{"_id":"5bba5ee9867a55684d32a902","slug":"151538940649-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बूस्टिंग स्टेशन के वॉटर टैंक पर ढक्कन नहीं होने से तीन सूअर गिरे, दो को ग्रामीणों ने बाहर निकाला, एक की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बूस्टिंग स्टेशन के वॉटर टैंक पर ढक्कन नहीं होने से तीन सूअर गिरे, दो को ग्रामीणों ने बाहर निकाला, एक की मौत
Updated Mon, 08 Oct 2018 01:00 AM IST
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बौंदकलां। पेयजल आपूर्ति के लिए डूंगला तालाब पर स्थित बूस्टिंग स्टेशन के रखरखाव के प्रति जन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी कतई संजीदा नहीं हैं। विभाग की लापरवाही के चलते यहां बनाए टैंक खुले पड़े हैं और इनमें मृत पशु पड़े हैं। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ना लाजिमी है लेकिन अब तक न तो मृत पशु को टैंक से बाहर निकलवाया गया है और न टैंक पर ढक्कन लगाया गया है। इसके चलते भविष्य में भी बूस्टिंग स्टेशन पर कोई हादसा हो सकता है। शनिवार सुबह डूंगला तालाब पर स्थित बूस्टिंग स्टेशन में तीन सूअर गिर गए। ग्रामीणों ने उसी समय दो सूअरों को तो जिंदा निकाल दिया लेकिन एक सूअर काफी देर तक पानी में रहने के कारण मर गया जिससे बूस्टिंग स्टेशन का पानी भी दूषित हो गया।
बूस्टिंग स्टेशन के बाहर गेट नहीं होने के कारण लावारिस पशु इसमें आसानी से घुस जाते हैं। ये पशु दिनभर यहीं विचरण करते हैं। बूस्टिंग स्टेशन के अंदर पेयजल आपूर्ति के लिए बनाया टैंक पर ढक्कन नहीं होने के कारण इसमें अक्सर ये पशु गिर जाते हैं। इसके साथ ही बूस्टिंग स्टेशन में बच्चे भी खेलने पहुंच जाते हैं जिससे किसी भी समय पर कोई भी हादसा हो सकता है। बूस्टिंग स्टेशन में सफाई की भी कोई व्यवस्था नहीं है और जगह-जगह पर कंटीली झाड़ियां उगी हुई हैं। बूस्टिंग स्टेशन से वार्ड-14, गढ़ीपाना, बजारीपाना और केसापुरी में भी पानी जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को दूषित पेयजल आपूर्ति का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को इस बारे में ठोस कदम उठाने चाहिए। इस बारे में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के जेई सतीश कुमार यादव से संपर्क करना चाहा तो उन्होंने मोबाइल पर कॉल करने पर फोन रिसीव ही नहीं किया।
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बूस्टिंग स्टेशन के बाहर गेट नहीं होने के कारण लावारिस पशु इसमें आसानी से घुस जाते हैं। ये पशु दिनभर यहीं विचरण करते हैं। बूस्टिंग स्टेशन के अंदर पेयजल आपूर्ति के लिए बनाया टैंक पर ढक्कन नहीं होने के कारण इसमें अक्सर ये पशु गिर जाते हैं। इसके साथ ही बूस्टिंग स्टेशन में बच्चे भी खेलने पहुंच जाते हैं जिससे किसी भी समय पर कोई भी हादसा हो सकता है। बूस्टिंग स्टेशन में सफाई की भी कोई व्यवस्था नहीं है और जगह-जगह पर कंटीली झाड़ियां उगी हुई हैं। बूस्टिंग स्टेशन से वार्ड-14, गढ़ीपाना, बजारीपाना और केसापुरी में भी पानी जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को दूषित पेयजल आपूर्ति का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को इस बारे में ठोस कदम उठाने चाहिए। इस बारे में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के जेई सतीश कुमार यादव से संपर्क करना चाहा तो उन्होंने मोबाइल पर कॉल करने पर फोन रिसीव ही नहीं किया।
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