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सेक्टर की सड़क पर बैठे सां, आड़ै चोर अर सांप घबेरों का भय
Updated Wed, 21 Mar 2018 01:31 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
ना खुदा मिला ना विसाले सनम कृषि मंत्री के गृह जिले में आज शायर की यह लाइन स्टीक बैठ रही है। किसान को सरसों की फसल बेचने के लिए सरकार और प्रशासन के नियम कायदों ने इस कदर उलझा दिया है कि भविष्य में किसान सरसों की फसल बोने से ही तौबा कर लें। पहले तो फसल खरीद करीब एक सप्ताह देरी से शुरू की गई। फिर जिला प्रशासन ने किसानों को तारीखों के चक्कर में उलझा कर कटे पर नमक छिड़कने का काम कर दिया है। वहीं, इसके बावजूद किसान जैसे तैसे हिम्मत करके फसल बेचने झज्जर की अनाज मंडी में पहुंचे तो उन्हें बहादुरगढ़ रोड स्थित सेक्टर 9 में कच्चे मैदान में बनाई अस्थायी मंडी को रास्ता दिखा दिया गया।
जहां पल-पल बदल रहे मौसम के रुख ने जहां किसानों को डराने का काम किया है। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था न होने के चलते आवारा पशुओं व फसल चोरों के डर के चलते रात जाग कर बीतानी पड़ रही है। ऐसे में फसल बेचने आए किसानों को मंडी कर्मचारियों के रुख व्यवहार का भी दर्द भी जुबां पर चाहे अनचाहे आ जाता है।
ये बोले किसान
फसल बेचने आए किसानों से जब उनकी परेशानियों व समस्या के बारे मे पूछा गया तो उनका दर्द आईना बन आंखों के सामने खड़ा था। ऐसे में गांव बामडोला निवासी एक किसान सतपाल ने आरोप लगाया कि उन्होंने फसल बेचने के लिए खरीद अधिकारी से संपर्क किया था। जिस पर संबधित अधिकारी ने उसे फसल खरीदने का आश्वासन देने कि बात कहकर फसल मंडी मे लाने केे लिए कहा। किसानों का कहना है कि सुबह से हम अपनी फसल मंडी में लेकर आए है। लेकिन लेबर न होने के कारण उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यहां न तो पीने के पानी कि व्यवस्था न कोई धूप से बचने के लिए व्यवस्था है।
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नहीं मिला तिरपाल
किसान कृष्ण ने बताया कि उसने अपनी फसल को ढांपने के लिए तिरपाल मांगा तो हैफेड के कर्मचारियों ने तिरपाल देने से इंकार कर दिया। तब उसने अपने घर से तिरपाल मंगाया ओर अपनी फसल को ढका। अपनी फसल बेचने आए किसान कृष्ण, जितेंद्र, जय प्रकाश, भूप सिंह, जीत, सतपाल ने सरकार की इस अव्यवस्थित खरीद को लेकर रोष व्यक्त किया है।
समस्याओं पर नहीं बोले सहकारिता राज्य मंत्री
वहीं, सहकारिता राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर ने किसानों की समस्याओं दरकिनार करते हुए सरसों के खरीद मूल्य व खरीद पर सरकार की पीठ थपथपाते हुए नजर आए। मंत्री ने कहा कि वे छोटी-छोटी समस्याओं को अनदेखा कर खरीद मूल्य पर ही अपनी फसल बेचें।
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झज्जर।
ना खुदा मिला ना विसाले सनम कृषि मंत्री के गृह जिले में आज शायर की यह लाइन स्टीक बैठ रही है। किसान को सरसों की फसल बेचने के लिए सरकार और प्रशासन के नियम कायदों ने इस कदर उलझा दिया है कि भविष्य में किसान सरसों की फसल बोने से ही तौबा कर लें। पहले तो फसल खरीद करीब एक सप्ताह देरी से शुरू की गई। फिर जिला प्रशासन ने किसानों को तारीखों के चक्कर में उलझा कर कटे पर नमक छिड़कने का काम कर दिया है। वहीं, इसके बावजूद किसान जैसे तैसे हिम्मत करके फसल बेचने झज्जर की अनाज मंडी में पहुंचे तो उन्हें बहादुरगढ़ रोड स्थित सेक्टर 9 में कच्चे मैदान में बनाई अस्थायी मंडी को रास्ता दिखा दिया गया।
जहां पल-पल बदल रहे मौसम के रुख ने जहां किसानों को डराने का काम किया है। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था न होने के चलते आवारा पशुओं व फसल चोरों के डर के चलते रात जाग कर बीतानी पड़ रही है। ऐसे में फसल बेचने आए किसानों को मंडी कर्मचारियों के रुख व्यवहार का भी दर्द भी जुबां पर चाहे अनचाहे आ जाता है।
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ये बोले किसान
फसल बेचने आए किसानों से जब उनकी परेशानियों व समस्या के बारे मे पूछा गया तो उनका दर्द आईना बन आंखों के सामने खड़ा था। ऐसे में गांव बामडोला निवासी एक किसान सतपाल ने आरोप लगाया कि उन्होंने फसल बेचने के लिए खरीद अधिकारी से संपर्क किया था। जिस पर संबधित अधिकारी ने उसे फसल खरीदने का आश्वासन देने कि बात कहकर फसल मंडी मे लाने केे लिए कहा। किसानों का कहना है कि सुबह से हम अपनी फसल मंडी में लेकर आए है। लेकिन लेबर न होने के कारण उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यहां न तो पीने के पानी कि व्यवस्था न कोई धूप से बचने के लिए व्यवस्था है।
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नहीं मिला तिरपाल
किसान कृष्ण ने बताया कि उसने अपनी फसल को ढांपने के लिए तिरपाल मांगा तो हैफेड के कर्मचारियों ने तिरपाल देने से इंकार कर दिया। तब उसने अपने घर से तिरपाल मंगाया ओर अपनी फसल को ढका। अपनी फसल बेचने आए किसान कृष्ण, जितेंद्र, जय प्रकाश, भूप सिंह, जीत, सतपाल ने सरकार की इस अव्यवस्थित खरीद को लेकर रोष व्यक्त किया है।
समस्याओं पर नहीं बोले सहकारिता राज्य मंत्री
वहीं, सहकारिता राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर ने किसानों की समस्याओं दरकिनार करते हुए सरसों के खरीद मूल्य व खरीद पर सरकार की पीठ थपथपाते हुए नजर आए। मंत्री ने कहा कि वे छोटी-छोटी समस्याओं को अनदेखा कर खरीद मूल्य पर ही अपनी फसल बेचें।