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तीन मांगें मानी तो किसानों ने एसडीएम कार्यालय को नहीं जड़ा ताला, धारा-144 में प्रशासन ने भी नरमी बरती
Updated Sat, 13 Oct 2018 01:10 AM IST
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चरखी दादरी/बाढड़ा। किसानों ने सात सूत्रीय मांगों में से तीन प्रमुख मांगें पूरी करने के आश्वासन के बाद बाढड़ा एसडीएम कार्यालय पर ताला जड़ने का फैसला वापस ले लिया। विधायक सुखविंद्र मांढ़ी ने अनाज मंडी में किसानों के बीच पहुंचकर तीन मांगें तुरंत प्रभाव से पूरे कराने का आश्वासन दिया। इसके अलावा विधायक ने किसानों की भूख हड़ताल समाप्त करवा दी। हालांकि किसानों का धरना अभी जारी रहेगा। किसानों के तालाबंदी करने से हाथ पीछे खींचने पर प्रशासन ने भी धारा-144 लागू होने के बाद भी नरमी बरती। इससे पहले एसडीएम कार्यालय का कामकाज बाधित करने की चेतावनी के मद्देनजर पुलिस वहां मुस्तैद नजर आयी।
बाढड़ा में बाजरा खरीद कराने, इस बार बारिश और ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों की स्पेशल गिरदावरी, बकाया मुआवजा दिलाने, पशु चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने सहित सात मांगों के लिए क्षेत्र के किसान एसडीएम कार्यालय के बाहर दस दिन से धरनारत और चार दिन से भूख हड़ताल पर हैं। शुक्रवार को भी किसानों ने धरना देकर भूख हड़ताल की। करीब साढ़े नौ बजे विभिन्न गांवों के किसान अनाज मंडी में एकत्र हुए और किसान पंचायत आयोजित की। करीब सवा दस बजे विधायक सुखविंद्र मांढ़ी भी अनाज मंडी पहुंचे। वहां उन्होंने किसानों की मांगें सुनकर जल्द इन्हें पूरा कराने का आश्वासन देकर एसडीएम कार्यालय पर ताला न जड़ने की अपील की। इस पर ग्रामीणों ने उनसे मौके पर ही ठोस आश्वासन मांगा। किसानों ने कहा कि बाढड़ा उपमंडल के किसानों को बाजरा बेचने के लिए दादरी नई अनाज मंडी जाना पड़ रहा है। इसके कारण उनका समय और रुपयों की बर्बादी हो रही है। किसानों ने कहा कि दादरी-बाढड़ा रोड की दयनीय हालत किसी से छिपी नहीं है। इस रास्ते से दादरी पहुंचना किसानों के लिए संभव ही नहीं है। इस पर विधायक सुखविंद्र ने सोमवार से ही बाढड़ा अनाज मंडी में भी बाजरा खरीद शुरू कराने का आश्वासन दिया। किसानों ने स्पेशल गिरदावरी की जब दूसरी मांग रखी तो उन्होंने तहसीलदार बाढड़ा को मौके पर बुलाया और स्पेशल गिरदावरी तुरंत प्रभाव से कराने के निर्देश दिए। इसके बाद किसानों ने तीसरी प्रमुख मांग वर्ष 2017 का बकाया पड़ा मुआवजा दिलाने की रखी। इस मांग को भी विधायक ने पूरा कराने का आश्वासन दिया। उनके आश्वासन से किसानों ने संतुष्ट होकर एसडीएम कार्यालय पर तालाबंदी न करने का एलान कर दया। इसके बाद विधायक धरनास्थल पर पहुंचे और अपने हाथों से जूस पिलाकर किसानों की भूख हड़ताल खतम करवा दी। हालांकि किसानों ने इस दौरान स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना जारी रहेगा। किसानों को वृद्ध किसान नेता कमल सिंह मांढ़ी, धर्मपाल बाढड़ा, मीर सिंह जेवली, हरपाल भांडवा, राजकुमार हड़ौदी और मंगल गोपी ने भी संबोधित किया।
मांगें नहीं पूरी की तो भाजपा विधायक बैठेंगे धरने पर
किसानों को मैंने मांगें पूरी करने का आश्वासन दे दिया है। इसके बाद किसान संगठनों ने तालाबंदी का फैसला वापस लिया है। अगर किसानों की मांगें सिरे नहीं चढ़ी तो इस बार मैं भी उनके समर्थन में आकर धरने पर बैठ जाऊंगा। - सुखविंद्र मांढ़ी, भाजपा विधायक
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- किसानों की मांगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। अगर अब भाजपा सरकार ने किसानों के साथ वादाखिलाफी की तो इसके अंजाम सरकार को भुगतने पड़ेंगे। किसानों के उग्र आंदोलन को भी मैं समर्थन देने से पीछे नहीं हटूंगा। - उमेद पातुवास, सामाजिक कार्यकर्ता
- भाजपा क्षेत्र के साथ जो भाई-भतीजावाद की भावना बरत रही है वो सही नहीं है। क्षेत्र की सड़कें कंडम होने से किसानों का दादरी तक का सफर आसान नहीं है। अगर किसानों की मांगें पूरी नहीं कीं तो सरकार को इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। - राजूमान, पूर्व कांग्रेस प्रदेश महासचिव
- किसानों की जो मांगें पूरी कराने का आश्वासन भाजपा विधायक ने दिया है उसे तुरंत प्रभाव से पूरा कराएं। अगर इस बार भी किसानों से राजनीति की गई तो फिर किसान कड़े कदम उठाने को विवश होंगे और इसकी जिम्मेदारी प्रशासन व सरकार की होगी। - विजय मंदोला, इनेलो नेता
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बाढड़ा में बाजरा खरीद कराने, इस बार बारिश और ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों की स्पेशल गिरदावरी, बकाया मुआवजा दिलाने, पशु चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने सहित सात मांगों के लिए क्षेत्र के किसान एसडीएम कार्यालय के बाहर दस दिन से धरनारत और चार दिन से भूख हड़ताल पर हैं। शुक्रवार को भी किसानों ने धरना देकर भूख हड़ताल की। करीब साढ़े नौ बजे विभिन्न गांवों के किसान अनाज मंडी में एकत्र हुए और किसान पंचायत आयोजित की। करीब सवा दस बजे विधायक सुखविंद्र मांढ़ी भी अनाज मंडी पहुंचे। वहां उन्होंने किसानों की मांगें सुनकर जल्द इन्हें पूरा कराने का आश्वासन देकर एसडीएम कार्यालय पर ताला न जड़ने की अपील की। इस पर ग्रामीणों ने उनसे मौके पर ही ठोस आश्वासन मांगा। किसानों ने कहा कि बाढड़ा उपमंडल के किसानों को बाजरा बेचने के लिए दादरी नई अनाज मंडी जाना पड़ रहा है। इसके कारण उनका समय और रुपयों की बर्बादी हो रही है। किसानों ने कहा कि दादरी-बाढड़ा रोड की दयनीय हालत किसी से छिपी नहीं है। इस रास्ते से दादरी पहुंचना किसानों के लिए संभव ही नहीं है। इस पर विधायक सुखविंद्र ने सोमवार से ही बाढड़ा अनाज मंडी में भी बाजरा खरीद शुरू कराने का आश्वासन दिया। किसानों ने स्पेशल गिरदावरी की जब दूसरी मांग रखी तो उन्होंने तहसीलदार बाढड़ा को मौके पर बुलाया और स्पेशल गिरदावरी तुरंत प्रभाव से कराने के निर्देश दिए। इसके बाद किसानों ने तीसरी प्रमुख मांग वर्ष 2017 का बकाया पड़ा मुआवजा दिलाने की रखी। इस मांग को भी विधायक ने पूरा कराने का आश्वासन दिया। उनके आश्वासन से किसानों ने संतुष्ट होकर एसडीएम कार्यालय पर तालाबंदी न करने का एलान कर दया। इसके बाद विधायक धरनास्थल पर पहुंचे और अपने हाथों से जूस पिलाकर किसानों की भूख हड़ताल खतम करवा दी। हालांकि किसानों ने इस दौरान स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना जारी रहेगा। किसानों को वृद्ध किसान नेता कमल सिंह मांढ़ी, धर्मपाल बाढड़ा, मीर सिंह जेवली, हरपाल भांडवा, राजकुमार हड़ौदी और मंगल गोपी ने भी संबोधित किया।
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मांगें नहीं पूरी की तो भाजपा विधायक बैठेंगे धरने पर
किसानों को मैंने मांगें पूरी करने का आश्वासन दे दिया है। इसके बाद किसान संगठनों ने तालाबंदी का फैसला वापस लिया है। अगर किसानों की मांगें सिरे नहीं चढ़ी तो इस बार मैं भी उनके समर्थन में आकर धरने पर बैठ जाऊंगा। - सुखविंद्र मांढ़ी, भाजपा विधायक
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- किसानों की मांगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। अगर अब भाजपा सरकार ने किसानों के साथ वादाखिलाफी की तो इसके अंजाम सरकार को भुगतने पड़ेंगे। किसानों के उग्र आंदोलन को भी मैं समर्थन देने से पीछे नहीं हटूंगा। - उमेद पातुवास, सामाजिक कार्यकर्ता
- भाजपा क्षेत्र के साथ जो भाई-भतीजावाद की भावना बरत रही है वो सही नहीं है। क्षेत्र की सड़कें कंडम होने से किसानों का दादरी तक का सफर आसान नहीं है। अगर किसानों की मांगें पूरी नहीं कीं तो सरकार को इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। - राजूमान, पूर्व कांग्रेस प्रदेश महासचिव
- किसानों की जो मांगें पूरी कराने का आश्वासन भाजपा विधायक ने दिया है उसे तुरंत प्रभाव से पूरा कराएं। अगर इस बार भी किसानों से राजनीति की गई तो फिर किसान कड़े कदम उठाने को विवश होंगे और इसकी जिम्मेदारी प्रशासन व सरकार की होगी। - विजय मंदोला, इनेलो नेता