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24 साल से खारा पानी पीने को विवश समसपुर की आठ हजार की अबादी
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चरखी दादरी। 24 वर्षों से समसपुर के जलघर में पर्याप्त पानी तो पहुंचता है लेकिन यह पीने लायक नहीं है। 1995 में आई बाढ़ के कारण जलघर में बने टैंक में चौव्वा ऊपर आ गया था और इसके चलते टैंक में पहुंचते ही नहरी पानी भी खारा हो जाता है। इसके कारण गांव में पेयजल संकट गहराया हुआ है। सोमवार को ग्रामीणों ने विभाग के खिलाफ रोष भी जताया। ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार जनस्वास्थ्य विभाग से गुहार लगा चुके लेकिन आज तक समस्या जस की तस बरकरार है। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय नजरअंदाजी के चलते वो पूर्णतया प्राइवेट सप्लाई पर निर्भर है।
ग्रामीणों ने बताया कि समसपुर में 1990 में जलघर बनाया गया था और 1995 में बाढ़ के कारण वाटर टैंक में चौव्वा ऊपर आ गया था और इसके बाद से ही टैंक में नहरी पानी डालते ही खारा हो जाता है। इस समय लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों से वो कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई समाधान नही हुआ। ग्रामीण लीलाराम ने बताया कि गांव की आबादी लगभग आठ हजार है। गर्मी का मौसम होने के कारण घरेलू कामकाज के इस्तेमाल होने वाले पानी की खपत भी बढ़ गई है। नहर से सीधे जलघर तक अलग लाइन डाली गई थी लेकिन टैंक ठीक न होने से नहर का पानी सीधा सप्लाई किया जा रहा है जो पीने लायक ही नही है। इसके कारण ग्रामीण पानी खरीद कर पीने को विवश हैं।
लोगों ने बताया कि 500 रुपये में इस समय ग्रामीण टैंकर खरीद रहे हैं। वहीं, कैंपर रखवाने के बदले ग्रामीणों को दस से पंद्रह रुपये प्रतिदिन चुकाने पड़ रहे हैं। इस संबंध में विधायक, सांसद, मंत्री और जनस्वास्थ्य विभाग से गुहार लगा चुके हैं लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ है। इस समय लोग आस-पास में लगे हैंडपंप और कुएं के जरिए पानी की पूर्ति कर रहे हैं। ग्रामीण राजकुमार, मांगे, धनसिंह रामकुमार, रोहताश रणबीर, राकेश, शमशेर, राजेश, कर्मवीर, प्रेम कुमार, संजय और सुरेश ने बताया कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नही किया गया तो वे कड़ा कदम उठाने को विवश होंगे।
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ग्रामीण बोले: विभाग को हमारी परेशानियों से नहीं सारोकार
- गांव में जलघर तो बनाया गया है और नहरी पानी भी आता है। लेकिन वाटर टैंक का चौव्वा ऊपर होने के चलते नहरी पानी भी खारा हो जाता है। इस समय विभाग सीधा नहरी पानी सप्लाई कर रहा है।
देवेंद्र लीला
- गर्मी का मौसम होने के कारण घरेलू कामकाज के इस्तेमाल होने वाले पानी की खपत भी बढ़ गई है। ऐसे में पानी का पीने न होने से लोगों के लिए एक एक दिन निकालना मुश्किल बना हुआ है।
शीतल
- हमें पानी की जैसे-तैसे व्यवस्था करनी पड़ रही है। ज्यादातर ग्रामीण टैंकरों को सहारा लेने को विवश हैं और इसके बदले प्रति टैंकर 500 रुपये देने पड़ रहे हैं। विभाग को हमारी समस्या से कोई सरोकार नहीं है।
जयवीर
- जलघर में बने टैंक में चौव्वा ऊपर आने से पानी खारा हो जाता है जो यह पेयजल संकट गहराने का मुख्य कारण है। लोग आस-पास में लगे हैंडपंप और कुएं के जरिए पानी की पूर्ति कर रहे हैं।
ओमप्रकाश
गांव समसपुर के जलघर के वाटर टैंकों में चौव्वा का पानी ऊपर होने से नहरी पानी खरा हो जाता है। इसके समाधान के लिए उच्च अधिकारियों से बात की जा रही है। जल्द ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा ।
ग्रामीणों ने बताया कि समसपुर में 1990 में जलघर बनाया गया था और 1995 में बाढ़ के कारण वाटर टैंक में चौव्वा ऊपर आ गया था और इसके बाद से ही टैंक में नहरी पानी डालते ही खारा हो जाता है। इस समय लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों से वो कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई समाधान नही हुआ। ग्रामीण लीलाराम ने बताया कि गांव की आबादी लगभग आठ हजार है। गर्मी का मौसम होने के कारण घरेलू कामकाज के इस्तेमाल होने वाले पानी की खपत भी बढ़ गई है। नहर से सीधे जलघर तक अलग लाइन डाली गई थी लेकिन टैंक ठीक न होने से नहर का पानी सीधा सप्लाई किया जा रहा है जो पीने लायक ही नही है। इसके कारण ग्रामीण पानी खरीद कर पीने को विवश हैं।
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लोगों ने बताया कि 500 रुपये में इस समय ग्रामीण टैंकर खरीद रहे हैं। वहीं, कैंपर रखवाने के बदले ग्रामीणों को दस से पंद्रह रुपये प्रतिदिन चुकाने पड़ रहे हैं। इस संबंध में विधायक, सांसद, मंत्री और जनस्वास्थ्य विभाग से गुहार लगा चुके हैं लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ है। इस समय लोग आस-पास में लगे हैंडपंप और कुएं के जरिए पानी की पूर्ति कर रहे हैं। ग्रामीण राजकुमार, मांगे, धनसिंह रामकुमार, रोहताश रणबीर, राकेश, शमशेर, राजेश, कर्मवीर, प्रेम कुमार, संजय और सुरेश ने बताया कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नही किया गया तो वे कड़ा कदम उठाने को विवश होंगे।
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ग्रामीण बोले: विभाग को हमारी परेशानियों से नहीं सारोकार
- गांव में जलघर तो बनाया गया है और नहरी पानी भी आता है। लेकिन वाटर टैंक का चौव्वा ऊपर होने के चलते नहरी पानी भी खारा हो जाता है। इस समय विभाग सीधा नहरी पानी सप्लाई कर रहा है।
देवेंद्र लीला
- गर्मी का मौसम होने के कारण घरेलू कामकाज के इस्तेमाल होने वाले पानी की खपत भी बढ़ गई है। ऐसे में पानी का पीने न होने से लोगों के लिए एक एक दिन निकालना मुश्किल बना हुआ है।
शीतल
- हमें पानी की जैसे-तैसे व्यवस्था करनी पड़ रही है। ज्यादातर ग्रामीण टैंकरों को सहारा लेने को विवश हैं और इसके बदले प्रति टैंकर 500 रुपये देने पड़ रहे हैं। विभाग को हमारी समस्या से कोई सरोकार नहीं है।
जयवीर
- जलघर में बने टैंक में चौव्वा ऊपर आने से पानी खारा हो जाता है जो यह पेयजल संकट गहराने का मुख्य कारण है। लोग आस-पास में लगे हैंडपंप और कुएं के जरिए पानी की पूर्ति कर रहे हैं।
ओमप्रकाश
गांव समसपुर के जलघर के वाटर टैंकों में चौव्वा का पानी ऊपर होने से नहरी पानी खरा हो जाता है। इसके समाधान के लिए उच्च अधिकारियों से बात की जा रही है। जल्द ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा ।