स्तर पर सम्मानित भी किया गया था।
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सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए हम प्रयासरत हैं। फिलहाल जगह का चयन नहीं हो पाया है। हमारी प्लानिंग है कि कस्बे में दो-तीन सार्वजनिक शौचालय बनवाए जाएं ताकि लोगों को परेशानियां न झेलनी पड़े। जल्द ही कस्बे में शौचालय निर्माण की प्रक्रिया को अमलीजामा पहना दिया जाएगा।
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रामकिशन फौजी, प्रधान, बाढड़ा व्यापार मंडल