{"_id":"5d02b357bdec226df15e1837","slug":"15604580611-bahadurgarh-news174","type":"story","status":"publish","title_hn":"आतंकी हमले से छह घंटे पहले रमेश ने कहा था अमरनाथ ड्यूटी खत्म होते ही घर आऊंगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आतंकी हमले से छह घंटे पहले रमेश ने कहा था अमरनाथ ड्यूटी खत्म होते ही घर आऊंगा
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बहादुरगढ़/बादली। आतंकी हमले से छह घंटे पहले बुधवार की सुबह 10 बजे एएसआई रमेश कुमार ने पत्नी सुनील देवी से फोन पर बात की थी। जबकि आतंकी ने शाम चार बजे हमला किया था। रमेश कुमार ने कहा था कि अभी वह अमरनाथ यात्रा ड्यूटी पर है और ड्यूटी खत्म होते ही घर आऊंगा। इसके बाद दोनों बेटों की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली और बेटों के लिए पढ़ाई पर ध्यान देने के साथ-साथ मां-पिता को गर्मी में स्वास्थ्य का ख्याल रखने की बात कही। खेड़ी जट्ट गांव में शहीद रमेश कुमार के घर के अलावा पूरे गांव का माहौल गमगीन रहा। रमेश के परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे मोहित और रोहित हैं। मोहित (23) ने जहां बीएससी की हुई है तो रोहित (20) ने बीए कर रखी है।
परिवार में सबसे बड़ा था रमेश
शहीद रमेश कुमार अपने परिवार में सबसे बड़ा था। रमेश के अलावा परिवार में उसकी दो बहनें और दो भाई हैं। इनमें एक भाई और दो बहनों की शादी हो चुकी है। जबकि छोटा भाई संजय डीसी रेट पर जिले में कार्यरत है। रमेश से छोटा भाई राजेश भी सीआरपीएफ में बतौर कांस्टेबल प्रयागराज (इलाहाबाद) में तैनात है। राजेश 1 अगस्त 1994 में भर्ती हुए थे।
जनवरी में किया था एसआई का कोर्स
जानकारी के अनुसार शहीद रमेश कुमार ने जनवरी माह में ही एसआई का कोर्स किया था। इससे पहले वह एएसआई के तौर पर सीआरपीएफ में तैनात थे। बताया गया है कि फरवरी महीने में रमेश कुमार अपने भांजे की शादी में भी शरीक हुए थे। इसमें पूरे परिवार के साथ फोटो खिंचवाई थी।
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नहीं रुक रहे पिता के आंसू
शहीद हुए रमेश कुमार के पिता खजान सिंह की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। पिता खजान सिंह को जैसे ही बेटे रमेश की आतंकी हमले में शहीद होने की खबर लगी तो वे घर के बाहर चारपाई पर बैठ गए और बार-बार आंखें पोंछते रहे।
दाह संस्कार से पहले की गई श्मशान घाट की सफाई
शहीद रमेश कुमार का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचने से पहले ग्राम पंचायत की ओर से श्मशान घाट की साफ- सफाई कराई गई। इसमें सरपंच अभिमन्यु का विशेष सहयोग रहा। इस दौरान शहीद एएसआई रमेश कुमार को श्रद्धांजलि देने के लिए आप प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद, प्रदीप देशवाल, पूर्व विधायक नरेश शर्मा, अजय गुलिया, कुलदीप वत्स, डीपी कौशिक, जिला पार्षद मामन ठेकेदार, परमजीत सोलधा, योगेश सिलानी, आनंद सागर, राव धर्मपाल, बबलू लुक्सर, अमित छनपाड़िया, अरविंद गुलिया, सरजीत गुलिया सहित क्षेत्र की तमाम समाजिक संस्थाओं और ग्रामीणों ने शोक व्यक्त किया।
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परिवार में सबसे बड़ा था रमेश
शहीद रमेश कुमार अपने परिवार में सबसे बड़ा था। रमेश के अलावा परिवार में उसकी दो बहनें और दो भाई हैं। इनमें एक भाई और दो बहनों की शादी हो चुकी है। जबकि छोटा भाई संजय डीसी रेट पर जिले में कार्यरत है। रमेश से छोटा भाई राजेश भी सीआरपीएफ में बतौर कांस्टेबल प्रयागराज (इलाहाबाद) में तैनात है। राजेश 1 अगस्त 1994 में भर्ती हुए थे।
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जनवरी में किया था एसआई का कोर्स
जानकारी के अनुसार शहीद रमेश कुमार ने जनवरी माह में ही एसआई का कोर्स किया था। इससे पहले वह एएसआई के तौर पर सीआरपीएफ में तैनात थे। बताया गया है कि फरवरी महीने में रमेश कुमार अपने भांजे की शादी में भी शरीक हुए थे। इसमें पूरे परिवार के साथ फोटो खिंचवाई थी।
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नहीं रुक रहे पिता के आंसू
शहीद हुए रमेश कुमार के पिता खजान सिंह की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। पिता खजान सिंह को जैसे ही बेटे रमेश की आतंकी हमले में शहीद होने की खबर लगी तो वे घर के बाहर चारपाई पर बैठ गए और बार-बार आंखें पोंछते रहे।
दाह संस्कार से पहले की गई श्मशान घाट की सफाई
शहीद रमेश कुमार का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचने से पहले ग्राम पंचायत की ओर से श्मशान घाट की साफ- सफाई कराई गई। इसमें सरपंच अभिमन्यु का विशेष सहयोग रहा। इस दौरान शहीद एएसआई रमेश कुमार को श्रद्धांजलि देने के लिए आप प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद, प्रदीप देशवाल, पूर्व विधायक नरेश शर्मा, अजय गुलिया, कुलदीप वत्स, डीपी कौशिक, जिला पार्षद मामन ठेकेदार, परमजीत सोलधा, योगेश सिलानी, आनंद सागर, राव धर्मपाल, बबलू लुक्सर, अमित छनपाड़िया, अरविंद गुलिया, सरजीत गुलिया सहित क्षेत्र की तमाम समाजिक संस्थाओं और ग्रामीणों ने शोक व्यक्त किया।