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गुलामी की जंजीरें तोड़ आज हवा से बात कर रहा है देश
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। सिंगापुर में जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 2 मार्च 1943 को एक मंच पर खड़े होकर जवानों को संबोधित किया और देश को आजाद कराने के लिए जोश भरा तो उनकी एक आवाज पर आजाद हिंद फौज खड़ी हुई थी। आजादी के लिए पहले गुलामी की जंजीरें तोड़ने के लिए जेलों की यातनाएं सही थी। लेकिन देश आजाद
होने के बाद बड़ी तेजी से विज्ञान ने तरक्की की है। जिससे आज अब कुछ संभव हो गया है। देश आज हवा से बातें कर रहा है। इतना विकास हुआ की उन्होंने सोचा भी नहीं था। देश की आजादी से पहले उन्होंने अंग्रेजों की यातनाएं भी सही हैं। अंग्रेज यहां के लोगों की पीठ पर कोड़े बरसाते थे और लोगों से काम लेते थे। उस समय हर कोई दुखी था। लोग चाहते थे देश आजाद हो। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जब जवानों को कहा कि चाहे कोई भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े हमें हिंदुस्तान आजाद कराना है। उस समय हर जवान अपने प्राणों की आहुति देने के लिए तैयार हो गया था। यह कहना है स्वतंत्रता सेनानी छोटू राम का।
भाईचारे में आई कमी
धौड़ गांव निवासी छोटूराम का कहना है कि आज हम आराम से सुख सुविधाओं के बीच आराम से अपने परिवारों के बीच बैठ रहे हैं। लेकिन आजादी से पहले ऐसा नहीं था। हालांकि समाज में काफी बदलाव आया है। आपसी भाईचारा खत्म हो गया है। भाई-भाई का दुश्मन हो गया। लेकिन पहले हर व्यक्ति एक दूसरे का सहयोग करता था। आपसी प्रेम और भाईचारा था। जिस गति से देश ने विकास किया है। सुख सुविधाएं बढ़ी है। उस प्रकार भाईचारा भी खत्म होता गया है।
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20 साल की उम्र में थामी थी बंदूक
धौड़ निवासी छोटूराम का जन्म 14 जून 1923 को हुआ था। 14 जून 1941 को वह सेना में भर्ती हुए थे। 2 मार्च 1943 को जब वे सिंगापुर में थे तो उस समय नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन किया था और उन्हें संबोधित किया था। आज भी 98 साल की उम्र में नेता जी की बातें याद कर उनमें जोश भर आता है। वर्ष 1946 में जेल की यातनाएं सहने के बाद वे वापस घर आए थे। 15 अगस्त 1947 का दिन सबसे बड़ी खुशी का दिन बनकर आया और देश आजाद हो गया। उसके बाद भी उन्होंने देश की सेना में रहकर देश की सेवा की है। आजादी के बाद वर्ष 1949 में वे दोबारा से ग्रनेडियर में भर्ती हो गए। वहां से 19 जून 1953 को सेवानिवृत्त हो गए और 1957 में एक बार फिर से स्पेशल आर्म्ड फोर्स में भर्ती हो गए और 31 दिसंबर 1985 को यहां से भी सेवानिवृत्त हो गए।
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झज्जर। सिंगापुर में जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 2 मार्च 1943 को एक मंच पर खड़े होकर जवानों को संबोधित किया और देश को आजाद कराने के लिए जोश भरा तो उनकी एक आवाज पर आजाद हिंद फौज खड़ी हुई थी। आजादी के लिए पहले गुलामी की जंजीरें तोड़ने के लिए जेलों की यातनाएं सही थी। लेकिन देश आजाद
होने के बाद बड़ी तेजी से विज्ञान ने तरक्की की है। जिससे आज अब कुछ संभव हो गया है। देश आज हवा से बातें कर रहा है। इतना विकास हुआ की उन्होंने सोचा भी नहीं था। देश की आजादी से पहले उन्होंने अंग्रेजों की यातनाएं भी सही हैं। अंग्रेज यहां के लोगों की पीठ पर कोड़े बरसाते थे और लोगों से काम लेते थे। उस समय हर कोई दुखी था। लोग चाहते थे देश आजाद हो। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जब जवानों को कहा कि चाहे कोई भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े हमें हिंदुस्तान आजाद कराना है। उस समय हर जवान अपने प्राणों की आहुति देने के लिए तैयार हो गया था। यह कहना है स्वतंत्रता सेनानी छोटू राम का।
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भाईचारे में आई कमी
धौड़ गांव निवासी छोटूराम का कहना है कि आज हम आराम से सुख सुविधाओं के बीच आराम से अपने परिवारों के बीच बैठ रहे हैं। लेकिन आजादी से पहले ऐसा नहीं था। हालांकि समाज में काफी बदलाव आया है। आपसी भाईचारा खत्म हो गया है। भाई-भाई का दुश्मन हो गया। लेकिन पहले हर व्यक्ति एक दूसरे का सहयोग करता था। आपसी प्रेम और भाईचारा था। जिस गति से देश ने विकास किया है। सुख सुविधाएं बढ़ी है। उस प्रकार भाईचारा भी खत्म होता गया है।
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20 साल की उम्र में थामी थी बंदूक
धौड़ निवासी छोटूराम का जन्म 14 जून 1923 को हुआ था। 14 जून 1941 को वह सेना में भर्ती हुए थे। 2 मार्च 1943 को जब वे सिंगापुर में थे तो उस समय नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज का गठन किया था और उन्हें संबोधित किया था। आज भी 98 साल की उम्र में नेता जी की बातें याद कर उनमें जोश भर आता है। वर्ष 1946 में जेल की यातनाएं सहने के बाद वे वापस घर आए थे। 15 अगस्त 1947 का दिन सबसे बड़ी खुशी का दिन बनकर आया और देश आजाद हो गया। उसके बाद भी उन्होंने देश की सेना में रहकर देश की सेवा की है। आजादी के बाद वर्ष 1949 में वे दोबारा से ग्रनेडियर में भर्ती हो गए। वहां से 19 जून 1953 को सेवानिवृत्त हो गए और 1957 में एक बार फिर से स्पेशल आर्म्ड फोर्स में भर्ती हो गए और 31 दिसंबर 1985 को यहां से भी सेवानिवृत्त हो गए।