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विकास की भेंट चढ़ी हरियाली
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झज्जर। कभी सड़कों के निर्माण को लेकर तो कभी अन्य विकास कार्यों के नाम पर हरेभरे पेड़ों को काटा जा रहा है। हर रोज हजारों पेड़ पौधे विकास की भेंट चढ़ रहे हैं। जो पर्यावरण के लिए खतरा साबित हो रहे हैं। पेड़ पौधों की निरंतर कटाई के कारण बारिश की कमी होती जा रही है। वहीं पर्यावरण में जहरीली गैसें फैलती जा रही है। जो मानव ही नहीं हर जीव के जीवन के लिए घातक हैं और अनेक प्रकार की बीमारी भी लोगों में फैलती जा रही है। विकास कार्यों के नाम पर पिछले आठ सालों में जिले में सुरक्षित वन क्षेत्र 195 हेक्टेयर भूमि सड़कों को चौड़ा करने, नहरों के रिमॉडलिंग के अलावा अन्य विकास कार्यों के लिए पेड़ों को काटकर यह भूमि संबधित विभागों को डायवर्ट कर दी गई है। इस भूमि पर अब हरियाली नहीं कंकरीट के जंगल खड़े हो गए हैं।
पांच साल में काट दिए 49,706 पेड़
पिछले पांच साल में नेशनल हाईवे 334 बी, नेशनल हाईवे 71 ए, बादली रोड, बहादुरगढ़ रोड सहित अन्य मार्गों के अलावा नहरों के रिमॉडलिंग के कारण और अन्य विकास कार्यों की वजह से जिले में वन विभाग की मंजूरी से 49 हजार 706 पेड़ों पर आरी व कुल्हाड़ी चली है। जबकि पांच साल में 876.42 हेक्टेयर भूमि पर छह लाख 40 हजार 112 पौधे लगाए हैं।
आग की भेंट चढ़ रही वन संपदा
जिले में फसलों की कटाई व कढ़ाई के सीजन में फसलों के अवशेष जलाने के कारण खेतों के साथ लगते हजारों पेड़ पौधे आग की भेंट चढ़ जाते हैं। वन विभाग की तरफ से जिले में तीन किसानों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया था। इस बार भी कई किसानों के खिलाफ वन संपदा का नुकसान पहुंचाने को लेकर मामले दर्ज कराने की तैयारी चल रही है।
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जिले में सुरक्षित वन क्षेत्र की स्थिति
कुल वन क्षेत्र : 3991.78 हेक्टेयर
सड़कों के साथ : 1294 .16 किलोमीटर
रेलवे लाइनों के साथ : 146.57 किलोमीटर
बांध के साथ : 42.42 आरडी
कैनाल और नहरों के साथ : 1762.19 आरडी
संरक्षित वन क्षेत्र : 491 हेक्टेयर
अन्य वन क्षेत्र : 255.08 हेक्टेयर
देखरेख के अभाव में मर जाते हैं 40 प्रतिशत पौधे
वन विभाग की तरफ से हर साल लाखों पौधे तैयार किए जाते हैं। विभाग की तरफ से लाखों पौधे लोगों को विभिन्न स्कीमों के तहत वितरित किए जाते हैं। जबकि लाखों पौधे विभाग की तरफ से भी लगाए जाते हैं। लेकिन देख रेख के अभाव में समय पर पानी न मिलने और पशुओं द्वारा खराब करने के कारण 40 प्रतिशत पौधे नष्ट हो जाते हैं।
पर्यावरण के लिए पौधे भी जरूरी है और जनता के लिए विकास भी जरूरी है। लेकिन इनके बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। जितने पेड़ काटे जाते हैं, उससे अधिक पौधे लगाकर संरक्षण का प्रयास किया जाता है।
राजकुमार, डीएफओ, झज्जर।
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पांच साल में काट दिए 49,706 पेड़
पिछले पांच साल में नेशनल हाईवे 334 बी, नेशनल हाईवे 71 ए, बादली रोड, बहादुरगढ़ रोड सहित अन्य मार्गों के अलावा नहरों के रिमॉडलिंग के कारण और अन्य विकास कार्यों की वजह से जिले में वन विभाग की मंजूरी से 49 हजार 706 पेड़ों पर आरी व कुल्हाड़ी चली है। जबकि पांच साल में 876.42 हेक्टेयर भूमि पर छह लाख 40 हजार 112 पौधे लगाए हैं।
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आग की भेंट चढ़ रही वन संपदा
जिले में फसलों की कटाई व कढ़ाई के सीजन में फसलों के अवशेष जलाने के कारण खेतों के साथ लगते हजारों पेड़ पौधे आग की भेंट चढ़ जाते हैं। वन विभाग की तरफ से जिले में तीन किसानों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया था। इस बार भी कई किसानों के खिलाफ वन संपदा का नुकसान पहुंचाने को लेकर मामले दर्ज कराने की तैयारी चल रही है।
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जिले में सुरक्षित वन क्षेत्र की स्थिति
कुल वन क्षेत्र : 3991.78 हेक्टेयर
सड़कों के साथ : 1294 .16 किलोमीटर
रेलवे लाइनों के साथ : 146.57 किलोमीटर
बांध के साथ : 42.42 आरडी
कैनाल और नहरों के साथ : 1762.19 आरडी
संरक्षित वन क्षेत्र : 491 हेक्टेयर
अन्य वन क्षेत्र : 255.08 हेक्टेयर
देखरेख के अभाव में मर जाते हैं 40 प्रतिशत पौधे
वन विभाग की तरफ से हर साल लाखों पौधे तैयार किए जाते हैं। विभाग की तरफ से लाखों पौधे लोगों को विभिन्न स्कीमों के तहत वितरित किए जाते हैं। जबकि लाखों पौधे विभाग की तरफ से भी लगाए जाते हैं। लेकिन देख रेख के अभाव में समय पर पानी न मिलने और पशुओं द्वारा खराब करने के कारण 40 प्रतिशत पौधे नष्ट हो जाते हैं।
पर्यावरण के लिए पौधे भी जरूरी है और जनता के लिए विकास भी जरूरी है। लेकिन इनके बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। जितने पेड़ काटे जाते हैं, उससे अधिक पौधे लगाकर संरक्षण का प्रयास किया जाता है।
राजकुमार, डीएफओ, झज्जर।