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अवैध पीवीसी मार्केट खुद हटा लें, नहीं तो नप हटा देगी

Thu, 06 Jun 2019 02:16 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jun 2019 02:16 AM IST
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अवैध पीवीसी मार्केट खुद हटा लें, नहीं तो नप हटा देगी
बहादुरगढ़। दिल्ली बॉर्डर से लगती जटवाड़े की 150 एकड़ से ज्यादा जमीन पर बसी अवैध पीवीसी मार्केट को लेकर बुधवार को नगर परिषद के अधिकारियों की बैठक हुई। इस बैठक में नगर परिषद के अधिकारी, जमीन मालिक और दुकानदार मौजूद रहे। नगर परिषद के ईओ ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि या तो वे खुद ही अपनी मार्केट को हटा लें वरना नगर परिषद जल्द ही कार्रवाई करते हुए इसे हटा देगी। ईओ ने कहा कि सभी दुकानदारों व जमीन मालिकों की सूची भी चार दिन में तलब की गई है। सूची मिलते ही आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी डॉ. विजयपाल ने कहा कि शहरी क्षेत्र में कृषि योग्य भूमि पर इस तरह की वाणिज्यिक गतिविधि नहीं की जा सकती। इसके साथ ही प्रदूषण भी नहीं फैलाया जा सकता। अगर कोई प्रदूषण फैलाता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण फैलाने पर कड़ी कार्रवाई की बात सुन दुकानदार बोले कि उनकी अवैध मार्केट में प्लास्टिक को जलाने की बजाये उसका सेग्रीकेशन किया जाता है। इस पर डॉ. विजय पाल ने कहा कि एनजीटी व ईपीसीए के चेयरमैन भूरेलाल की ओर से इस मार्केट को हटाने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसलिए उन्होंने सभी दुकानदारों व जमीन मालिकों से कहा कि वे यहां से खुद ही मार्केट को हटा लें और इसे किसी दूसरे स्थान पर अनुमति लेकर स्थापित करें। बहादुरगढ़ शहर में यह मार्केट किसी भी सूरत में नहीं चलने दी जाएगी। नगर परिषद की ओर से बहुत जल्द ही इस मार्केट के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर नप सचिव मुकेश कुमार, भवन निरीक्षक विवेक जैन आदि मौजूद थे।
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दुकानदारों और जमीन मालिकों ने की राहत देने की मांग
बैठक में दुकानदारों व जमीन मालिकों ने प्रशासन से राहत देने की मांग की। मार्केट प्रधान जयपाल राठी ने नप अधिकारियों से कहा कि यहां भारी संख्या में दुकानदारों ने अपना व्यवसाय शुरू कर रखा है। वे सिर्फ प्लास्टिक के सेग्रीकेशन का काम करते हैं। यहां न तो कोई प्रदूषण फैलाया जा रहा है और ही किसी तरह के नियमों की उल्लंघन की जाती है। उन्होंने कहा कि एमआईई की फैक्ट्रियों के प्रदूषण की वजह से खेती नहीं हो रही थी। इस कारण किसानों को घाटा हो रहा था। अब किसानों ने यह जमीन प्लास्टिक के दुकानदारों को दी है तो उनकी रोजी-रोटी का साधन हो गया है। उन्होंने प्रशासन से रोजी-रोटी न छीनने की मांग की है और सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए राहत देेने की मांग की है। रही बात किसी अनुमति की तो वे नियमानुसार हर अनुमति लेने को तैयार हैं। प्रशासन उनके लिए एक पॉलिसी बनाकर लाए और वे उस पॉलिसी के अनुसार ही अपना काम धंधा कर लेंगे।
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