फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   एक साल पहले नंदीशाला में रोके गए थे 376 गोवंश, अब बचे महज 95

एक साल पहले नंदीशाला में रोके गए थे 376 गोवंश, अब बचे महज 95

Fri, 31 Aug 2018 01:08 AM IST
Updated Fri, 31 Aug 2018 01:08 AM IST
विज्ञापन
एक साल पहले नंदीशाला में रोके गए थे 376 गोवंश, अब बचे महज 95
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

चरखी दादरी। जिले के लोगों को लावारिस गोवंशों से निजात दिलाने की प्रशासनिक प्लानिंग पूर्णतया सिरे नहीं चढ़ पाने से अब हालात बिगड़ने लगे हैं। शहर के कैटल फ्री बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई नंदीशाला में इस समय महज 95 गोवंश ही बचे हैं। करीब एक साल पहले तक यहां 376 गोवंशों को टैग लगाए गए थे। इसके बाद नंदीशाला में कई गोवंशों की मौत के भी मामले सामने आए। हालांकि टैग लगे 100 से अधिक गोवंश अब शहर की सड़कों पर नजर आ रहे हैं और नंदीशाला में भी व्यवस्थाएं दम तोड़ रही है।
करीब एक साल पहले तत्कालीन जिला उपायुक्त विजय कुमार सिद्प्पा के निर्देशों पर पुराने मार्केटिंग बोर्ड कार्यालय की करीब दो एकड़ जमीन पर नंदीशाला शुरू की गई थी। उस समय यहां जन स्वास्थ्य विभाग को पानी के और मार्केटिंग बोर्ड व नगर परिषद के अधिकारियों भी जिम्मेदारियां सुनिश्चित की गई थी। नगर परिषद की टीमों ने बड़े पैमाने पर गोवंश पकड़ो अभियान चलाया था और करीब डेढ़ माह में ही पकड़कर नंदीशाला में छोड़े गए 376 गोवंशों को पशु पालन विभाग ने टैग लगाए थे। उस समय नंदीशाला में व्यवस्थाएं पटरी पर थीं लेकिन अब यहां हालात बिगड़े हुए हैं।
विज्ञापन

वहीं, गत दिनों शहर आगमन पर कृषिमंत्री ने गोवंशों की बेकद्री व नंदीशालाओं की अव्यवस्थाओं पर सरकार व जिला प्रशासन का बचाव भी किया था। कृषि मंत्री ने कष्ट निवारण समिति की बैठक में स्पष्ट किया था कि प्रदेश में जो नंदीशालाएं बनाई गई हैं उनमें व्यवस्थाएं बनाना सरकार या जिला प्रशासन का काम नहीं है। यहां प्रमुख लोगों को व्यवस्थाएं बनाने के लिए आगे आना होगा। कृषिमंत्री ने कहा था कि नंदीशालाओं में चारे के प्रबंध के लिए जिला प्रशासन के पास बजट है और न ही सरकार से बजट का कोई प्रावधान है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नंदीशाला में हर ओर अव्यवस्था का आलम
अग्रसेन धर्मशाला के सामने बनी नंदीशाला के मौजूदा हालातों का वीरवार सुबह अमर उजाला टीम ने जायजा लिया। इस दौरान सामने आया कि नंदीशाला में अब महज 95 गोवंश ही बचे हैं और नंदीशाला खाली पड़ी है। नंदीशाला में हरा चारा भी नजर नहीं आया। हालांकि यहां एक ढेरी सूखा चारा जरूर था। इसके अलावा खेल में पानी तो था लेकिन नंदीशाला में व्यवस्थाओं की भारी कमी देखने को मिली। वहीं, गोवंशों की घटती तादाद को देखते हुए नगर परिषद ने भी यहां तैनात अपने कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है। शुरूआत में यहां 10 कर्मचारी नियुक्त किए गए थे लेकिन वीरवार को यहां दो कर्मचारी ही नजर आए।
नंदीशाला पर 70 हजार की उधारी, हरा चारा हुआ बंद
नंदीशाला में व्यवस्था बनाने और गोवंशों के चारे का प्रबंध करने के लिए शहर के कुछ पार्षद व प्रमुख लोग आगे भी आए थे। कई माह तक इन्होंने अपने स्तर पर लोगों से सहयोग मांगकर यहां हरे चारे की व्यवस्था भी कराई। सूत्रों की मानें तो इस समय नंदीशाला में 70 हजार का चारा की उधारी है और इसके चलते पार्षदों ने हरा चारा खरीदना भी बंद कर दिया है। कृषिमंत्री के सामने यह मुद्दा उठने पर उन्होंने एक लाख रुपये देने की घोषणा की थी लेकिन अभी तक यह राशि नहीं मिली है।
शहर की सड़कों व अस्पताल परिसर में गोवंशों की भरमार
नंदीशाला से बाहर आए टैग लगे पशु शहर की सड़कों पर घूमते नजर आ रहे हैं। दादरी-रोहतक, दादरी-लोहारू, बस स्टैंड रोड, सब्जी मंडी क्षेत्र, हरि नगर, चंपापुरी क्षेत्र में काफी तादाद में लावारिस गोवंश हैं। इसके अलावा सिविल अस्पताल में भी गोवंशों का झुंड उत्पात मचाता है। दो दिन पहले गोवंशों की लड़ाई में कई ट्री गार्ड टूट गए थे।

अगर भविष्य में कोई गोशाला खोलना चाहेगा तो ग्राम पंचायत व पंचायत विभाग से पहले वेरिफाई कराया जाएगा और इसके बाद ही गोशाला खोलने की अनुमति दी जाएगी। इस पर प्रदेश सरकार विचार कर रही है। सामाजिक संगठनों व शहर के लोगों को चारे की व्यवस्था के लिए आगे आना चाहिए।
-ओमप्रकाश धनखड़, कृषिमंत्री
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed